The Devil Wears Prada 2 Review: अंदाज पुराना...कहानी नई, कॉमेडी के तड़के में कॉरपोरेट वर्ल्ड की पोल खोलती कहानी
द डेविल वेयर्स प्राडा 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस बार मेकर्स ने 20 साल बाद लाए ...और पढ़ें

द डेविल वेयर्स प्राडा 2 रिव्यू/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। साल 2006 में आई हॉलीवुड फिल्म 'द डेविल वेयर्स प्राडा' लारेन वाइसबर्गर के उपन्यास पर आधारित थी। फिल्म में फैशन के साथ काम और निजी जीवन के बीच संतुलन, फैशन उद्योग की कड़वी सच्चाई और सफलता के लिए खुद को बदलना कितना जरूरी है, जैसे पहलुओं को छुआ गया था। अब करीब बीस साल बाद आज सिनेमाघरों में इसका सीक्वल 'द डेविल वेयर्स प्राडा 2' रिलीज हो रहा है।
सीक्वल को लेकर निर्देशक डेविड फ्रेंकल अपने चिरपरिचित अंदाज में लौटे हैं। इस बार कहानी तीनों मुख्य महिला किरदारों के रिश्तों के नए टकरावों पर है। साथ ही समसामयिक मुद्दों को जोड़ा गया है, जिसमें पत्रकारिता के पतन पर टिप्पणी की गई है।
कैसे आगे बढ़ी 'द डेविल वेयर्स प्राडा 2' की कहानी?
कहानी का आरंभ 'द वैनगार्ड' समाचार संस्थान में काम कर रही एंडी को एक समारोह में पत्रकारिता पुरस्कार का विजेता घोषित किए जाने से होता है। उसी समय उसे और उसके सहयोगियों के मोबाइल फोन पर संदेश आते हैं कि अखबार बंद हो रहा है और उनकी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं। एंडी इस मौके पर एक भावुक संदेश देती है। यह पत्रकारिता से ज्यादा कॉरपोरेट लालच के संबंध में होता है। उसका वीडियो तेजी से वायरल हो जाता है। उधर, 'रनवे' फैशन मैगजीन अब डिजिटल हो चुकी है।

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उसकी अहंकारी और कठोर संपादक मिरांडा प्रीस्टली (मेरिल स्ट्रीप) को उम्मीद है कि समूह के अध्यक्ष इर्व राविट्ज (टिबोर फेल्डमैन) उसे मीडिया कंपनी का ग्लोबल कंटेंट एडिटर बनाएंगे, लेकिन एक नकारात्मक खबर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देती है। इसके बाद इर्व, एंडी को 'रनवे' की नई फीचर्स एडिटर बनने का प्रस्ताव देता है, ताकि वह इस संकट को संभाल सके। अगले दिन एंडी जब ऑफिस पहुंचती है, तो मिरांडा उसे पहचानती भी नहीं है। एंडी ऑफिस में काफी बदलाव देखती है। उसका लेख नकारात्मक खबरों पर रोक लगाने में कामयाब होता है, लेकिन मिरांडा उसे कोई महत्व नहीं देती।
मिरांडा की एक और पूर्व सहायक एमिली चार्लटन (एमिली ब्लंट) अब मशहूर फैशन हाउस 'डियोर' में बतौर एग्जीक्यूटिव काम कर रही है। एंडी के तमाम प्रयासों के बावजूद मिरांडा उसे महत्व नहीं देती। मिरांडा को प्रभावित करने के लिए वह मीडिया से दूर रहने वाली अरबपति साशा बार्न्स (लूसी लियू) का इंटरव्यू हासिल करती है। कहानी तब मोड़ लेती है जब इर्व का बेटा जे (बी.जे. नोवैक) कंपनी का चेयरमैन बन जाता है। अब 'रनवे' और उसके मालिकाना हक का भविष्य दांव पर लगा होता है। एमिली का नया प्रेमी इसे खरीदने की तैयारी में है, लेकिन क्या ऐसा होगा? आगे की कहानी इसी पर आधारित है।
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डिजिटल युग के चैलेंज को बखूबी दर्शाती है फिल्म
सीक्वल को मूल कहानी से ही आगे बढ़ाया गया है। अगर आपने मूल फिल्म देखी है, तभी आसानी से इससे जुड़ पाएंगे। समसामयिक मुद्दों की वजह से फिल्म बीच-बीच में गंभीर भी हो जाती है। मीडिया समूहों पर कॉरपोरेट का प्रभाव और डिजिटल युग की चुनौतियों को फिल्म बखूबी दर्शाती है। मूल फिल्म की तरह इस बार कहानी पेरिस की जगह इटली की फैशन राजधानी मिलान में सेट है। एलिन ब्राश मैककेना लिखित पटकथा में कई मोड़ हैं, जिनका पूर्वानुमान आसानी से लगाया जा सकता है। एंडी और उसके नए प्रेमी आर्किटेक्ट पीटर (पैट्रिक ब्रैमल) का प्रसंग अधूरा लगता है।
'रनवे' मैगजीन का नया मैनेजमेंट जब बजट में कटौती का ऐलान करता है, तो मेरिल स्ट्रीप के हिस्से में कई कॉमिक सीन आते हैं। जैसे मिरांडा को यह जानकर झटका लगता है कि अब उन्हें महंगे होटलों या रेस्त्रां में नहीं, बल्कि ऑफिस के कैफेटेरिया में खाना होगा और कार सर्विस की जगह सिर्फ उबर मिलेगी। फैशन से लेकर किरदारों की दुनिया को सिनेमेटोग्राफर ने बखूबी दर्शाया है।
मिरांडा के रोल में छाईं मेरिल स्ट्रीप
कलाकारों में मेरिल स्ट्रीप शानदार हैं। मिरांडा के कठोर और तेज-तर्रार मिजाज के बीच उनका कॉमिक अंदाज लुभावना है। ऐन हैथवे एक बार फिर एंडी की सादगी, संवेदनशीलता और तत्परता से दिल जीत लेती हैं। एमिली ब्लंट का पात्र परतदार है। उसके अहंकार, महत्वाकांक्षा और इच्छाओं को उन्होंने उचित भावों के साथ जिया है। नाइजल किपलिंग (स्टैनली टुची) ने प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका को निभाया है। कुल मिलाकर यह हल्की-फुल्की कॉमेडी कई संदेश भी दे जाती है।
