'रणबीर कपूर जूनियर आर्टिस्ट को...', Ramayana में माता 'कौशल्या' बनीं इंदिरा कृष्णन ने खोले सेट के कई राज
नितेश तिवारी की रामायण पार्ट 1 में माता कौशल्या का किरदार निभाने जा रही अभिनेत्री इंदिरा कृष्णन ने रणबीर कपूर ...और पढ़ें
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सेट पर रणबीर के बर्ताव पर बोलीं इंदिरा कृष्णन/ फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
इंदिरा कृष्णन ने रामायण के सेट के खोले राज
एक्ट्रेस ने रणबीर कपूर के व्यवहार पर बोली ये बात
माता कौशल्या का किरदार पाकर दिखीं बेहद खुश
दीपेश पांडेय, मुंबई। हॉलिडे: अ सोल्जर नेवर ऑफ ड्यूटी और एनिमल फिल्मों में काम कर चुकी अभिनेत्री इंदिरा कृष्णन ने अपने करियर में टीवी और फिल्मों के बीच लगातार संतुलन बनाए रखा। इन दिनों शो गंगा माई की बेटियां में वह दुर्गावती की भूमिका निभा रही हैं। हाल ही में उनके शो ने एक वर्ष पूरा किया। आगामी फिल्म रामायणम् में माता कौशल्या की भूमिका निभा रही इंदिरा से उनके शो, सफर, रामायणम् और महिलाओं की आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर बातचीत की।
एक पात्र में अनेक पहलू
शो में अपने पात्र को लेकर इंदिरा कहती हैं, "इस पात्र में बहुत से लोगों ने मेरी तुलना बाहुबली फिल्म की माहिष्मती से की है। इसमें मेरी दुर्गावती की भूमिका बहुत ही सशक्त है। बीते एक साल में इस पात्र में मैंने अपनी क्षमता का 200 प्रतिशत डाला, जिससे मुझे लोगों की बहुत ज्यादा सराहना मिलने लगी। इसमें मुझे बहुत से पहलुओं को निभाने का मौका मिला। यह सिर्फ एक मां की भूमिका नहीं है। दुर्गावती घर में संतुलन बनाकर रखने वाली मां के साथ ठकुराइन भी है, जो लोगों को अपने नियंत्रण में रखती है। घर के बाहर निकलने पर उसका रूप पूरी तरह से बदल जाता है।

टीवी का बदलता स्तर
25 वर्ष से ज्यादा समय से टीवी में काम कर रही इंदिरा समय के साथ इसमें आए बदलावों पर कहती हैं, "मैं उस स्कूल से आई हूं, जहां मुझे टीवी में अनुराग बासु लेकर आए थे। उनके साथ मैंने मंजिलें अपनी अपनी नामक शो किया था। तब से लेकर आज तक टीवी की दुनिया में बहुत से बदलाव हुए हैं। अब ज्यादातर निर्माता कास्टिंग इस हिसाब से करते हैं कि फलां बजट है, आप इतने में कर पाओगी या नहीं?
पहले ऐसे काम नहीं होता था। मुझे याद है कि टीवी पर मैंने 3,000 रुपये की तनख्वाह से काम शुरू किया था। निश्चित तौर पर अब टीवी में काम करने वाले लोगों का इसके प्रति जुनून कम हो गया है। अब तो बस वही है कि भाई जल्दी काम निकालो, मास्टर जल्दी भेजना है। कंटेंट के नजरिए से भी टीवी का स्तर काफी नीचे चला गया है।"
रणबीर से मिला सम्मान
फिल्म एनिमल के बाद इंदिरा ने फिल्म रामायणम् में एक बार फिर अभिनेता रणबीर कपूर के साथ काम किया। वह कहती हैं, "रणबीर के साथ काम करते हुए उन्होंने मुझे कभी यह नहीं एहसास कराया कि मैं टेलीविजन की कलाकार हूं। उन्होंने मुझे बहुत प्यार दिया। उनके साथ काम करते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा भी। वह सीन के दौरान मुझे क्यू (संकेत) भी देते थे। वहीं टीवी में ही मेरे ऐसे बहुत से अनुभव रहे हैं, जहां क्यू देने के लिए सह कलाकार नहीं खड़े होते हैं। रणबीर तो छोटे से छोटे जूनियर कलाकार को भी खड़े रहकर क्यू देते हैं। अपने काम और सह-कलाकार को इतना सम्मान देने वाले एक्टर्स बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। मैंने सेट पर गिफ्ट में उनकी बेटी राहा को कुछ किताबें भी दी थीं।
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कौशल्या की भूमिका
रामायणम् में कौशल्या की भूमिका निभाने को लेकर इंदिरा कहती हैं, यह मेरे लिए बहुत बड़ा पड़ाव है। टेलीविजन में लोग मेरे पास सिर्फ सशक्त पात्रों के प्रस्ताव लेकर ही आते हैं। वहीं नितेश तिवारी ने मुझे रामायणम् में कौशल्या जैसे सॉफ्ट कैरेक्टर में कास्ट किया। इससे एक निर्देशक का भरोसा दिखता है। मुझे मालूम है कि माता कौशल्या रामायण की बहुत ही महत्वपूर्ण पात्र हैं। मैंने अपनी तरफ से बहुत अच्छे से यह रोल निभाया है। जैसा निर्देशक चाहते थे, हम लोगों ने बिल्कुल वैसे ही किया है। मुझे यकीन है कि रामायणम् बहुत बड़ी फिल्म होने वाली है।
कहानियों से मिलती है प्रेरणा
इंदिरा का मानना है कि अच्छी कहानियां महिला सशक्तीकरण की दिशा में महिलाओं को सही प्रेरणा दे सकती हैं। वह कहती हैं, मुझे इस इंड्स्ट्री में काम करते हुए 26 साल हो गए। जिनमें से 20 साल मैंने सिर्फ महिला सशक्तीकरण से जुड़ी कहानियों में काम किया है। 16-17 साल पहले मैंने एक धारावाहिक किया था, कृष्णाबेन खाखरावाला। मेरे उस पात्र से प्रेरित होकर कई औरतों ने राजस्थान, अहमदाबाद और भावनगर में अपनी छोटी खाखरा फैक्ट्रियां शुरू कीं।

राजस्थान की प्रसिद्ध रिद्धि-सिद्धि खाखरा कंपनी ने तो यह बात अपने इंस्टाग्राम पेज पर भी लिखी है। आज उनके साथ काफी औरतें काम कर रही हैं। आज भी मेरे घर पर अक्सर वे पांच-छह किलो खाखरा भेजती रहती हैं। बाकी आजकल के युवा बहुत ही स्मार्ट हो गए हैं, उन्हें कोई विशेष सुझाव देने की जरूरत नहीं है। बस इतना है कि मुश्किल परिस्थितियों के सामने बहुत जल्दी हार मान लेने की बजाय हमें एक दूसरे का साथ देना और परिस्थितियों से लड़ना सीखना चाहिए।"
