एंबुलेंस में न गियर बॉक्स न टायर, फिर भी पी गई 50 लाख का तेल; जांच शुरू होते ही अलर्ट हुए कर्मचारी
फरीदाबाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एंबुलेंस में 50 लाख से अधिक के डीजल घोटाले का मामला सामने आया ...और पढ़ें
-1793720677922_m.webp)
एंबुलेंस फ्यूल घोटाले में आगे बढ़ी जांच। फोटो- दैनिक जागरण
HighLights
50 लाख से अधिक का डीजल घोटाला सामने आया।
कर्मचारी खराब एंबुलेंस को स्वास्थ्य केंद्रों पर लगा रहे।
चार अधिकारियों की समिति मामले की गहन जांच कर रही।
अनिल बेताब, फरीदाबाद। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित एंबुलेंस को चलाए बिना ही 50 लाख रुपये से अधिक का डीजल पीने के मामले में कर्मचारी खेल पर खेल कर रहे हैं।
अब तक जिन आठ एंबुलेंस के नाम पर कर्मचारियों ने फ्यूल कार्ड से डीजल की खरीदारी की थी। उनमें से एक एंबुलेंस धौज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा दूसरी मोहना के स्वास्थ्य केंद्र में खड़ी कर दी गई है। इससे कई महीने पहले यही एंबुलेंस मरम्मत के लिए वाइएमसीए चौक के नजदीक एक सर्विस सेंटर पर भेजी गई थी।
बिना सर्विसिंग के वापस लाया गया एंबुलेंस
अब जब सरकार तक मामला पहुंचा और जांच शुरू होने लगी तो ऐसे में कर्मचारी नया खेल करने लगे। इन्हीं एंबुलेंस को बिना मरम्मत करवाए सर्विस सेंटर से धौज व मोहना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में खड़ी करवा दीं गई, ताकि अगर जांच आगे बढ़े हो तो गड़बड़ करने वाले कर्मचारी बता सकें कि एंबुलेंस तो चल रहीं हैं, जो अब भी अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में ही हैं।
मामले की गंभीरता से जांच शुरू
हैरानी की बात है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सर्विस सेंटर ने इन एंबुलेंस की मरम्मत का इस्टीमेट भी जिला स्वास्थ्य विभाग को पहले दिया था। ऐसे में कर्मचारियों के खेल का पता चलता है।
एक तरफ एंबुलेंस की मरम्मत का इस्टीमेट बनवाया गया, वहीं इन एंबुलेंस के लिए फ्यूल खरीदा गया। मंगलवार को जागरण ने जब स्वास्थ्य केंद्र जाकर इस मामले की पड़ताल की तो सारा खेल सामने आया। एंबुलेंस के टायर खराब थे और गियर बाक्स भी नहीं थे।
ऐसे में एंबुलेंस फील्ड में कैसे चलती। अपने आप में सवाल है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इसकी बारीकी से जांच शुरू कर दी है।
चार अधिकारियों की बनाई गई कमेटी
स्वास्थ्य निदेशक डा. वीरेंद्र यादव की ओर से चार अधिकारियों की बनाई गई कमेटी मामले की जांच कर रही है। जांच को गति मिलते देख स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने बचाव में जुगाड़ में लग गए हैं।
अब तक की पड़ताल में इस सारे गड़बड़झाले में एंबुलेंस सेवा योजना से जुड़े कर्मचारियों का ही खेल सामने आ रहा है। रेफरल ट्रांसपोर्ट स्कीम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मुख्यालय की भी दखल हो सकती है।
फ्यूल कार्ड के इस्तेमाल की मुख्यालय से ही अनुमति मिलती है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी। स्वास्थ्य
विभागों के कर्मचारियों पर सवाल
विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में हैं कि उन्होंने बजट खर्च होने के मामले में क्या निगरानी की। हर महीने विभाग की बैठक होती है और तीन महीने में एक बार होने वाली समीक्षा बैठक में किए गए खर्च पर चर्चा होती है।
ऐसे करते थे खेल, रजिस्टर में दर्ज किए फर्जी नाम अगर किसी गर्भवती या अन्य किसी मरीज को एंबुलेंस की जरूरत पड़ती है तो लोग एंबुलेंस कंट्रोल रूम 112 पर फोन करते हैं।
इसके बाद संबंधित नागरिक नागरिक के यहां एंबुलेंस पहुंचती है। यह सारा खेल ही फर्जी है। न कहीं एंबुलेंस पहुंची, न ही किसी ने फोन किया।
पड़ताल में खुली पोल
जागरण पड़ताल में यह बात सामने आई कि सबसे अधिक गड़बड़ी बल्लभगढ़ से एम्स भेजे जाने वाले मरीजों के नाम हुई है। एंबुलेंस कंट्रोल रूम के रिकार्ड की अगर सही तरीके से जांच की जाए तो सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
असल में जब किसी नागरिक का एंबुलेंस मंगवाने के लिए एंबुलेंस कंट्रोल रूम में फोन किया जाता है तो उसका पता और मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज होता है। अब तक स्थानीय स्तर पर हुई जांच में पता चला है कि रजिस्टर में कर्मचारियों ने अपने ही मित्रों और रिश्तेदारों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज किए गए हैं।
हर एंबुलेंस के नाम से है पेट्रो कार्ड
प्रत्येक जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रेफरल ट्रांसपोर्ट स्कीम चल रही है। स्कीम के तहत गर्भवती या अन्य मरीजों को अस्पताल तक लाने व जाने के लिए लगभग 20 एंबुलेंस चल रही हैंं। हर एंबुलेंस के नाम से पेट्रो कार्ड भी दिया जाता है, जिसके प्रयोग के लिए मुख्यालय से अनुमति मिलती है।
सभी एंबुलेंस से जुड़े सारेे रिकार्ड की जांच की जा रही है। जांच में देखा जाएगा कि कहीं एंबुलेंस की मरम्मत के नाम पर तो कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
बल्लभगढ़ से एम्स भेजे जाने वाले मरीजों का रिकार्ड भी जांचा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।
-डा. वीरेंद्र यादव, स्वास्थ्य निदेशक, हरियाणा।
यह भी पढ़ें- फरीदाबाद में एंबुलेंस फ्यूल घोटाला: बिना चली गाड़ियों का 50 लाख का डीजल गबन, जांच शुरू
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।