अहमदाबाद, शत्रुघ्‍न शर्मा। दुनिया भर में प्रसिद्ध जूनागढ की गीर गाय की संख्या को बढाने के लिए सरकार के ब्राजील से गीर नस्‍ल के शुक्राणु आयात करने के फैसले का गुजरात में पुरजोर विरोध शुरु हो गया है। कामधेनू आयोग के अध्यक्ष खुद चाहते है गीर की स्‍थानीय नस्ल को ही बढावा देना चाहिए। स्थानीय पशुपालक भी जूनागढ में गायों का आईवीएफ सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। 

विश्व में अग्रणी दूध उत्‍पादक ब्राजील व अमरीका वर्ष 1850 से ही गुजरात की गीर नस्‍ल की गायों का आयात कर रहे हैं। दोनों देशों में गीर गायों की सैकडों क्रॉस ब्रीड तैयार कर ली है जिनसे लाखों लीटर दूध का उत्‍पादन कर रहे हैं। गुजरात में लगातार घट रही गीर गायों की संख्‍या को बढ़ाने के लिए केंद्र व गुजरात सरकार ने इसी वर्ष ब्राजील के साथ एक समझौता कर वहां से गीर नस्ल के सांडों के शुक्राणुओं का आयात करने का समझौता किया लेकिन इसको लेकर विरोध शुरु हो गया है। गीर नस्ल को लुप्त्‍ होने से बचाने के लिए केंद्र व गुजरात सरकार विविध स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। ब्राजील से पशु वैज्ञानिक जोज ओटावियों के जूनागढ पहुंचने के बाद मामला गरमा गया है।

ओटावियो ने बताया कि गीर नस्‍ल की गाय को बचाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं उनमें से एक ब्राजील से 10 हजार शुक्राणु मंगवाना भी शामिल है, वे बताते हैं कि यह नस्ल सुधारने की भी योजना है। उन्होंने बताया कि भारत में सभी गायों को एक सा चारा व पशुआहार दिया जाता है लेकिन ब्राजील में हर गाय के लिए उसकी जरुरत के अनुसार चारा व पशु आहार दिया जाता है। 

ग्रामीणों ने गीर गाय के संरक्षण व नस्‍ल को बढाने केि‍लए गीर गाय गौरस प्राइवेट लिमिटेड बनाकर गीर गाय आईवीएफ सेंटर, उन्नत तकनीक की गौशाला बनाने आदि योजना पर काम शुरु करि‍ दया है। पशुपालक बताते हैं कि चालीस साल पहले ब्राजील हमारे यहां से 40 गाय लेकर गए थे अब वहां 21 करोड गाय है, जबकि हमारे पास 2 करोड गाय थी जो घटकर 25 लाख रह गई है। पशुपालकों का मानना है कि हर हाल में सरकार को असल गीर नस्ल को ही बढावा देना चाहिए ताकि हमारी स्वदेशी नस्ल खराब नहीं हो। 

सरकार ने इसी वर्ष ब्राजील से शुक्राणू आयात करने का समझौता किया था, इसकी जरुरत नहीं है। कामधेनू आयोग गौ संरक्षण व नस्ल सुधार के कई कार्यक्रम चला रहा है। ब्राजील से शुक्राणु लाने से गीर गाय की असली नस्‍ल खराब हो जाएगी चूंकि वह क्रॉस ब्रीड व म्‍यूटेशन हो चुकी प्रजाति है। 

वल्‍लभ भाई कथीरिया, चैयरमेन कामधेनू आयोग 

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Posted By: Babita kashyap

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