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Pyre: जीते जी बना ली अपनी 'चिता', दिल चीरती है 'बुजुर्ग कपल' की कहानी; 12 अवॉर्ड जीतकर दुनियाभर में बजाया डंका

Published: Wed, 04 Nov 2026 07:56 PM (IST)

Pyre एक ऐसी फिल्म है जिसका शोर बॉक्स ऑफिस पर न सही, लेकिन दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल में सुनाई दे रहा है। इस फिल्म की कहानी भावुक कर देगी।

पायरे फिल्म को मिले 12 अवॉर्ड्स। फोटो क्रेडिट- यूट्यूब

पायरे फिल्म को मिले 12 अवॉर्ड्स। फोटो क्रेडिट- यूट्यूब

HighLights

  1. फिल्म को बनाने में लगे थे 8 साल 

  2. इंटरनेशनल फेस्टिवल में छाई फिल्म

  3. IMDb से फिल्म को मिली 8.1 रेटिंग

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। खूबसूरत पहाड़, नीला आसमान, साफ नदी और हवा... उत्तराखंड की वादियां शहरी क्षेत्रों में रहने वालों को बहुत ही सुकून भरे लगते हैं, लेकिन असलीयत उससे अलग होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने की क्या चुनौतियां होती हैं, इसकी कहानी करीब से दिखाती है 'पायरे' (Pyre) फिल्म।

कोई ए-लिस्ट स्टार नहीं, बड़ा बजट नहीं, बड़ा डायरेक्टर नहीं... Pyre चर्चा में है तो बस इसकी एक दिल छू लेने वाली कहानी की वजह से। 115 मिनट की इस फिल्म ने दुनियाभर में धमाल मचा दिया है। कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसकी स्क्रीनिंग हुई और साथ ही 12 इंटरेशनल अवॉर्ड भी अपने नाम किए हैं।

आखिरकार इस फिल्म में ऐसा क्या है और यह क्यों दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है और तारीफें बटोर रही है, चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं...

क्या है पायरे फिल्म की कहानी?

'पायरे' का हिंदी में अर्थ है 'चिता'। यह कहानी उत्तराखंड के एक दूर-दराज कुमाऊनी गांव में रहने वाले एक बुजुर्ग कपल पदम सिंह और तुलसी की है। दोनों एक ऐसे गांव में रहते हैं, जहां न अस्पताल है, न बिजली है और ना ही सड़क है। वो गांव खाली हो रहा है। 80 साल के पदम और उनकी पत्नी तुलसी के अलावा गांव में सिर्फ 7 और लोग रहते हैं।

pyre movie

जब तुलसी बीमार हो जाती है, तो पदम अपने गांव में रहने वाले दो नौजवान को उसे अस्पताल ले जाने की गुहार लगाता है और बदले में अपनी बकरियां दे देता है। डॉक्टर कहता है कि उन्हें तुलसी को फिर से दिखाने लाना होगा, लेकिन यहां मुश्किल यह है कि गांव में बचे वो दो नौजवान गांव छोड़ने का प्लान बना चुके हैं। अब तुलसी को अस्पताल कौन ले जाएगा, क्योंकि वह अकेले उसे उठाकर खतरनाक पहाड़ और नदियों को पार करके अस्पताल नहीं ले जा सकता।

बेटे की आस, 'चिता' का डर

धीरे-धीरे एक और परिवार ने वो गांव छोड़ दिया। अब सिर्फ वहां एक और कपल बचा है। अब फिक्र है कि अगर वे भी वहां से चले गए तो उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा। पदम और तुलसी को चिट्ठी मिलती है कि उसका 28 साल पहले शहर चला गया बेटा वापस लौट रहा है। वह जश्न में डूब जाते हैं, लेकिन वह नहीं आता है। उनकी आस खत्म हो जाती है।

एक रोज पदम घर के बाहर दो चिता बनाता है और तुलसी से कहता है कि दोनों पहाड़ से नीचे कूदकर जान देते हैं। कम से कम गांव में बचे लोग उनका अंतिम संस्कार तो कर सकते हैं, लेकिन तुलसी उनकी बात को अनसुनी कर देती है। एक सुबह वह उठती है और देखती है कि पदम चिता पर लेटा है। वह उसे उठाती है, लेकिन वह नहीं उठता। तुलसी तन्हा हो जाती है, टूट जाती है और अकेले अपने पति का अंतिम संस्कार कर देती है।

Pyre film

कुछ समय बाद एक और चिट्ठी आती है। चिट्ठी लाने वाला कहता है कि वह उसके बेटे की चिट्ठी लाया है। इसके बाद तुलसी एक ऐसा खुलासा करती है जो आपकी आंखों में आंसू ला देगी।

सच्ची कहानी पर बेस्ड है फिल्म

यह फिल्म पलायन, अकेलेपन, प्रेम, इंतजार और जिंदगी भर साथ निभाने की एक भावनात्मक जर्नी को जाहिर करती है। मुश्किल भरी जिंदगी के बावजूद पदमा और तुलसी नोक-झोंक, प्यार, परवाह और एक-दूसरे की देखभाल करके इस सफर को जीते हैं। उनका प्यारा रिश्ता दिल छूता है। आपको बता दें कि यह एक असली कहानी पर बनी फिल्म है। फिल्म की कहानी उत्तराखंड के मुनस्यारी में रहने वाले एक वास्तविक बुजुर्ग दंपति की सच्ची कहानी से प्रेरित है।

पायरे का निर्देशन करने वाले विनोद कापड़ी एक ऐसे बुजुर्ग कपल की कहानी को पर्दे पर लेकर आए जिनसे वह मुनस्यारी ट्रैक के दौरान मिले थे। उनकी कहानी ने उन्हें फिल्म बनाने के लिए इंस्पायर किया। फिल्म में पदम सिंह कापरी और हीरा देवी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

फिल्म को मिले 12 इंटरनेशनल अवॉर्ड्स

विनोद कापड़ी को इस फिल्म को बनाने में 8 साल लगे। यह फिल्म इंटरनेशनल इवेंट में दिखाई गई है। इसने कई अवॉर्ड्स भी जीते हैं।

  • टैलिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट फिल्म (ऑडियंस अवॉर्ड)
  • बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल- जूरी स्पेशल मेंशन एशियन सिनेमा कॉम्पटीशन
  • एशियन समर फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट फिल्म (ऑडियंस अवॉर्ड), जूरी स्पेशल मेंशन अवॉर्ड
  • लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट फिल्म ऑडियंस अवॉर्ड
  • बर्मिंघम इंडियन फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट फिल्म ऑडियंस अवॉर्ड
  • इंडियन फिल्म फेस्टिवल स्टटगार्ट- ग्रैंड जूरी बेस्ट फीचर फिल्म अवॉर्ड जर्मन स्टार ऑफ इंडिया अवॉर्ड
  • डीसी साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट फीचर फिल्
  • शिकागो साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल- फिक्शन फीचर ऑडियंस च्वॉइस अवॉर्ड
  • नोवी साद फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट डायरेक्टर
  • मोसाइक इंटरनेशनल साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल- बेस्ट फीचर फिल्म अवॉर्ड, बेस्ट म्यूजिक अवॉर्ड

यह फिल्म 30 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। भले ही बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का असर कम हो, लेकिन ऑडियंस इस फिल्म की खूब सराहना कर रही है। सोशल मीडिया पर लोग पॉजिटिव रिस्पॉन्स दे रहे हैं।

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