'मां महाराष्ट्रीयन हैं और पिता सिंधी...', गणेश चतुर्थी पर ये एक रस्म कभी नहीं छोड़ते Arjun Bijlani
अर्जुन पिछले 10 सालों से हर साल गणेश उत्सव के मौके पर बप्पा का स्वागत धूमधाम से करते हैं। हाल ही में उन्होंने इस फेस्टिवल की मान्यताओं पर बात की।

गणेश चतुर्थी पर ये रस्म नहीं भूलते अर्जुन बिजलानी/ फोटो- इंस्टाग्राम
HighLights
गणेश चतुर्थी अर्जुन बिजलानी के लिए बचपन की खास परंपरा
बप्पा से मिली सीख: शांत रहो, विश्वास के साथ आगे बढ़ो
10 साल से घर पर बप्पा का स्वागत कर रहे हैं अर्जुन
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। गणेशोत्सव की रौनक के बीच बप्पा के प्रति आस्था और परिवार के साथ जुड़ी यादें हर किसी के लिए खास होती हैं। अभिनेता अर्जुन बिजलानी के लिए भी गणेश चतुर्थी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि बचपन से चली आ रही परंपराओं, परिवार के साथ बिताए पलों और विश्वास का हिस्सा है। गणेशोत्सव के मौके पर उन्होंने बप्पा से जुड़ी अपनी यादों, पसंदीदा परंपराओं और जिंदगी में मिली सीख के बारे में खुलकर बात की।
गणेशोत्सव आपके लिए क्या मायने रखता है? हर साल इसे मनाने के लिए आपके घर में किस तरह की तैयारियां होती हैं?
गणेश चतुर्थी हमेशा से मेरे लिए बेहद खास रही है। मेरी मां महाराष्ट्रीयन हैं, इसलिए बचपन से ही बप्पा और गणेश चतुर्थी से जुड़ी परंपराएं मेरी जिंदगी का हिस्सा रही हैं, लेकिन मुंबई में रहकर इस त्योहार को एक अलग ही स्तर पर महसूस करने का मौका मिलता है। हर तरफ का उत्साह, भक्ति और एकजुटता बहुत खूबसूरत लगती है। मेरे लिए यह बप्पा को घर लाने, परिवार के साथ समय बिताने, साथ में पूजा करने और आभार महसूस करने का समय है।
गणपति के इन दस दिनों के दौरान ऐसी कौन-सी परंपरा है, जिसे आप कभी छोड़ना नहीं चाहेंगे?
पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती करना ऐसी परंपरा है, जिसे मैं कभी छोड़ना नहीं चाहूंगा। मेरा शेड्यूल कितना भी व्यस्त क्यों न हो, मैं कोशिश करता हूं कि इन समारोहों में जरूर शामिल रहूं। जब पूरा परिवार एक साथ आता है, प्रार्थना करता है और एक-दूसरे के साथ समय बिताता है, वही पल मेरे लिए इस त्योहार को खास बनाते हैं।

गणेश जी को ‘गणों के स्वामी’ माना जाता है, जो सभी को साथ लेकर चलते हैं। इस भाव में आपको सबसे खूबसूरत बात क्या लगती है?
मेरे लिए इसकी सबसे खूबसूरत बात एकजुटता की भावना है। मैं ऐसे परिवार से आता हूं, जहां मेरी मां महाराष्ट्रीयन हैं और पिता सिंधी। इसलिए बचपन से ही मैंने अलग-अलग परंपराओं को समझा और उन्हें करीब से अनुभव किया है। मुझे लगता है कि सभी को साथ लेकर चलने का विचार इसी वजह से इतना खूबसूरत है। बप्पा लोगों को एक साथ जोड़ते हैं और एकता, प्रेम और भक्ति की यह भावना मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, यानी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। आपकी जिंदगी में ऐसी कौन-सी बड़ी चुनौती रही, जिसे पार करने के बाद आपको लगा कि बप्पा ने आपको रास्ता दिखाया?
मुझे लगता है कि जिंदगी में हम सभी मुश्किल दौर से गुजरते हैं और मैंने भी ऐसे दौर देखे हैं। बप्पा ने मुझे सबसे बड़ी सीख यही दी है कि शांत रहो और विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहो। जिंदगी में चुनौतियां हमेशा रहेंगी, लेकिन अगर आप धैर्य, सकारात्मकता और विनम्रता के साथ उनका सामना करते हैं, तो हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखते हैं। मेरा मानना है कि हर बाधा आखिरकार हमें और मजबूत बनाती है।

भगवान गणेश के स्वरूप का हर हिस्सा एक सीख देता है—बड़ा सिर बेहतर सोच का, बड़े कान ध्यान से सुनने का और छोटी आंखें एकाग्रता का प्रतीक हैं। इनमें से कौन-सी सीख आपकी जिंदगी और व्यक्तित्व के सबसे करीब है और क्यों?
मेरे लिए शांत रहने और विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहने की सीख सबसे ज्यादा मायने रखती है। मैं चुनौतियों का सामना धैर्य और सकारात्मकता के साथ करने की कोशिश करता हूं। मेरा यह भी मानना है कि हर बाधा हमें कुछ सिखाती है, इसलिए जरूरी है कि हम सीखते रहें, अपना ध्यान केंद्रित रखें और लगातार आगे बढ़ते रहें।
अगर बप्पा आपके घर आएं और आपको अपने हाथ से बनी कोई एक चीज उन्हें खिलानी हो, तो आप क्या बनाएंगे?
बेशक, मोदक। मेरे लिए गणपति और मोदक एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। मुझे महाराष्ट्रीयन त्योहारों का खाना भी बहुत पसंद है, लेकिन गणपति के उत्सव के दौरान मोदक मेरे लिए सबसे खास होते हैं।

अगर भगवान गणेश आपकी जिंदगी की एक ‘बाधा’ हमेशा के लिए दूर कर सकते हों, तो आप चाहेंगे कि वह कौन-सी बाधा हो?
मेरी सबसे बड़ी इच्छा यही होगी कि बप्पा मेरे परिवार, दोस्तों और मेरे आसपास के सभी लोगों को खुश, स्वस्थ और सुरक्षित रखें। मैं चाहता हूं कि वह मेरे अपनों को हर तरह की परेशानी से दूर रखें। मैं यह भी प्रार्थना करता हूं कि जिंदगी हमारे सामने जो भी लेकर आए, उसका सामना करने की ताकत और समझ बप्पा हमें देते रहें। अगर मेरे आसपास सभी लोग खुश हैं, तो मेरे लिए वही काफी है।”
