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दीवाली पर पटाखे से झुलस गए तो कहां होगा इलाज? फरीदाबाद के अस्पताल में बर्न वार्ड का ही अता-पता नहीं

Published: Wed, 21 Oct 2026 04:47 PM (IST)Updated: Wed, 21 Oct 2026 05:02 PM (IST)

फरीदाबाद के नागरिक अस्पताल में दिवाली से पहले बर्न वार्ड की कमी चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे झुलसे मरीजों को इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

HighLights

  1. नागरिक अस्पताल में बर्न वार्ड की कमी चिंता का विषय।

  2. झुलसे मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ता है।

  3. दिवाली पर सैकड़ों झुलसने के मामले आते हैं, तैयारी नहीं।

अनिल बेताब, फरीदाबाद। दीवाली नजदीक ही है और जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से पटाखों से झुलस जाने पर अस्पताल आने वाले मरीजों के इलाज का कोई इंतजाम ही नहीं है।

पहले जिला नागरिक अस्पताल में दूसरे तल पर बर्न वार्ड बना हुआ था। उसे अब डे केयर कैंसर वार्ड बना दिया गया है। कहीं भी बर्न वार्ड न होने पर पटाखे जलाने, बिजली लाइन की चपेट में आने, गैस सिडेंडर फटने से झुलस जाने पर कोई मरीज नागरिक अस्पताल आता है तो उसे अन्य वार्डों में भर्ती किया जाता है या फिर झुलसे मरीज दूसरे अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार झुलसे मरीजों को बर्न वार्ड की जगह अन्य कहीं भर्ती करना दूसरे मरीजों के लिए जोखिम का कारण बन सकता है। मगर हैरानी की बात है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और डाक्टर इस मामले में गंभीर नहीं है। आठ नवंबर को दीवाली है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने कोई तैयारी नहीं की है।

यह हाल तब है, जबकि दीवाली के दौरान सरकारी व निजी अस्पतालों में झुलस जाने के 300 से अधिक मामले आते हैं। कई मामलों में ओपीडी में ही झुलसे हुओं का उपचार किया जाता है। कुछ मरीजों को भर्ती की जरूरत पड़ती है।

केस स्टडी

सर्जिकल वार्ड में किया भर्ती

गदपुरी निवासी सूरज वर्मा दो दिन पहले बिजली लाइन की चपेट में आने से झुलस गए थे। उनकी कमर और एक हाथ बुरी तरह झुलस गया था।

वह पहले बल्लभगढ़ अस्पताल गए थे। वहां से उन्हें नागरिक अस्पताल रेफर किया गया। बर्न वार्ड न होने के कारण उन्हें सर्जिकल वार्ड में बेड दिया गया।

विशेषज्ञ की राय

बर्न वार्ड में ही भर्ती हों झुलसे मरीज

झुलसे मरीजों को बर्न वार्ड के बजाय सामान्य या अन्य किसी वार्ड में भर्ती करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। घावों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। उचित साफ-सफाई, घावों की नियमित ड्रेसिंग और विशेषज्ञ निगरानी न मिलने पर मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

गंभीर रूप से झुलसे मरीजों में शरीर में पानी की कमी, तेज दर्द और संक्रमण कर आशंका हो सकती हैं। चेहरे और गर्दन पर धुएं के संपर्क में आने से सांस की नली में सूजन का खतरा भी रहता है। हाथों, आंखों और चेहरे पर पटाखों से लगी चोटों के लिए विशेष उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

प्लास्टिक सर्जन डॉ. अक्षत नैय्यर कहते हैं कि हर मरीज को बर्न वार्ड में भर्ती करना जरूरी नहीं है। हल्के झुलसे मरीजों का इलाज ओपीडी में भी किया जा सकता है। उचित चिकित्सा सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध होना चाहिए।

दीवाली के दौरान सरकारी व निजी अस्पतालों में झुलसने पर आए मामले

-2025-310
-2024-295
-2023-307
-2022-270

दीवाली के दो सप्ताह बाद भी आते हैं मामले

दीवाली के दो सप्ताह पहले और बाद में भी पटाखे जलाने से झुलसने के मामले आते हैं। पांच नंबर के प्लास्टिक सर्जन डा.अक्षत नैय्यर के यहां पिछले वर्षों में आए मामलों का ब्योरा

-वर्ष, कुल मामले, बच्चे

-2025-105-70
-2024-85, 55

यह अनिवार्य सुविधाएं होनी चाहिए

-05 बेड के बर्न वार्ड के लिए
-01 प्लास्टिक सर्जन
-20 नर्सिंग अधिकारी, अलग से बर्न वार्ड के लिए।
-02, सीनियर रेजिडेंट,(चिकित्सा अधिकारी)

(स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. जसवंत सिंह द्वारा दी गई जानकारी)

सीनियर रेजिडेंट का पद ही स्वीकृत नहीं

जिला नागरिक अस्पताल में अभी बर्न वार्ड नहीं है। यहां न तो प्लास्टिक सर्जन है और न ही अलग से नर्सिंग अधिकारी। सीनियर रेजिडेंट का पद ही स्वीकृत नहीं है।

हमने बर्न वार्ड बनाने की तैयारी कर ली है। जल्दी ही बर्न वार्ड बनाया जाएगा। दीवाली वाले दिन हर पाली में आपातकालीन विभाग में दो डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी डाक्टरों की छुट्टियां रद की गई हैं। जरूरत पड़ने पर किसी भी विशेषज्ञ चिकित्सक को किसी भी पाली में बुलाया जा सकता है।

-डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।

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