'टीवी को कूड़ेदान...', रोहित रॉय के बयान पर जिज्ञासा सिंह का पलटवार; दूरदर्शन के सुराग 2.0 में दिखेंगी एक्ट्रेस
जिज्ञासा सिंह अब जल्द ही दूरदर्शन के कल्ट शो के नए सीजन सुराग 2.0 में दिखेंगी। इस शो के बारे ...और पढ़ें
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सुराग 2.0 के साथ लौट रहीं हैं जिज्ञासा सिंह/ फोटो- इंस्टाग्राम
HighLights
जिज्ञासा सिंह डीडी नेशनल के 'सुराग 2.0' में निभा रहीं अहम भूमिका
रोहित रॉय के टीवी को 'कूड़ेदान' कहने पर भड़कीं एक्ट्रेस
बताया किस तरह से शोज में काम करना है पसंद
प्रियंका सिंह, मुंबई। ज्यादातर मुख्य भूमिकाएं करने वाली अभिनेत्री जिज्ञासा सिंह अब डीडी नेशनल के धारावाहिक सुराग 2.0 में अहम भूमिका निभा रही हैं। यह 27 साल पहले आए धारावाहिक सुरागः द क्लू का नया संस्करण है। इसमें नए पात्र व नए कलाकार हैं। कई मुद्दों पर जिज्ञासा से ने की बातचीत।
सुराग काफी प्रसिद्ध धारावाहिक था। ऐसे में क्या कहीं डर है कि लोग उससे तुलना करेंगे?
इंटरनेट मीडिया के दौर में तुलना को रोका नहीं जा सकता है। इस शो की अपनी विरासत रही है। उसे संभाले रखने का दबाव मुझ पर जरूर है। अच्छी बात यह है कि इसमें मेरा रोल नया है, जो पिछले शो में नहीं था। मुझे दबाव वैसे भी पसंद है, क्योंकि वह आपको अच्छा काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो लोग दबाव नहीं लेते हैं तो समझिए कि कोई दिक्कत है।
जहां तक इंटरनेट मीडिया पर होने वाली आलोचनाओं की बात है तो उसे दिल से न लगाएं। मैं भी यही करती हूं, निगेटिव कमेंट पढ़कर आगे बढ़ जाती हूं। मैं ऐसी कोई उम्मीद नहीं करती हूं कि लोग मेरे बारे में केवल अच्छी बातें ही करेंगे। मैं भी इंसान हूं, गलतियां कर सकती हूं। इंटरनेट मीडिया आज के दौर में सबसे बड़ी चीज है। कई लोगों को वह काम दे रहा है। अगर वहां कोई नहीं है तो लोग सोचते हैं कि क्यों नहीं हो। यहां लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

आपने ज्यादातर शीर्ष भूमिकाएं ही की हैं। इसमें आपकी भूमिका अहम है, लेकिन शीर्ष भूमिका नहीं है। क्या इससे कोई फर्क पड़ता है?
शीर्ष भूमिकाएं करना मेरी प्राथमिकता कभी नहीं थी। मुझे वही आफर हो रहे थे, क्योंकि वैसे ही रोल करती आ रही थी। मुझे नए प्रयोग करना था। मैं इस शो में लीड रोल में न सही, लेकिन कहानी में अहम भूमिका है। केवल लीड भूमिका से कोई कहानी नहीं बनती है। फिर बाकी की कास्ट क्या करेगी। कई लोग मिलकर शो बनाते हैं। हर भूमिका अहम होती है।
आपको सीमित एपिसोड वाले शो ज्यादा पसंद आ रहे हैं या लंबे समय तक चलने वाले करने में भी कोई दिक्कत नहीं है?
इससे कई चीजें जुड़ी हैं। पैसों के लिहाज से अगर देखें तो लंबे समय तक चलने वाले शो उससे जुड़े हर किसी के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन सीमित एपिसोड वाले शो कलाकारों को कई रोल करने का मौका देते हैं, जो काम को लेकर संतुष्टि देता है। मुझे कम समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स ज्यादा पसंद हैं, लेकिन लांग फार्मेट की कहानी अच्छी है तो उससे भी कोई दिक्कत नहीं है। सबके अपने फायदे और नुकसान हैं।
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अब करियर के इस मोड़ पर रोल के सामने पैसे आपके लिए कितने अहम हैं?
मैं हमेशा से आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनना चाहती थी। मुझे लगता है कि मैं ही नहीं हर किसी के लिए यह जरूरी है। यह स्वतंत्रता हर किसी को चाहिए कि वह अपने पैसे जैसे चाहे वैसे खर्च करे। जब आप बतौर कलाकार अपना सफर शुरू करते हैं तो उस समय आपको केवल एक मंच चाहिए होता है, तब पैसे मायने नहीं रखते हैं, लेकिन जब शो चल जाता है, लोग आपको पसंद करने लग जाते हैं तो फिर आपको पैसे भी चाहिए होते हैं।
जब अपने मन मुताबिक पैसे मिलने लगते हैं तो फिर आप अपने रोल का चयन भी बहुत सोच-समझकर करने लगते हैं। मैंने ज्यादातर शीर्षक भूमिकाएं ही निभाई हैं। मेरे कंधों पर शो की जिम्मेदारी रही है, लेकिन कई बार एक ही काम करते-करते थकावट हो जाती थी, सेट पर जाने का मन नहीं करता था तो फिर पैसों की ओर ध्यान जाता था, क्योंकि मेरा परिवार है, जिसका खर्च उठाना होता है।
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अभिनेता रोहित रॉय ने पिछले दिनों टीवी को कूड़ेदान जैसा माध्यम कहा था। इस पर आप क्या कहना चाहेंगी?
यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए हैं। कई प्रतिभाशाली कलाकार टीवी से ही आगे बढ़े हैं, जिसमें सबसे बड़ा उदाहरण शाह रुख खान हैं। इसे कूड़ेदान जैसा माध्यम कहना गलत है। यह बात सही है कि टीवी में काम करके थकावट होती है, काम करने के घंटे ज्यादा होते हैं, उसमें बदलाव होना चाहिए। ऐसा करने से हम टीवी इंडस्ट्री को और भी बेहतर बना पाएंगे। हालांकि, मैं यह भी जानती हूं कि ये बदलाव क्यों नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि टीवी पर हर दिन शो आता है। आठ घंटे में पैकअप करने के चक्कर में शो की क्वालिटी से समझौता करना पड़ जाएगा।
