'गांधी' के लिए Pratik Gandhi को वजन घटाना पड़ा भारी, पैरों में शुरू हो गईं दिक्कतें; बोले- 'यह तकलीफदेह...'
घमासान में नजर आ रहे अभिनेता प्रतीक गांधी (Pratik Gandhi) ने खुलासा किया है कि गांधी सीरीज (Gandhi Series) के ...और पढ़ें

गांधी के लिए प्रतीक गांधी ने घटाया वजन।

समय कम है?
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स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' में हर्षद मेहता से लेकर 'फुले' में ज्योतिराव फुले तक अभिनेता प्रतीक गांधी (Pratik Gandhi) ने कई वास्तविक शख्सियतों को पर्दे पर जीवंत किया है।
आगामी दिनों में वह हंसल मेहता निर्देशित 'गांधी' (Gandhi) वेब सीरीज में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की भूमिका में नजर आएंगे।
रियल लाइफ रोल्स निभाने पर बोले प्रतीक
वास्तविक किरदार निभाने को लेकर प्रतीक गांधी कहते हैं, "वास्तविक जीवन के किरदार हों या यथार्थवादी किरदार, दोनों तरह के किरदार निभाने में मुझे बहुत मजा आता है। हर तरह के किरदार करने में मुझे खुशी मिलती है। यथार्थवादी किरदारों की खास बात यह है कि इनके जरिए मैं भावनात्मक गहराइयों को एक अलग तरह से तलाश सकता हूं।"
प्रतीक गांधी ने आगे कहा, "मैं थोड़े जटिल भावों तक जा सकता हूं। मुझे ड्रामा शैली भी वैसे बहुत पसंद है, तो मुझे लगता है कि मैं इसका आनंद लेता हूं।"

कैरेक्टर्स के लिए करना पड़ता है ट्रांसफॉर्मेशन
किरदार को पर्दे पर हूबहू उतारने के लिए अभिनेता सिर्फ अपने अभिनय पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि कई बार उन्हें अपने शरीर में भी बड़ा बदलाव करना पड़ता है। प्रतीक गांधी के लिए यह शारीरिक कायांतरण भी उनके अभिनय का अहम हिस्सा रहा है।
वजन बढ़ाने से लेकर उसे घटाने और मांसपेशियों में बदलाव करने तक, उन्होंने अलग-अलग किरदारों के लिए अपने शरीर को किरदार की जरूरत के मुताबिक ढाला है। हालांकि, वह मानते हैं कि इस तरह का कायांतरण आसान नहीं होता और इसके लिए काफी मेहनत और धैर्य की जरूरत पड़ती है।
गांधी के लिए प्रतीक ने घटाया वजन
वह कहते हैं, "पूरी प्रक्रिया काफी तकलीफदेह होती है। 'गांधी' के लिए मुझे काफी वजन कम करना पड़ा था। मुझे वजन और मांसपेशियां, दोनों कम करनी थीं। यह थोड़ा मुश्किल था। शरीर चोटिल होने के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। मेरे पैरों में भी दिक्कतें शुरू हो गई थीं। ऐसे में आप न खेल सकते हैं, न ठीक से व्यायाम कर सकते हैं।"

शरीर में होने लगी हैं दिक्कतें
प्रतीक गांधी ने आगे कहा, "यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं। बाहर से आपको अपना वजन बढ़ाना होता है, लेकिन शरीर के अंदर मौजूद सभी अंगों पर भी काफी दबाव पड़ता है। आपको सामान्य से लगभग तीन गुना ज्यादा भोजन पचाना पड़ता है। इसलिए यह पूरी प्रक्रिया काफी तकलीफदेह होती है। लेकिन जब आखिर में उसका परिणाम सामने आता है, तो लगता है कि सारी मेहनत सार्थक थी।"
