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'अपनी पब्लिसिटी में कैसी शर्म...' हिंदी और मराठी सिनेमा में सफलता का श्रेय खुद को देती हैं Sai Tamhankar

By Priyanka SinghEdited By: Ekta Gupta
Published: Sun, 13 Sep 2026 10:48 AM (GMT+05:30)

मराठी और हिंदी फिल्मों में शानदार किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस सई ताम्हणकर (Sai Tamhankar) का कहना है ने हाल ही ...और पढ़ें

हिंदी और मराठी सिनेमा में अंतर पर बोलीं सई ताम्हणकर

हिंदी और मराठी सिनेमा में अंतर पर बोलीं सई ताम्हणकर 

HighLights

  1. हिंदी और मराठी सिनेमा में अंतर पर बोलीं सई ताम्हणकर 

  2. खुद को प्रमोट करना शर्म की बात नहीं मानतीं ताम्हणकर

  3. गणेश उत्सव को लेकर एक्साइटेड हैं एक्ट्रेस

प्रियंका सिंह, मुंबई। हिंदी और मराठी प्रोजेक्ट के बीच अभिनेत्री सई ताम्हणकर एक संतुलन बनाकर चल रही हैं। खास बात यह है कि वह अपने मन-मुताबिक काम चुन पा रही हैं। हाल ही में जी5 की फिल्म अडकित्ता में नजर आईं सई आगामी दिनों में विनय वैकुल निर्देशित वेब सीरीज कारनामें : बदला गियर, पलटी किस्मत में दिखेंगी।

गणेश उत्सव को लेकर उत्साहित हैं सई

फिलहाल सई इन दिनों गणेशमय हुए मुंबई के माहौल को लेकर काफी खुश हैं। वह कहती हैं कि मेरा मन बहुत करता है कि मैं गणेश जी को घर पर लाऊं, लेकिन यह त्यौहार को बनाने का एक तरीका है, सब कुछ अनुशासन होना चाहिए। मेरा कोई तय नहीं होता है, कई बार उसी दिन शूटिंग होती है। मैं तो खुद को मजदूर कहती हूं।

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हर साल ला पाऊंगी या नहीं, इस डर से नहीं लाती हूं। लेकिन अगर मैं गणेशोत्सव (Ganesh Festival) के दौरान मुंबई में होती हूं, तो कई पंडालों में जाती हूं। दोस्तों के घर में गणपति बाप्पा के दर्शन करने जाती हूं। वह दस दिन कमाल के होते हैं। आज भी मुझे अगर कोई गणपति बाप्पा से जुड़ी कहानियां या उनकी लीलाओं की कहानियां सुनाता है, तो मैं एक बच्चे की तरह सुनती हूं।

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हाउस हेल्प का किरदार निभाकर मिली ये सीख

मुझे इतने सालों में समझ आया कि ईश्वर को कहीं से भी बैठकर याद कर सकते हैं। फिल्म अडकित्ता में वह बच्चा संभालने वाली घरेलू सहायक की भूमिका में नजर आई हैं। पारंपरिक हीरोइनों से अलग रोल करने को लेकर आगे सई कहती हैं कि यह रोल करने के बाद मेरी सोच अपने घरेलू सहायकों के लिए बदल गई है। मुझे दोनों तरह के रोल करने हैं।

जब आपके जीवन में कोई जगह खाली होती है, तो फिर आप और मेहनत करते हैं। मैं किसी जल्दी में नहीं हूं, उन रोल तक पहुंचने के लिए और मेहनत करूंगी। मुझे कोई शिकायत नहीं है। मैं स्क्रीनटाइम पर ध्यान नहीं देती हूं। जो समय स्क्रीन पर दिया गया है, उसमें आप क्या कर पाते हैं, वही अहम होता है।

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लेकिन स्क्रीन पर उन्हें किस तरह से पेश किया जा रहा है, उसे लेकर वह कितनी जागरुक रहती हैं? 

