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एक फिल्म, 11 गाने और कमाई खर्च से 22 गुना ज्यादा... डूबते 'राजश्री' का सहारा बनी Sooraj Barjyatya की ये मूवी

Published: Sun, 15 Feb 2026 03:06 PM (IST)

मार-धाड़ और खून-खराबे वाली फिल्मों के बीच स्वस्थ पारिवारिक मनोरंजन पहचान है राजश्री प्रोडक्शंस (Rajshree Productions) की। 'दोस्ती' से बनी ...और पढ़ें

इस सुपरहिट फिल्म से संभले थे राजश्री के हालात। फोटो क्रेडिट- एक्स

इस सुपरहिट फिल्म से संभले थे राजश्री के हालात। फोटो क्रेडिट- एक्स

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संजीत नार्वेकर, मुंबई। आज के दौर में जब बॉक्स ऑफिस पर वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की एक्शन फिल्मों और मैडॉक की हॉरर-कॉमेडी का शोर है, तब एक शांत और विनम्र फिल्मकार अपनी सादगी से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। यह हैं राजश्री प्रोडक्शंस की तीसरी पीढ़ी के ध्वजवाहक सूरज बड़जात्या।

22 फरवरी 1964 को जन्मे सूरज आज उस साम्राज्य के सर्वेसर्वा हैं, जिसकी नींव उनके दादा ताराचंद बड़जात्या ने लगभग 80 साल पहले रखी थी।

संकट से उपजा एक सितारा

सूरज बड़जात्या का सिनेमा जगत में पदार्पण उस समय हुआ, जब राजश्री प्रोडक्शंस गहरे वित्तीय संकट से गुजर रहा था। 20वीं शताब्दी के आठवें दशक की शुरुआत में मिली असफलताओं के बाद परिवार ने आत्ममंथन किया। निष्कर्ष निकला कि बाहरी निर्देशकों पर निर्भरता की वजह से कंपनी अपनी उस साफ-सुथरे मनोरंजन वाली पहचान को खो रही थी, जिसकी शुरुआत 1962 में 'आरती' और 1964 में मील का पत्थर साबित हुई फिल्म 'दोस्ती' से हुई थी।

Sooraj Barjatya Salman Khan Film

कॉलेज के दिनों में औसत छात्र रहे सूरज ने पिता राज कुमार बड़जात्या को अपने एडमिशन के लिए संघर्ष करते देख एक संकल्प लिया कि वह अपने परिवार और पिता का सिर कभी झुकने नहीं देंगे। इसी संकट के समय सूरज ने कमान संभाली और महेश भट्ट के सहायक के रूप में काम शुरू किया, जो उस समय राजश्री के लिए 'सारांश' बना रहे थे।

'मैंने प्यार किया' और 'प्रेम' का जन्म

सूरज ने महेश भट्ट से सिनेमा की तकनीक नहीं, बल्कि सिनेमा के प्रति उनका एटीट्यूड सीखा। जब इसे राजश्री के पारिवारिक मूल्यों के साथ मिलाया गया, तो 1989 में सामने आई 'मैंने प्यार किया'। मात्र 24 साल की उम्र में सूरज ने एक पुरानी 'रोमियो-जूलियट' स्टाइल की कहानी को सलमान खान और भाग्यश्री की मासूमियत के साथ पेश किया।

Maine Pyar Kiya

उस दौर में जब अमिताभ बच्चन का एंग्री यंग मैन अवतार छाया हुआ था, इस फिल्म ने दो करोड़ रुपये की लागत में 45 करोड़ रुपये की कमाई कर इतिहास रच दिया।

सफलता का 'बड़जात्या फार्मूला'

पांच साल बाद 1994 में सूरज ने 'हम आपके हैं कौन' के साथ अपने ही रिकार्ड तोड़ दिए। 14 गानों की इस संगीतमय फिल्म ने भारतीय शादियों के रीति-रिवाजों को उत्सव बना दिया। छह करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 128 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाए और नेशनल अवार्ड भी जीता।

hum aapke hain kon

यहां से एक फार्मूला आकार लेने लगा- पारंपरिक पारिवारिक पृष्ठभूमि, मधुर संगीत, पीढ़ीगत संघर्ष और ढेर सारा प्यार। 'हम साथ-साथ हैं' (1999) ने इस फार्मूले पर मुहर लगा दी। सूरज की खासियत रही है कि वे जल्दबाजी में फिल्में नहीं बनाते। उन्होंने एक दशक में केवल तीन फिल्में दीं, लेकिन तीनों ही ब्लाकबस्टर रहीं। 'विवाह' और 'प्रेम रतन धन पायो' ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया।

प्रेम से बनी सलमान की पहचान

सूरज के पूरे करियर में सलमान खान उनके सबसे भरोसेमंद साथी रहे। सलमान ने सूरज की लगभग हर रोमांटिक फिल्म में ‘प्रेम’ का किरदार निभाया, जो बाद में उनकी पहचान बन गया। दिलचस्प बात यह है कि जहां सूरज की फिल्मों में सलमान ‘संस्कारी प्रेम’ बने, वहीं बाद में वह स्पाई यूनिवर्स में ‘टाइगर’ जैसे बिल्कुल विपरीत अवतार में भी नजर आए।

Prem Ratan Dhan Payo

हां, सूरज ने नायिकाओं के चुनाव में हमेशा विविधता रखी। भाग्यश्री से लेकर माधुरी दीक्षित, तब्बू, करीना कपूर और सोनम कपूर तक कई अभिनेत्रियों ने उनके सिनेमाई कैनवास में रंग भरे।

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मधुर संगीत का भरोसेमंद साथ

हमेशा से संगीत सूरज की फिल्मों की जान रहा है। उनके गाने सरल और कर्णप्रिय होते हैं। उन्होंने राम-लक्ष्मण, रवींद्र जैन और हिमेश रेशमिया जैसे मंझे संगीतकारों पर भरोसा जताया। हालांकि, अपनी नवीनतम फिल्म ‘ऊंचाई’ में उन्होंने अमित त्रिवेदी जैसे आधुनिक संगीतकार के साथ प्रयोग कर सबको चौंका दिया।

यह तीन बुजुर्ग दोस्तों द्वारा अपने दिवंगत मित्र की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए एवरेस्ट बेस कैंप तक की यात्रा, शारीरिक सीमाओं और भावनात्मक जुड़ाव की एक मार्मिक दास्तां है।

Unchai Movie

इस फिल्म के लिए सूरज को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला। सूरज जिस धीमी और सधी हुई गति से काम करते हैं, उसे देखते हुए दर्शकों को उनके अगले कदम को जानने के लिए शायद कुछ और साल इंतजार करना पड़े, लेकिन इतना तय है कि उनके सिनेमा की सादगी और भारतीय मूल्य हमेशा उनकी पहचान बने रहेंगे।

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