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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 29, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Haryana: आरक्षण की समीक्षा पर सरकार और राष्‍ट्रीय अनुसूचित जात‍ि आयोग ने मांगा समय, कोर्ट ने स्‍थगित की सुनवाई

By Jagran NewsEdited By: Himani Sharma
Published: Thu, 29 Jun 2023 10:18 AM (IST)

Haryana News आरक्षण की समीक्षा पर सरकार और रष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जवाब के लिए समय मांगा है। जिस ...और पढ़ें

आरक्षण की समीक्षा पर सरकार और राष्‍ट्रीय अनुसूचित जात‍ि आयोग ने मांगा समय, कोर्ट ने स्‍थगित की सुनवाई
आरक्षण की समीक्षा पर सरकार और राष्‍ट्रीय अनुसूचित जात‍ि आयोग ने मांगा समय, कोर्ट ने स्‍थगित की सुनवाई

चंडीगढ़, राज्य ब्यूरो: संविधान बनने के बाद से राजनीति के लिए आरक्षण का इस्तेमाल और मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए आरक्षण की समीक्षा नहीं करने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार तथा अनुसूचित जाति आयोग से जवाब मांगा है। सभी पक्षों द्वारा इस मामले में जवाब देने के लिए समय की मांग की गई, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है।

आरक्षण की समीक्षा के बारे में कहा

स्नेहांचल चैरिटेबल ट्रस्ट ने याचिका दाखिल करते हुए हाई कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीबीसी) की गाइड लाइन के अनुसार तथा इंदिरा साहनी व राम सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण की समीक्षा के बारे में कहा गया है।

आरक्षण की हर 10 साल में समीक्षा होनी चाहिए। बावजूद इसके आज तक समीक्षा नहीं हुई है। वोट बैंक के लिए आरक्षण पाने वाली जातियों की संख्या में बढ़ोतरी तो कर दी जाती है, परंतु किसी जाति को इससे बाहर नहीं किया जाता है।

10 वर्ष में रिव्‍यू करने का रखा गया प्रविधान

याची ने कहा कि आरक्षण लागू करते हुए हर 10 वर्ष में इसे रिव्यू करने का प्रविधान रखा गया था, परंतु यह कार्य किसी ने भी नहीं किया। याची ने कहा कि हरियाणा में आरक्षण के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट को 1995 में अपनाया गया और इस रिपोर्ट के आधार पर शेड्यूल ए और बी तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट में भी यह कहा गया था कि 20 वर्षों में पिछड़े वर्ग को दिए गए आरक्षण की समीक्षा की जाए।

2000 में होनी चाहिए थी समीक्षा

याची ने कहा कि इस आयोग की रिपोर्ट को 15 साल बाद 1995 में अपनाया गया था और ऐसे में 2000 में इसकी समीक्षा होनी चाहिए थी। परंतु 2017 तक 37 साल बीत गए हैं लेकिन किसी भी स्तर पर समीक्षा का प्रयास नहीं किया गया।

याची ने कहा कि एनसीबीसी और सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में आरक्षण व्यवस्था के लिए आंकड़े एकत्रित करने और समीक्षा करने के लिए पूरा प्रक्रिया को स्पष्ट किया है, लेकिन राजनीतिक दलों ने हित साधने के लिए इसे अपनाया ही नहीं।

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