इस सवाल के जवाब सई कहती हैं कि मैं पहले स्क्रीन पर अपने प्रेजेंस के बारे में नहीं सोचती थी, लेकिन जब मैं करियर में आगे बढ़ी, खुद को बेहतर समझने लगी हूं, अब जाकर मैं सोचने लगी हूं। इसको लेकर जागरुक और सतर्क हूं। ऐसे रोल पसंद आते हैं, जिनके किरदार कहानी की रीढ़ की हड्डी होते हैं। कई बार अहसास नहीं होता है, लेकिन कई लोग हैं जो आपको देखते हैं, आपके सफर पर नजर रखते हैं, आपसे प्रेरित होते हैं।

अपनी नजर में भले ही आप साधारण हों, लेकिन कइयों की नजर में आप असाधारण होते हैं। मुझे हर बार लगता है कि मुझ पर जिम्मेदारी है, उसे पूरा करने के लिए अपनी पसंद में कोई बदलाव करना पड़े, तो मैं दिल से करूंगी। यह बदलाव हाल में मुझमें आया है, जिसके लिए मैंने कई रोल छोड़े हैं।

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क्या किसी किरदार के साथ कभी समझौता किया है?

आगे किसी रोल पर किए समझौते को लेकर सई कहती हैं कि करियर के शुरुआत में किया था, तब आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता है, तो आप ज्यादा आजाद रहते हैं। तब मैंने जो च्वाइसेस की थी, वह शायद मैं आज नहीं करती। उस वक्त, जो सही लगा वह किया। काम करके यह समझ आई है। अब समझौता करूंगी, तो काम नहीं कर पाऊंगी। पिछले दस सालों में आधे मन से कोई काम नहीं किया है।

मराठी और हिंदी सिनेमा के स्टारडम के बीच क्या सई को अंतर महसूस होता है? 

जवाब में वह कहती हैं कि मुझे लगता है कि प्यार प्यार होता है। यह बात सही है कि हिंदी सिनेमा की पहुंच बड़ी है। पूरे देश में हिंदी फिल्में देखी जाती है। कलाकार की पहुंच उससे बड़ी हो जाती है, तो उसका मोह कई बार हो सकता है, आखिरकार आप इंसान ही हैं। लेकिन मैं कहूंगी कि प्यार प्यार है उसको तोला नहीं जा सकता है।

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खुद को क्रेडिट देती हैं सई

सई अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां वह अपनी मनपसंद का काम कर पा रही हैं। इसके लिए वह किसी और को नहीं, बल्कि खुद को ही इसका श्रेय देती हैं। वह कहती हैं कि मैंने बहुत मेहनत की है, इसलिए इसका श्रेय मैं खुद को देना चाहूंगी। अनुशासन में रहकर लगातार मेहनत करना आसान नहीं होता है।

मेहनत करो तो किस्मत देती है साथ

जब आप मेहनत करते हैं, तो किस्मत भी साथ देती है। इसमें प्रमोशन और खुद को पब्लिसिटी की अहमियत को भी वह समझती हैं। सई आगे कहती हैं कि समय के साथ जो बदलाव होते हैं, उसका हिस्सा बनना है या नहीं वह हर किसी पर निर्भर करता है, मुझे यह सब पसंद है।

खुदी की पब्लिसिटी करने में कोई शर्म नहीं

अगर मेहनत की है, तो प्रमोशन करके यह कहना कि आकर देखिए, इसमें शर्म की क्या बात है। समय के साथ प्रमोशन और खुद की पब्लिसिटी जरूरी है, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए।

सई ने मिमी, हंटर, भक्षक जैसी हिंदी फिल्मों में काम किया है, वे हाल ही में विजय वर्मा के साथ प्राइम वीडियो (Prime Video) की वेब सीरीज मटका किंग में भी नजर आई थीं। वहीं दुनियादारी, धुराला और तुम्बाड़ची मंजुला जैसी मराठी फिल्मों का वे हिस्सा रही हैं।

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