लाहौर में जन्मे, पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर; हीरो बनने आए 'विलेन' को शादी में देख डर जाती थीं औरतें
आज हम हिंदी सिनेमा की उस हस्ती को सेलिब्रेट कर रहे हैं, जो फिल्मी दुनिया में बनना हीरो चाहते थे, ...और पढ़ें

हीरो नहीं विलेन बनकर एक्टर ने हासिल की कामयाबी/ फोटो-फेसबुक
HighLights
91 साल के हुए बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन
इस एक्टर को पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर
शादी-फंक्शन में देखकर दिग्गज अभिनेता से डर जाती थीं औरते
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। मुंबई नगरी में कई लोग हर दिन हीरो बनने का ख्वाब लेकर आते हैं, लेकिन उनमें से चुनिंदा ही ऐसे होते हैं, जिनका ये ख्वाब पूरा हो पाता है। 66 साल पहले यही ख्वाब लेकर लाहौर में पैदा हुए पंजाबी लड़के ने हिंदी फिल्मों में कदम रखा था। कौन हैं वह दिग्गज अभिनेता जो बनना चाहते थे हीरो, लेकिन बन गए बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन पढ़ें उनसे जुड़ा ये दिलचस्प किस्सा।
पिता चाहते थे पढ़ लिखकर डॉक्टर बने उनका बेटा
जिस दिग्गज अभिनेता की कहानी आज हम अपने इस आर्टिकल में आपको बता रहे हैं, वह कोई और नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े विलेन प्रेम चोपड़ा (Prem Chopra) हैं, जो आज अपना 91वां जन्मदिन मना रहे हैं। प्रेम चोपड़ा का जन्म 23 सितंबर 1935 में पार्टिशियन से पहले लाहौर में हुआ था। पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखने वाले दिग्गज अभिनेता प्रेम भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद शिमला में बस गए। वह अपने छह भाई बहनों में तीसरे नंबर पर थे।
शिमला के एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़े प्रेम चोपड़ा के पिता चाहते थे कि वह या तो डॉक्टर बने या फिर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस ऑफिसर (IAS)ऑफिसर बनकर देश की सेवा करे। जब शिमला से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह पिता के ट्रांसफर के बाद पंजाब आए, तो उन्होंने वहां पर नाटको में भाग लेना शुरु कर दिया। उनके पिता ने उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने पर जोर दिया, लेकिन उनकी दिलचस्पी उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की तरफ खींच ही लाई।

1960 में हीरो बनने आए थे प्रेम चोपड़ा
प्रेम चोपड़ा ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्मों से की। साल 1960 में उन्होंने चौधरी कर्नेल सिंह के साथ एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, जहां उनकी पहली फिल्म ने ही नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीता। इसके बाद उन्होंने सपनी, आहे धरती पंजाब दी जैसी फिल्मों में हीरो का किरदार अदा किया। खुद एक पुराने इंटरव्यू में प्रेम चोपड़ा ने ये बताया था कि उन्होंने करियर के शुरुआती दौर में हीरो की भूमिका अदा की थी, लेकिन जब वह हिंदी फिल्मों में आए तो शुरुआत में एक हीरो के रूप में उनकी फिल्में फ्लॉप हो गईं।
वौ कौन थी में बने थे विलेन
हीरो के तौर पर लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद साल 1964 में प्रेम चोपड़ा ने फिल्म वौ कौन थी में काम किया, जिसमें अभिनेता ने विलेन का किरदार अदा किया था। फिल्म में उनके किरदार का नाम रमेश था। यह फिल्म बहुत बड़ी हिट हुई और जिसके बाद डायरेक्टर महबूब खान ने उन्हें फिल्मों में विलेन का किरदार अदा करने की सलाह दी। बस इसके बाद उन्होंने बॉबी, उपकार, कटी पतंग, दो रास्ते जैसी कई बड़ी फिल्मों में विलेन की भूमिका निभाई और आज वह बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन विलेन माने जाते हैं।

औरतों के डर से शादी-फंक्शन में आना किया था बंद
प्रेम चोपड़ा ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में यह भी बताया था कि विलेन की भूमिका ने उनकी असल जिंदगी पर भी काफी इफेक्ट डाला। जिस दौर में वह लगातार विलेन की भूमिका निभा रहे थे उस दौर में वह अक्सर वेडिंग और फैमिली फंक्शन में जाना अवॉयड करते थे, क्योंकि महिलाएं उनकी प्रेजेंस से ही डर जाती थी। उन्होंने यह भी बताया था कि उनके पिता को औरतों को ये बात समझानी पड़ती थी कि असल जिंदगी में उनका बेटा अच्छा इंसान है, वो सिर्फ परदे पर विलेन की भूमिका निभाता है।
