अंबाला, [दीपक बहल]। भारतीय रेलवे के वंदे भारत एक्सप्रेस सीरीज की 40 नई ट्रेनों का निर्माण फिलहाल अधर में पड़ता नजर आ रहा है। इन ट्रेनों का निर्माण टेंडर के खेल में खटाई में पड़ गया है। ऐसे में इस सीरीज की ट्रेनों में सफर के लिए अभी लोगों को इंतजार करना होगा। चेन्‍नइ्र की इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आइसीएफ) में इन ट्रेनों का निर्माण होना था, लेकिन रेलवे बोर्ड ने सभी टेंडरों को रद कर दिया है।

पहले जारी हुए 40 ट्रेनों के टेंडर, फिर हुए संशोधित, और सभी रद कर दिए गए

वंदेभारत एक्सप्रेस के अलावा रेलवे मेन लाइन इलेक्टिक मल्टीपुल यूनिट (मेमू) या इलेक्टिक मल्टीपुल यूनिट (ईएमयू) और एयरकंडीश ईएमयू के भी टेंडर रद कर दिए गए हैं। बताया जाता है कि करीब तीन हजार करोड़ रुपये के टेंडर रद किए गए हैं। पहले 40 रैक (ट्रेन) का टेंडर डाला गया, लेकिन जब बात सिरे नहीं चढ़ी, तो घटाकर 37 का कर दिया। लेकिन, इसके बाद सभी निविदाओं (टेंडर) को रद कर दिया गया।

करीब तीन हजार करोड़ रुपये के टेंडर किए गए हैं रद, नई ट्रेनें पटरी पर उतरने में लगेगा लंबा समय

अब कहा जा रहा है कि नए सिरे से निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लिहाजा, नई गाड़ियों के पटरी पर उतरने में लंबा समय लगेगा। टेंडर रद करने के पीछे भले ही कई बातें सामने आईं, लेकिन रेलवे ने नई तकनीक को जोड़ने, पारदर्शिता आदि जैसे कारण बताए हैं। बता दें कि इसी साल 15 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से वाराणसी के बीच देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

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इसी साल 15 फरवरी २०१९ को देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस रवाना हुई थी

आइसीएफ ने वंदे भारत के दो रैक (ट्रेन) तैयार किए थे, जिसमें से एक नई दिल्ली-वाराणसी के बीच चल रही है, जबकि दूसरी को नई दिल्ली-कटरा के बीच चलाया जाना है। आइसीएफ ने 40 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के निर्माण के लिए टेंडर इसी साल 15 मार्च को जारी किया था। इसमें भारतीय ही नहीं विदेशी कंपनियों ने भी भागीदारी की। लेकिन, इनमें से महज एक टेंडर ही अलाट किया गया और 39 रैक का टेंडर अलाट नहीं किया गया। इसके बाद फिर से 37 रैक का टेंडर इसी साल 10 जुलाई को जारी किया गया, लेकिन इसके बाद रेलवे बोर्ड ने सभी टेंडरों को रद करने का आदेश जारी कर दिया।

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इतनी आपाधापी क्यों?

बंदे मातरम ट्रेन के लिए मची आपाधापी कई सवाल उठाती है। 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस मौजूदा राजधानी और शताब्दी के बेड़े की जगह लेंगी। एक ट्रेन के निर्माण पर सौ करोड़ रुपये की लागत आई है। बहरहाल, 40 ट्रेनों के निर्माण को लेकर सामने आई टेंडरिंग की यह आपाधापी कुछ बड़े सवाल भी खड़े कर रही है। निविदा दाखिल करने वाली एक कंपनी ने भी इस पर सवाल उठाया है, जिसने टेंडर तो 40 ट्रेनों के लिए भरा था, लेकिन उसे ऑफर किया गया महज दो ट्रेनों का, जिसे उसने ठुकरा दिया।

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एक माह बाद स्पष्ट होगी स्थिति

इंटीग्रल कोच फैक्टरी के सीनियर पीआरओ जीवी वेंकटेशन ने बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस सीरीज की 40 नई ट्रेनों का टेंडर रद होने के मामले में एक माह बाद स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट होगी। जब उनसे पूछा गया कि पहले 40 और फिर 37का टेंडर डाला गया और फिर सभी को रद कर दिया गया, इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं, तो उनका कहना था कि महाप्रबंधक ने बताया है कि अगस्त माह में स्थिति स्पष्ट होगी।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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