32 साल पहले आया Doordarshan का वो आइकॉनिक शो, सस्पेंस में डूब जाते थे लोग; हर एपिसोड में था रहस्य
दूरदर्शन का 1994 में आया शो इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म पर आधारित था। इसमें सस्पेंस से भरपूर कहानियों को लोगों ने खूब पसंद किया।

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दूरदर्शन (Doordarshan) ने 90 के दशक में हमें कई ऐसे टीवी सीरियल दिए हैं जिनका आज भी कोई सानी नहीं है। पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों से भरपूर इसके शोज बेहद सरल होते थे, जिन्हें पूरा परिवार साथ बैठकर देखता था।
आज हम आपको दूरदर्शन के एक ऐसे ही इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा (Investigative Drama) के बारे में बताएंगे जिसने पारिवारिक सीरियलों से उनका प्राइम टाइम छीनकर बड़े-बड़ों की छुट्टी कर दी। हम बात कर रहे हैं साल 1994 में आए शो रिपोर्टर (Reporter) की जिसमें शेखर सुमन ने लीड रोल निभाया था।
टीआरपी में नंबर 1 था शो
साल 1993 से 1997 के दौरान शेखर सुमन (Shekhar Suman) हिंदी टीवी के सबसे लोकप्रिय स्टार बन गए थे। उनके सीरियल डीडी मेट्रो (DD Metro) पर 'देख भाई देख', ज़ी टीवी पर 'अंदाज' और बाद में सोनी पर 'मूवर्स एंड शेखर' जबरदस्त TRP बटोर रहे थे।

लेकिन दूरदर्शन पर सोमवार रात को आने वाले शो 'रिपोर्टर' ने न सिर्फ उन्हें बहुत लोकप्रियता दिलाई, बल्कि उनकी एक्टिंग का भी लोह मनवाया। इसका निर्देशन विनोद पांडे ने किया था। शेखर सुमन ने इसमें एक निडर और साहसी पत्रकार की मुख्य भूमिका निभाई थी। इसमें वो कई सारे कॉम्पलेक्स केसेज सॉल्व करते नजर आते थे।

क्या था रिपोर्टर का फॉर्मेट?
शो का फॉर्मेट था कि इसके हर एक एपिसोड में अलग-अलग मामले दिखाए जाते थे। रिपोर्ट के तौर पर शेखर सुमन इसकी तह तक जाकर सच्चाई निकालने की कोशिश करते थे और केस सुलझाते थे। हर एपिसोड एक नई पहेली के साथ शुरू होता था। मुख्य रूप से इसमें न्यूजरूम के कामकाज और पत्रकारों के संघर्ष को दिखाया गया था। इसे अमेरिकी सीरीज 'द न्यूजरूम' से प्रेरित बताया जाता है।
शेखर सुमन के अलावा इसमें राज किरण और नताशा सिन्हा भी थे। विनोद पांडे ने साल 1994 में जो हिम्मत दिखाई उसके लिए उन्हें सलाम किया जाना चाहिए। इसमें कई एक ऐसे एपिसोड दिखाए जो साफ तौर पर 1992 के हर्षद मेहता स्कैम पर आधारित थे।
