वेब सीरीज के लिए लगाई 3-4 साल की कमाई, डिब्बाबंद होने पर डिप्रेशन में चले गए थे 'अनुपमा' फेम गौरव शर्मा
अभिनेता गौरव शर्मा अब 'सहर होने को है' में खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी ...और पढ़ें

सहर होने को है सीरियल में गौरव शर्मा बने खलनायक
HighLights
नौकरी छोड़कर अभिनय में आए थे गौरव शर्मा
दीया और बाती हम से रातोंरात मिली थी पहचान
बीच में अनुपमा छोड़ने का बताया कारण
दीपेश पांडेय, मुंबई। धारावाहिक 'दीया और बाती हम' से पहचान बनाने वाले अभिनेता गौरव शर्मा (Gaurav Sharma) इन दिनों कलर्स पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक 'सहर होने को है' (Seher Hone Ko Hai) में खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं।
मेरठ के गौरव 'अनुपमा' और 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' जैसे हिट धारावाहिकों के अलावा प्वॉइजन और 'कर्मा कॉलिंग' समेत कई वेब सीरीज में भी काम कर चुके हैं। अभिनय के साथ-साथ लेखन में भी दिलचस्पी रखने वाले गौरव अपने शो और अभिनय सफर पर बात की है।
नौकरी से अभिनेता का सफर
अपने अभिनय सफर के बारे में गौरव कहते हैं- करीब 15 साल पहले नौकरी के लिए मेरठ से मुंबई आया था। यहां टीसीएस में नौकरी करता था। बचपन से ही एक्टिंग का कीड़ा अंदर था, कॉलेज, स्कूल और हमारे मोहल्ले में जो भी समारोह होते थे, सब में हिस्सा लेता था।
एक्टिंग का शौक तो था, लेकिन मन में यह था कि पहले पढ़ाई हो जाए। उसके बाद यहां नौकरी करने आया तो उसी दौरान ऑडिशन देना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे गाड़ी आगे बढ़ गई, पहला धारावाहिक 'जमुनिया' मिला और मैंने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा।
लोन लेकर बदली दिशा
गौरव के लिए नौकरी छोड़ना आसान निर्णय नहीं था। वह बताते हैं- मैंने रातोंरात नौकरी छोड़ी थी। करीब तीन-चार लाख रुपये का लोन लिया और बिना घर वालों को बताए छह महीने हर जगह ऑडिशन देता रहा, मगर जब कोई सकारात्मक परिणाम नहीं दिखा तो फिर से नौकरी ज्वॉइन कर ली।
संयोग की बात है कि उसके 15 दिनों के अंदर ही मुझे पहले धारावाहिक 'जमुनिया' के लिए फोन आया। उसके बाद तो वो लोन तय समय से पहले ही चुका दिया।

तब मिली पहचान
धारावाहिक 'दीया और बाती हम' गौरव के लिए अहम पड़ाव रहा। वह बताते हैं- मुझे शुरुआती करियर में सबसे ज्यादा पहचान धारावाहिक दीया और बाती हम से मिली थी। 10-11 साल हो गए आज भी कई लोग मुझे उसमें निभाई राजकुमार की भूमिका के लिए जानते हैं। उसके बाद 'उफ्फ ये नादानियां' धारावाहिक में केंद्रीय भूमिका निभाई। टॉक शो 'टोटल नादानियां' किया। देश में जब वेब सीरीज के शुरुआती दौर था, तभी चार-पांच वेब सीरीज कर ली थीं।
इसलिए बने 'हैदर'
इससे पहले कई धारावाहिकों में मुख्य नायक और खलनायक की भूमिकाएं निभा चुके गौरव यह धारावाहिक स्वीकार करने का कारण बताते हैं- मुझे इस शो को बनाने का तरीका बहुत अलग लगा। इसकी संकप्लपना बहुत अलग और वास्तविकता के करीब है। जब मैंने अपने रोल के बारे में सुना तो मुझे सबसे पहले मेरे पात्र का नाम ही पसंद आ गया, क्योंकि हैदर मेरी पसंदीदा फिल्म है। वो सुनते ही दिल से आवाज आई कि चलो कर लेते हैं।
फिर लिखा उपन्यास
अभिनय के अलावा गौरव उपन्यास 'झिलमिल' लिख चुके हैं। लेखन में दिलचस्पी को लेकर वह बताते हैं- झिलमिल माइका माइनिंग में काम करने वाले बच्चों की कहानी पर आधारित है। फिलहाल इस पर फिल्म बनाने की कोशिश में लगा हूं। मेरठ में मेरे चाचा वेद प्रकाश शर्मा जी काफी जाने-माने लेखक रहे हैं।
हम उनके उपन्यास पढ़ते हुए बड़े हुए हैं। मैंने देखा कि शहर में उनकी किताबों के लिए बड़ा पागलपन था। तभी से इच्छा थी कि बड़े होकर अपनी किताब लिखूंगा। अक्टूबर में मेरी एक और नई किताब आ रही है, जिसका नाम है 'मूनबेदर्स'।
इसलिए छोड़ा अनुपमा और झनक
गौरव ने अनुपमा और झनक दोनों धारावाहिकों को बीच में ही छोड़ दिया था। इसका कारण वह बताते हैं- दरअसल दोनों धारावाहिकों में लीप आ गया था। लीप के बाद पात्रों की उम्र बढ़ा रहे थे। अनुपमा तो नंबर 1 शो था।

जब मैंने उसमें लीप के बारे में सुना तो निर्माता राजन शाही से हाथ जोड़कर बोला कि सर मुझे लगता है कि मेरे लिए किसी 21 वर्षीय बच्चे के पिता की भूमिका निभाने के लिए यह सही समय नहीं है वरना इसी तरह का काम आता रहेगा। अभी मुझे बहुत चीजों में स्वयं को आजमाना है। उन्होंने भी मेरी बात स्वीकार की। झनक छोड़ने का भी ऐसा ही कारण था।
मुश्किल में मिला मां का साथ
गौरव अपनी सफलता का श्रेय मां को देते हैं। वह कहते हैं- मेरे जीवन में आज मैं जो कुछ भी हूं वो अपनी मां की वजह से। साल 2022 में मैंने एक वेब सीरीज बनाने की कोशिश की थी। उसमें मेरी तीन-चार साल की पूरी कमाई लग गई थी।
फिर भी वह प्रोजेक्ट कभी बन नहीं पाया। मैं अवसाद और निराशा में चला गया था। उस समय मां ने गले लगाकर कहा कि बेटा कोई बात नहीं, पैसा गया है, वो तो आ जाएगा। उसके बाद वापस हिम्मत आई और फिर शुरू किया काम। उनका आशीर्वाद ऐसा था कि सारे नुकसान की भरपाई एक साल में हो गई।
