नवरात्र पर Rashmi Desai और Toral Rasputra ने बताया शक्ति का सही मतलब, ताजा की बचपन की यादें
नवरात्र आ रही है, ऐसे में हर कोई 9 दिन मां दुर्गा की भक्ति में लीन होने वाला है। इस ...और पढ़ें

रश्मि देसाई और तोरल रासपुत्र ने की नवरात्र की यादों को ताजा/फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
रश्मि देसाई और तोरल ने शेयर की बचपन की यादें
कोई बचपन से खेल रहा है गरबा, किसी ने जीता इनाम
एक्ट्रेसेस ने बताया उनके लिए क्या है शक्ति का मतलब
प्रियंका सिंह-दीपेश पांडे, मुंबई। नवरात्र का पर्व नारी शक्ति की आराधना और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक रहा है। हालांकि, वर्तमान दौर की व्यस्त और प्रतिस्पर्धी जिंदगी में एक स्त्री के लिए असल ‘शक्ति’ के मायने बदले हैं। कभी यह शक्ति अपनी सीमाओं को तय करने के लिए मजबूती से ‘ना’ कहना हो सकती है, तो कभी सभी के सामने असफलता को स्वीकार करना या कभी हर दबाव में अपनी बात बेबाकी से रखना? ऐसे में छोटे पर्दे की कुछ अभिनेत्रियां बता रही हैं उनके लिए शक्ति के सही मायने।
'अपनी बात कह पाना है शक्ति'
धारावाहिक 'सयोनी' में माया की भूमिका निभा रहीं अभिनेत्री रश्मि देसाई (Rashmi Desai) कहती हैं, "मेरे लिए शक्ति का मतलब है कि अपनी बात कह पाना और अपने निर्णयों की जिम्मेदारी लेना। हर बार हां, कहना आवश्यक नहीं होता है। अपने करियर में मैंने कई प्रस्ताव इसलिए ठुकराए, क्योंकि कहानी या पात्र से जुड़ाव महसूस नहीं हुआ। ऐसे निर्णय आसान नहीं होते। मेरे लिए एक महिला का अपनी बात कह पाना भी शक्ति है।"
रश्मि देसाई ने आगे कहा, "एक कलाकार के तौर पर मुझे इसका एहसास तब हुआ, जब मैंने सिर्फ नाम के लिए काम करते रहने के बजाय सही कहानी का इंतजार किया। कई प्रस्ताव आए, लेकिन मैं ऐसा काम करना चाहती थी जिसे निभाते हुए मुझे खुशी मिले और दर्शक भी याद रखें। उस फैसले पर टिके रहने के लिए धैर्य चाहिए। मुझे मां दुर्गा का साहस और उनकी ममता, दोनों प्रेरित करते हैं। मैं भी चाहती हूं कि दूसरों के प्रति संवेदनशील रहूं, लेकिन जरूरत पड़ने पर अपने लिए खड़ी हो सकूं।"

नवरात्र पर मां के साथ गहने-कपड़े खरीदती थी
मैं गुजराती हूं, इसलिए नवरात्र की तैयारियों को लेकर बचपन से ही उत्साह रहा है। मां की पूजा, गरबा का संगीत, दोस्तों से मिलना और सजना-संवरना मुझे सब पसंद है। आज भी पारंपरिक गामठी चनिया-चोली और गहने पहनकर वही बचपन वाली खुशी होती है। नवरात्र में मां के साथ कपड़े और गहने खरीदने जाना मेरी सबसे प्यारी यादों में से एक है। मैं नवरात्र के पूरे नौ दिन व्रत भी रखती हूं, जो मेरे लिए इस त्योहार का एक खास हिस्सा है।"
रश्मि ने कहा, "अब शूटिंग की वजह से पहले जैसा समय नहीं मिलता, लेकिन कोशिश यही रहेगी कि पूजा और त्योहार की खुशियों के लिए थोड़ा समय जरूर निकालूं। मैंने लगभग पांच-छह साल की उम्र से गरबा खेलना शुरू कर दिया था। बचपन में पूरे नौ दिन खेलती थी। काम शुरू करने के बाद उतने मौके नहीं मिले। अब कार्यक्रमों में जाना होता है, जहां लोगों से मिलने और तस्वीरें खिंचवाने में भी समय निकल जाता है। लोगों का प्यार अच्छा लगता है, लेकिन मन तो खुलकर गरबा खेलने का भी करता है।"

'जिम्मेदारी लेना है बड़ी शक्ति'
धारावाहिक हस्तिनापुर के वीर में कुंती की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री तोरल रासपुत्र कहती हैं, "मेरे लिए शक्ति का मतलब सिर्फ दूसरों के सामने मजबूत दिखना नहीं है, बल्कि खुद के प्रति ईमानदार रहना भी है। सही जगह पर न कहना, अपनी बात और अपनी सीमाओं को सम्मान के साथ रखना और जब जरूरत हो तो खुद के लिए खड़े होना, मेरे लिए यही असली शक्ति है।"
'हर किसी को खुश करना संभव नहीं'
तोरल ने कहा, "इस शक्ति का एहसास मुझे तब हुआ जब मैंने समझा कि हर किसी को खुश करना संभव नहीं है और ऐसा करना जरूरी भी नहीं है। जिंदगी में कई ऐसे मौके आए जब मुझे अपने फैसलों पर भरोसा करना पड़ा, अपनी प्राथमिकताओं को महत्व देना पड़ा और कभी-कभी लोगों की अपेक्षाओं के बावजूद अपने लिए सही फैसला लेना पड़ा। उन अनुभवों ने मुझे सिखाया कि अपनी आवाज सुनना और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेना भी बहुत बड़ी शक्ति है।"

तोरल ने आगे कहा, "इसके अलावा मुझे लगता है कि किसी को माफ कर देना भी बड़ी शक्ति है, क्योंकि उसके लिए मन में बहुत संतुलन और समझ की जरूरत होती है। मैं अपने अंदर मां दुर्गा के धैर्य और साहस को सबसे ज्यादा महसूस करती हूं। मुझे उनका यह रूप बहुत प्रेरित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, हमें अपनी ताकत और विश्वास को नहीं खोना चाहिए। मेरे लिए मां दुर्गा की शक्ति का मतलब सिर्फ लड़ना नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने और मुश्किल परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखने से है।"
हर साल जीतती थी इनाम
नवरात्र मेरे लिए बहुत सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह से भरा हुआ त्योहार है। नवरात्र में हर तरफ रंग, संगीत और त्योहारों वाली एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है। गरबा और डांडिया इस ऊर्जा को पूरी तरह अलग बना देते हैं। स्कूल और कॉलेज के समय में पूरी रात तक गरबा और डांडिया खेलने जाया करती थी और हर साल ईनाम भी जीतकर आती थी। अब तो खैर काम के कारण समय नहीं मिल पाता, पर जब भी मौका मिलता है, इसमें पूरे उत्साह के साथ शामिल होती हूं।"
