Shraddha Kapoor की 'ईथा' ने रिलीज से पहले ही कमाए 90 करोड़ रुपये, Box Office पर धमाल मचाएगी बायोग्राफिकल ड्रामा
श्रद्धा कपूर (Shraddha Kapoor) की अपकमिंग फिल्म 'ईथा' अपनी रिलीज से पहले की बिजनेस डील्स को लेकर चर्चा में है। फिल्म 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
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4 दिसंबर को थिएटर्स में रिलीज होगी 'ईथा'
HighLights
4 दिसंबर को थिएटर्स में रिलीज होगी 'ईथा'
'ईथा' के ट्रेलर पर आया दर्शकों का जबरदस्त रिएक्शन
'विठाबाई' के किरदार में नजर आएंगी श्रद्धा
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'स्त्री 2' की जबरदस्त सफलता के बाद, श्रद्धा कपूर बड़े पर्दे पर 'ईथा' के साथ वापसी कर रही हैं। यह फिल्म महाराष्ट्र की मशहूर लावणी आर्टिस्ट और तमाशा कलाकार विठाबाई की जिंदगी से प्रेरित है।
हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था, जिसे दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली। 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली यह फिल्म अपने भव्य रूप, मराठी संस्कृति की शानदार प्रेजेंटेशन, श्रद्धा कपूर के एकदम नए अवतार और बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की संभावनाओं के चलते पहले से ही चर्चा में है।
90 करोड़ रुपये में बिके 'ईथा' के राइट्स
पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, PVR INOX ने 90 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम देकर 'ईथा' (Eetha) के घरेलू डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स हासिल कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि यह डील एडवांस आधार पर हुई है। यह एक बड़ी डील है, खासकर एक महिला-प्रधान फिल्म के लिए। डिस्ट्रीब्यूटर ने 'ईथा' की बॉक्स ऑफिस (Box Office) क्षमता पर बहुत भरोसा जताया है, और कई लोग इसे 2026 की 'डार्क हॉर्स' (अप्रत्याशित रूप से सफल होने वाली फिल्म) मान रहे हैं।
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'ईथा' के बारे में
'ईथा' के जरिए श्रद्धा कपूर (Shraddha Kapoor) और निर्देशक लक्ष्मण उतेकर पहली बार साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले श्रद्धा कपूर ने 'स्त्री 2' और लक्ष्मण उतेकर ने 'छावा' जैसी फिल्में दी हैं। दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की है। मैडॉक फिल्म्स द्वारा निर्मित 'ईथा' में रणदीप हुड्डा, मो. जीशान अय्यूब, सिद्धार्थ जाधव और अन्य कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म का संगीत अजय-अतुल ने तैयार किया है, जिसे फिल्म के सबसे मजबूत पहलुओं में से एक माना जा रहा है।
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कौन थीं विठाबाई?
विठाबाई का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर शहर में हुआ था और कलाकारों के एक परिवार में पली-बढ़ीं। 'भाऊ-बापू मांग नारायणगांवकर' नाम का कला-दल उनके पिता और चाचा चलाते थे। इस दल की स्थापना उनके दादा नारायण खुदे ने की थी। वे पुणे जिले के शिरूर तालुका के कवठे यमाई गांव के रहने वाले थे।
पढ़ाई-लिखाई में तो विठाबाई बहुत अच्छी नहीं थीं, लेकिन बहुत कम उम्र से ही, बिना किसी ट्रेनिंग के, उन्होंने मंच पर शानदार प्रदर्शन किया।
विठाबाई के जीवन की एक उल्लेखनीय घटना तब घटी, जब एक परफॉर्मेंस के दौरान मंच पर ही उन्हें अचानक लेबर पेन शुरू हो गया। वह मंच के पीछे गईं, जहां उन्होंने बच्चे को जन्म दिया और एक नुकीले पत्थर से गर्भनाल काटी; इसके बाद वह वापस मंच पर आईं और अपनी परफॉर्मेंस जारी रखी।
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