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अरावली की सुरक्षा के लिए बनेगी 6 किमी लंबी दीवार, रिहायशी इलाकों में नहीं भटकेंगे वन्यजीव

Published: Tue, 03 Nov 2026 06:42 PM (IST)

फरीदाबाद के अरावली वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक करोड़ रुपये की ...और पढ़ें

अरावली वन क्षेत्र। फोटो-दैनिक जागरण

अरावली वन क्षेत्र। फोटो-दैनिक जागरण

HighLights

  1. अरावली वन क्षेत्र में 6 किमी लंबी सुरक्षा दीवार बनेगी।

  2. एक करोड़ रुपये की लागत से नवंबर अंत तक निर्माण शुरू।

  3. अवैध खनन, अतिक्रमण और वन्यजीव सुरक्षा में मिलेगी मदद।

निभा रजक, फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने तीन साल से लंबित योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर ली है। पाली पुलिस चौकी से एमवीएन स्कूल (सूरजकुंड रोड) तक करीब एक करोड़ रुपये की लागत से लगभग छह किलोमीटर की सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी।

इसके लिए बजट को मंजूरी मिल गई है। नवंबर के अंतिम सप्ताह से निर्माण कार्य शुरू होने की तैयारी है। इससे पहले सड़क के किनारे से अतिक्रमण को हटाया जाएगा। दीवार बनने से वन क्षेत्र में अवैध खनन, अतिक्रमण और गैर वानिकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

क्यों बनाया जा रहा सुरक्षा दीवार?

अरावली वन क्षेत्र की सीमा आबादी और सड़क से लगती है। ऐसे में जंगल में लोगों की अनधिकृत आवाजाही और गैर वानिकी गतिविधियों को रोकना वन विभाग के लिए चुनौती बना रहता है। कई बार वन क्षेत्र में बाहरी लोगों की आवाजाही से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में भी हस्तक्षेप होता है।

सुरक्षा दीवार बनने से वन क्षेत्र की सीमा स्पष्ट होगी और अनधिकृत प्रवेश को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वन विभाग की ओर से वर्ष 2023 में ही इस हिस्से में सुरक्षा दीवार बनाने की योजना तैयार की गई थी। हालांकि, बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। वन विभाग अगले सप्ताह निर्माण को लेकर टेंडर लगाएगा।

सीसीटीवी से भी रखेंगे नजर

सुरक्षा दीवार के साथ निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। इसके लिए वन विभाग की ओर से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे वन क्षेत्र की सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने में आसानी होगी।

वन्यजीवों की सुरक्षा होगी मजबूत

अरावली क्षेत्र में तेंदुआ, लकड़बग्घा, नीलगाय, सियार सहित कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। जंगल के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां वन्यजीवों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। बीते कुछ महीनों से अरावली वन क्षेत्र में बाइकर्स की आवाजाही बढ़ गई है।

तेज आवाज और स्पीड के साथ निकलने वाले बाइकों से वन्यजीवों को परेेशानी होती है। वह डर के कारण वन क्षेत्र से सड़क की ओर भागते हैं। जिससे हादसे का शिकार हो जाते हैं। कई बार भोजन और पानी की तलाश में भी जंगल से आबादी की ओर से वन्यजीव आ जाते हैं।

विभाग का मानना है कि सुरक्षा दीवार से जंगल की सीमा पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। वह जंगल से आबादी की ओर नहीं पाएंगे।

कब-कब आबादी की ओर आए वन्यजीव

  • तीन सितंबर: अनंगपुर गांव में रात के समय तेंदुआ घूमता हुआ दिखाई दिया था।
  • अप्रैल : अनंगपुर गांव के रिहायशी क्षेत्र में रात करीब 9:30 बजे तेंदुआ दिखाई दिया था।
  • 24 मार्च: भाकरी गांव के प्राचीन मंदिर के तेंदुआ को देखा गया था।
  • जनवरी: कोट गांव और मंदिर के पास झरने में तेंदुए और लकड़बग्घे देखे गए थे।

सुरक्षा दीवार बनाने की योजना को बजट मंजूरी मिल चुकी है। नवंबर के अंतिम सप्ताह से निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है। दीवार के साथ सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे, जिससे वन क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। इससे अवैध खनन, अतिक्रमण और अनधिकृत आवाजाही रोकने में मदद मिलेगी।
-झलकार उयके, वन मंडल अधिकारी।

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