अहमदाबाद, जेएनएन। राज्य में बरसात का आखिरी दौर दस्तक दे रहा है। वहीं जलजनित बीमारियों का जाल फैला हुआ है। गुजरात में घर-घर मरीज पाये गये हैं। राज्य में डेंगू का कहर यथावत है। स्वास्थय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 4919 मरीज डेंग्यू से परेशान हैं। वहीं मलेरिया का आंकड़ा 1.12 लाख तक पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त जहरी मलेरिया, चिकनगुनिया, डिप्थेरिया तथा पीलिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। राज्य जलजनित बीमारियों के शिकंजे में है। ऐसे हालात में स्वास्थय विभाग हरकत में आ गया है।

इस बार गुजरात में अभी तक कुल 145 प्रतिशत बरसात हुई है। इससे पेयजल की समस्या हल हो गयी है। परन्तु जगह-जगह जल भराव के कारण जलजनित रोगों की संख्या में काफी वृद्दि हुई है। राज्य में मलेरिया, बुखार,  डेंगू, पीलिया, चिकनगुनिया, डिप्थेरिया सहित कई बीमारियां बड़ी तादाद में लोगों को अपने शिकंजे में ले लिया है। सितम्बर महीने के अंतिम सप्ताह की रपट के अनुसार पीलिया में 2.6 प्रतिशत, मलेरिया में चार प्रतिशत, डेंग्यू में 3.5 प्रतिशत, चिकनगुनिया में 36 प्रतिशत, डिप्थेरिया में 50 प्रतिशत और जहरीमलेरिया में 6.6 प्रतिशत की वृद्दि हुई है। अब जब बीमारियां बेकाबू हैं तब प्रशासन ने इसका संज्ञान लिया है।

सितम्बर के अंतिम सप्ताह में राज्य में मच्छर एवं जलजनित तकरीबन 14.84 लाख मरीज पाये गये। इससे साबित होता है कि हालात कहां तक नाजुक है। ग्रामीण इलाकों में तो जहां अस्पताल मरीजों से भर गये हैं, वहीं डॉक्टर और पैरा मेडिकल कर्मचारियों के अभाव में हालात बदतर है। वहीं शहरों सरकार और महानगरपालिका संचालित अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ सी आयी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 23 से 29 सितंबर के दौरान गुजरात पीलिया के 2980, बुखार के 11,4,59, मलेरिया के 1,12,715, डेंगू के 4919 और चिकनगुनिया के 401 मरीज पाये गये हैं। पूरे गुजरात में सर्वाधिक मरीज अहमदाबाद शहर और ग्रामीण क्षेत्र में पाये गये हैं। यहां मच्छर और जलजनित बीमारियों के 1.20 लाख मरीज विविध अस्पतालों में दर्ज हुए हैं। अहमदाबाद जिला में डेंग्यू के 1821, मलेरिया 17124, पीलिया 854 और चिकनगुनिया के 70 मरीज इलाज के लिए आये।

इस दौरान बरसात की इस ऋतु में गत एक सप्ताह में ही सांप 301 लोगों को सर्पदंश का इलाज किया गया। सर्वाधिक 44 लोग वलसाड़ के है। इसके अतिरिक्त तापी में 28 लोग सर्पदंश से पीडित थे। भरूच और आदिवासी वाहुल्य डांग में भी सर्पदंश की घटनाएं हुई हैं।

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Posted By: Babita kashyap

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