JFF 2026: दीपिका के बाद टिस्का चोपड़ा ने भी तोड़ी चुप्पी, सेट के लंबे वर्किंग आवर्स को बताया 'दिहाड़ी मजदूरी'
जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 में अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा ने फिल्म इंडस्ट्री की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने सेट पर खराब ...और पढ़ें

टिस्का चोपड़ा ने सेट पर चुनौतियों पर की बात
HighLights
टिस्का चोपड़ा ने इंडस्ट्री की चुनौतियां बताईं
सेट पर महिलाओं के लिए होते हैं खराब टॉयलेट
लंबे वर्किंग आवर्स को बताया 'दिहाड़ी मजदूरी'
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। सिनेमा जगत के लोकप्रिय फेस्टिवल यानी जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 का आगाज 28 अक्टूबर से मुंबई में हो गया है। जेएफएफ दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा फिल्म मेला है, जो एक शहर से दूसरे शहर घूमता है।
अब इसका कारवां मायानगरी आ पहुंचा है और फिल्म महोत्सव के पहले और दूसरे दिन सिनेमा जगत के तमाम सितारों का जमावड़ा भी यहां देखने को मिला है।
दूसरे दिन हमारे साथ मौजूद रहीं फिल्म निर्माता और एक्ट्रेस टिस्का चोपड़ा (Tisca Chopra)। इस दौरान उन्होंने कई सारे मुद्दों पर बात की चलिए जानते हैं उनके बारे में।
आपने एक एक्टर के तौर पर काम किया एक डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया। तो एक महिला के तौर पर आपने क्या बदलाव पाया?
टिस्का हाल ही में शॉर्ट फिल्म 'चटनी' (Chutney) में नजर आई थीं। इसे निर्देशक ज्योति कपूर ने डायरेक्ट किया था। टिस्का एक एक्टर के तौर पर नजर आईं और इसे प्रोड्यूस भी किया था।
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जेंडर इक्वलिटी के बारे में बात करते हुए एक्टर ने कहा कि आपके आसपास इस तरह के लोग हमेशा से होते हैं तो ये जेंडर का कोई मामला नहीं है ये उनकी आदत होगी कि वो ऐसे ही बात करते हैं। मैं इसे ऐसे ही देखती हूं।
उन्होंने कहा कि मैं इस मामले में लकी हूं। मैं जब बॉम्बे में नई आई थी तो लगता था कि मैं एक्ट्रेस हूं लेकिन अब मैं खुद को एक परफॉर्मर के तौर पर देखती हूं। इसमें जेंडर का उतना फर्क नहीं पड़ता। इस दौरान उन्होंने एक किस्सा भी शेयर करते हुए बताया जब टीम के ही एक बंदे ने उनसे गलत टोन में बात की। उन्होंने उसे बहुत साफ शब्दों में समझाया और वो समझ गया।
कोई ऐसी चीज जो फिल्म इंडस्ट्री दे रही है, उसमें आप बदलाव लाना चाहेंगी?
टॉयलेट्स की हालत अभी भी बहुत खराब है क्योंकि जब हम शूटिंग के लिए लोकेशंस पर जाते हैं तो चादर डाल के स्ट्रगल करना पड़ता है। तो फीमेल के लिए इसकी अच्छी सुविधा होनी चाहिए।
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फिल्म का शेड्यूल एक बड़ी दिक्कत है। यहां बहुत फिजिकल लेबर होता है। उन्होंने इसे दिहाड़ी मजदूरी भी कहा। घंटों आप अपने कॉस्ट्यूम में कई बार हैवी ज्वेलरी के साथ बैठे रहते हैं, विग लगा, तो वो दिक्कत होती है। मैं चाहती हूं कि जब पैकअप बोले पैकअप हो जाए। 12 घंटे में पैकअप होता है तो अच्छा है मेरे हिसाब से अगर 10 घंटे में होता है तो और भी अच्छा है।
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