15 हजार गाने वाली सिंगर...लता-आशा से भी ज्यादा थीं पॉपुलर, 90's में गाए ब्लॉकबस्टर गाने; फिर कैसे हुई गुमनाम?
90 के दशक की मशहूर गायिका साधना सरगम ने 36 भाषाओं में 15 हजार से अधिक गाने गाए। लता और ...और पढ़ें


समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 80 और 90s के दशक की फीमेल सिंगर्स के बारे में बात होती है तो जहन में सबसे पहले लता मंगेशकर और उसके बाद आशा भोसले का नाम आता है। लेकिन इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में कविता कृष्णमूर्ति, अल्का याग्निक, अनुराधा पौडवाल का नाम आता है।
लेकिन आज हम जिस सिंगर की बात कर रहे हैं उन्हें लता मंगेशकर से भी ज्यादा पसंद किया जाता था। 90 के दशक में उनके गाने खूब सुने जाते थे और दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनके मधुर गीतों का जादू चल रहा था। हम बात कर रहे हैं साधना सरगम (Sadhana Sargam) की। 90s में सिंगिंग की दुनिया में राज करने के बाद वो अचानक से गायब हो गईं।
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कई पुरस्कार जीत चुकी हैं साधना
साधन सरगम ने अपने सिंगिंग करियर में 36 भाषाओं में करीब 15 हजार गाने गाए। वह एक ट्रेन्ड क्लासिकल सिंगर थीं जिन्हें फिल्मफेयर अवार्ड्स साउथ, पांच महाराष्ट्र स्टेट फिल्म अवार्ड, चार गुजरात स्टेट फिल्म अवार्ड्स और एक ओडिशा स्टेट फिल्म अवार्ड मिला है।
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साधना सरगम का जन्म 7 मार्च 1969 को महाराष्ट्र के दाभोल में साधना घाणेकर के रूप में हुआ था। उनकी माता नीला घाणेकर एक क्लासिकल सिंगर और म्यूजिक टीचर थीं, जिन्होंने कम उम्र में ही साधना को संगीत की दुनिया से परिचित कराया।
दूरदर्शन के लिए गाया था पहला गाना
उन्होंने 6 साल की उम्र में वसंत देसाई द्वारा रचित अपना पहला गीत 'एक चिड़िया अनेक चिड़िया' दूरदर्शन के लिए गाया था। उन्होंने 4 वर्ष की आयु में सवाई गंधर्व संगीत समारोह में भी प्रस्तुति दी थी। वसंत देसाई की सलाह पर उनकी माता ने उन्हें पंडित जसराज से संगीत सीखने के लिए भेजा। साधना ने उनसे 7 सालों तक संगीत की शिक्षा प्राप्त की।
साधना सरगम ने एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी शुरुआत एक गुजराती फिल्म कंकू पगली से की थी। उसके बाद उन्होंने एक हिंदी फिल्म रुस्तम में 'दूर नहीं रहना' गाया। हालांकि, उनका पहला रिलीज गाना विधाता (1982) का 'सात सहेलियां' था, जिसे कल्याणजी-आनंदजी ने कंपोज किया था।
किसने दिया था 'सरगम' उपनाम?
यह कल्याणजी ही थे जिन्होंने उन्हें सरगम उपनाम दिया, जिसका अर्थ है संगीत नोट्स, क्योंकि उन्हें लगा कि उनका नाम उनकी संगीत प्रतिभा को प्रतिबिंबित करना चाहिए। साधना सरगम को असली पहचान साल 1983 में आई फिल्म कलाकार के गाने 'नीले नीले अंबर पर' से मिली।
इसके बाद उन्होंने खुदगर्ज, खून भरी मांग, किशन कन्हैया, ईमानदार, जैसी करनी वैसी भरनी, दाता, दरिया दिल, त्रिदेव, काला बाजार,नाचे नागिन गली गली, और बी.आर. चोपड़ा की लोकप्रिय टेलीविजन सीरीज महाभारत के लिए गीत गाया। सिंगर को आखिरी बार महाकुंभ में देखा गया था।
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गाए कई सारे भक्ति गीत
फिल्म जुर्म से उनका गाना जब कोई बात बिगड़ जाए जबरदस्त हिट साबित हुआ। बता दें कि साधना सरगम न केवल एक बेहतरीन प्लेबैक सिंगर बल्कि वो भक्ति गीत, शास्त्रीय संगीत, गजल और पॉप एल्बमों की गायिका भी हैं। उन्होंने भजन और आध्यात्मिक गीतों के कई एल्बम जारी किए हैं, जैसे साई दर्शन, ओम नमः शिवाय, श्री कृष्ण शरणम ममः आदि।
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