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हरियाणा के युवक का नौकरी के लिए 13 साल से संघर्ष, हैंडराइटिंग मैच नहीं; फिंगर प्रिंट्स की फोरेंसिक जांच से उम्मीद

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Tue, 27 Oct 2026 07:05 AM (IST)

रेलवे ग्रुप-डी भर्ती में हैंडराइटिंग न मिलने पर नौकरी से वंचित दीपक को कैट चंडीगढ़ से राहत मिली है। अब ...और पढ़ें

रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के लिए लंबा संघर्ष। कैट तक पहुंचा मामला। (एआई जनरेटेड फोटो)

रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के लिए लंबा संघर्ष। कैट तक पहुंचा मामला। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. हैंडराइटिंग न मिलने पर उम्मीदवार को नौकरी नहीं मिली थी।  

  2. उम्मीदवार को कैट की चंडीगढ़ बेंच से मिली बड़ी राहत।

  3. कैट ने रेलवे भर्ती में फिंगर प्रिंट्स जांच का आदेश दिया।

रवि अटवाल, चंडीगढ़। रेलवे में ग्रुप-डी की एक पोस्ट के लिए मामला इतना उलझ गया कि अब उम्मीदवार के फिंगर प्रिंट्स की फोरेंसिक जांच करवानी पड़ेगी। 13 साल से नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे पानीपत, हरियाणा के दीपक को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) से बड़ी राहत मिली है।

उन्होंने वर्ष 2013 में रेलवे में ग्रुप-डी की भर्ती प्रक्रिया पास कर ली थी, लेकिन कुछ दस्तावेजों में उनकी हैंडराइटिंग मेल नहीं खा रही थी। जिस कारण उन्हें नौकरी नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने कैट की चंडीगढ़ बेंच में याचिका दायर कर दी।

उन्होंने याचिका में कहा कि अगर उनकी हैंडराइटिंग मेल नहीं खा रही तो उनके फिंगर प्रिंट्स की जांच की जा सकती है। उनकी याचिका को कैट ने मंजूर करते हुए दीपक के अंगूठे के निशान की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) से जांच करवाने के निर्देश दिए।

साथ ही यह भी कहा कि अगर उनके फिंगर प्रिंट्स भर्ती के लिए जमा करवाए गए दस्तावेजों में मौजूद अंगूठे के निशानों से मेल खा गए तो उन्हें नियुक्ति दी जाए। कैट ने इस पूरी प्रक्रिया को आठ हफ्तों के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

सभी टेस्ट पास किए, हैंडराइटिंग ने अड़ाया मामला

हरियाणा के पानीपत जिले की समालखा तहसील के गांव सहरमालपुर निवासी दीपक ने रेलवे की ग्रुप डी भर्ती के लिए आवेदन किया था। उत्तरी रेलवे ने 30 दिसंबर 2013 को विभिन्न मंडलों में ग्रुप डी के 5679 पदों को भरने के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की थी।

दीपक ने लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल जांच सफलतापूर्वक पास कर ली थी। हालांकि, दस्तावेजों की जांच के दौरान आवेदन फार्म, ओएमआर शीट और अन्य दस्तावेजों में हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर में अंतर पाए जाने पर उसकी उम्मीदवारी रद कर दी गई।

हालांकि रेलवे ने दस्तावेजों की जांच के लिए मामले को विशेषज्ञ के पास भेजा था। विशेषज्ञ की रिपोर्ट में भी उनकी हैंडराइटिंग कई जगहों पर आपस में मेल नहीं खा रही थी। इसलिए उन्हें नौकरी नहीं दी गई।

अंगूठे के निशान की जांच कराने की दी थी दलील

दीपक ने अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए कहा कि उसने सभी परीक्षाएं और औपचारिकताएं स्वयं पूरी की थीं। यदि उसकी पहचान को लेकर संदेह था तो दस्तावेजों पर मौजूद अंगूठे के निशान का सत्यापन कराया जा सकता था।

हालांकि इस पर रेलवे अधिकारियों ने दलील दी थी कि विशेषज्ञ की रिपोर्ट में भी हैंडराइटिंग मैच नहीं हुई थी। इसी आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद की गई थी।

वहीं, दीपक के वकील ने हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल हैंडराइटिंग में अंतर के आधार पर किसी उम्मीदवार को अयोग्य ठहराना उचित नहीं है, खासकर तब जब सत्यापन के लिए अंगूठे के निशान जैसे वैज्ञानिक विकल्प उपलब्ध हों।