रेल सफर में सिर्फ 45 पैसे में पाएं ₹10 लाख का बीमा कवर, क्या है पूरी प्रक्रिया?
आइआरसीटीसी ई-टिकट बुकिंग के दौरान 45 पैसे में वैकल्पिक यात्रा बीमा प्रदान करता है, जो रेल हादसे की स्थिति में 10 लाख रुपये तक का आर्थिक कवर देता है।

रेल सफर में सिर्फ 45 पैसे में पाएं ₹10 लाख का बीमा कवर (फाइल फोटो)
HighLights
45 पैसे में 10 लाख तक का रेल बीमा कवर
आइआरसीटीसी ई-टिकट बुकिंग पर वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध
मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर मिलता है अधिकतम लाभ
दीपक बहल, अंबाला। रेल यात्रा के दौरान होने वाले हादसों का जोखिम पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, लेकिन महज 45 पैसे खर्च कर यात्री आर्थिक सुरक्षा जरूर हासिल कर सकते हैं।
24 अक्टूबर को रेलवे की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आइआरसीटीसी) की ई-टिकट बुकिंग के दौरान उपलब्ध वैकल्पिक यात्रा बीमा की सुविधा यात्रियों को हादसे की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करती है।
इसके तहत पात्र रेल दुर्घटना या निर्धारित अप्रिय घटना में यात्री की मृत्यु अथवा स्थायी पूर्ण दिव्यांगता होने पर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है।
वहीं, हादसे में चोट लगने पर अस्पताल में भर्ती होकर उपचार कराने के लिए दो लाख रुपये तक और पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए 10 हजार रुपये तक का प्रविधान है।
स्थायी आंशिक दिव्यांगता पर अधिकतम 7.50 लाख रुपये तक बीमा कवर मिलता है। हालांकि, यह सुविधा अपने आप लागू नहीं होती। यात्री को टिकट बुक करते समय बीमा का विकल्प चुनना पड़ता है और इसके लिए निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी है।
आइआरसीटीसी की ओर से जारी यात्रा बीमा की शर्तों के अनुसार, 17 फरवरी 2024 से प्रीमियम सभी करों सहित 45 पैसे प्रति यात्री निर्धारित है। यह सुविधा भारतीय नागरिकों के लिए आइआरसीटीसी के माध्यम से बुक कराए गए पात्र ई-टिकट पर उपलब्ध है।
कन्फर्म, आरएसी और आंशिक रूप से कन्फर्म टिकट शामिल हैं। एक पीएनआर पर बीमा का विकल्प चुनने पर पीएनआर में बुक सभी यात्रियों के लिए इसे लेना अनिवार्य है।
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चोट के प्रभाव के अनुसार तय होता है मुआवजा
स्थायी आंशिक दिव्यांगता में मुआवजा चोट के प्रभाव के अनुसार तय होता है। आइआरसीटीसी के बुकिंग इतिहास में पालिसी नंबर भी देखा जा सकता है।
यदि यात्री नामांकन का विवरण नहीं भरता है और बीमा दावा बनता है, तो भुगतान कानूनी वारिसों को किया जा सकता है। मृत्यु के दावे में घोषित नामांकित व्यक्ति को भुगतान का प्रविधान है। नामांकित व्यक्ति नहीं होने की स्थिति में कानूनी वारिस को उत्तराधिकार संबंधी प्रमाणपत्र के आधार पर दावा करना पड़ सकता है।
इन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा बीमा
यदि यात्री टिकट बुक कराने के बावजूद ट्रेन में सवार नहीं होता, तो दावा स्वीकार नहीं होगा। टिकट कन्फर्म नहीं होने के बावजूद ट्रेन में सवार होने की स्थिति में भी बीमा लाभ नहीं मिलेगा।
रेलवे ट्रैक पार करते समय हुए हादसे, नशे की स्थिति में हुई दुर्घटना और आपराधिक मंशा से कानून का उल्लंघन करने के दौरान हुई घटना पर भी पालिसी के तहत मुआवजा नहीं दिया जाता।
आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास, जानबूझकर खुद को चोट पहुंचाने और निर्धारित जोखिमपूर्ण गतिविधियों से जुड़ी घटनाओं पर भी प्रतिबंध हैं। सामान्य बीमारी के इलाज का खर्च इस बीमा के तहत कवर नहीं है।
दावा करने के लिए चार महीने की समयसीमा
बीमा कंपनी के पास घटना की तारीख से चार महीने के भीतर दावा संबंधी लिखित विवरण और जरूरी दस्तावेज जमा कराने होते हैं। मृत्यु के मामले में रेलवे प्राधिकरण की दुर्घटना संबंधी रिपोर्ट, मृत यात्रियों का विवरण, दावा प्रपत्र, नामांकित व्यक्ति की पहचान और बैंक भुगतान संबंधी दस्तावेज मांगे जाते हैं।
दिव्यांगता के दावे में रेलवे की रिपोर्ट के साथ चिकित्सक की रिपोर्ट, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, एफआइआर, एक्स-रे और अन्य जांच रिपोर्ट की जरूरत हो सकती है।
पॉलिसी के अनुसार, सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर देय बीमा लाभ का भुगतान किया जाना है। दावा और भुगतान से संबंधित पत्राचार सीधे संबंधित बीमा कंपनी से करना होता है।
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