विशाल मिश्रा की सिंगिंग के सामने दबी हनिता भाम्बरी की आवाज? 'टॉक्सिक' सिंगर ने दिया बेबाक जवाब
विशाल मिश्रा के साथ टॉक्सिक से बतौर सिंगर शुरुआत करने वालीं हनिता भाम्बारी ने फिल्मों और इंडिपेंडेंट म्यूजिक के बीच ...और पढ़ें

हनिता भाम्बरी से खास बातचीत/ फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
'टॉक्सिक'के गाने में विशाल मिश्रा संग अनुभव शेयर किया
कलात्मक स्वतंत्रता और पहचान बनाए रखने पर जोर दिया
डेब्यू एल्बम 'शोहरत' के गहरे मतलब को समझाया
जागरण न्यूजनेटवर्क, मुंबई। हिंदी सिनेमा के गलियारों में आजकल एक नया नाम गूंज रहा है वो है हनिता भाम्बरी। फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' के शीर्षक गीत गाने वाली हनिता ने ही इसे लिखा भी है। इंडिपेंडेंट म्यूजिक की दुनिया में जाएदन और अवंती नागराल जैसे दिग्गजों के साथ काम कर चुकीं हनिता ने अपना डेब्यू एल्बम 'शोहरत' भी रिलीज किया है। 'वो सात दिन' और 'ओशियंस' जैसे उनके इमोशनल गाने दिलों को छू लेते हैं..
इंडिपेंडेंट म्यूजिक में आप अपनी मर्जी की मालिक थीं, तो क्या 'टॉक्सिक' जैसी बड़ी मसाला फिल्म के लिए लिखते और गाते वक्त आपको अपनी आर्टिस्टिक फ्रीडम से कोई समझौता करना पड़ा?
मेरे लिए आर्टिस्टिक फ्रीडम का मतलब सिर्फ अपनी मर्जी का म्यूजिक बनाना नहीं है, बल्कि हर प्रोजेक्ट में अपनी एक आइडेंटिटी लेकर आना है। इंडिपेंडेंट म्यूजिक ने मुझे अपनी वॉयस और अपनी सोच को एक्सप्लोर करने की आजादी दी है, और उसी एक्सपीरियंस की वजह से मैं बड़े प्रोजेक्ट्स में भी अपने प्रोसपेक्टिव के साथ कंट्रीब्यूट कर पाती हूं।
'टॉक्सिक' के साथ मेरा सफर काफी ऑर्गेनिक रहा। मैं इनिशियली लिरिक्स लिखने आयी थी, लेकिन जब विशाल मिश्रा और गीतू मोहनदास ने मेरी आवाज सुनी तो उन्होंने मुझे फिल्म में मेरे ही शब्द गाने का मौका दिया। मेरे लिए यह एक नए क्रिएटिव स्पेस को एक्सप्लोर करने का एक्सपीरियंस था। आई थिंक एक आर्टिस्ट के तौर पर आपको अपनी आइडेंटिटी खोए बिना अलग-अलग दुनिया का हिस्सा बनना आना चाहिए।

'टॉक्सिक' गाने में विशाल मिश्रा जैसे बड़े नाम के साथ गाते हुए क्या मन में यह डर था कि आपकी आवाज उनके स्टारडम के पीछे कहीं दब न जाए?
मेरे लिए विशाल मिश्रा एक बहुत बड़ी इंस्पिरेशन और ड्रीम कोलाबोरेशन हैं। ऐसे में डर तो आया ही नहीं मन में। उनके साथ मेरा नाम जुड़ना और काम करना मेरे लिए एक प्रिविलेज और बहुत बड़ा लर्निंग एक्सपीरियंस रहा। 'टॉक्सिक' में मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेंट यह था कि मैं गाने के इमोशन को अपनी वॉयस में ऑनेस्टली ला सकूं। मैं किसी दूसरे आर्टिस्ट की तरह सुनायी देने की कोशिश नहीं करना चाहती। मैं चाहती हूं कि लोग मेरी वॉयस को उसकी अपनी आइडेंटिटी के लिए पहचानें और वही चीज के लिए विशाल मिश्रा ने भी मुझे एन्करेज किया।
आपकी डेब्यू एल्बम का नाम शोहरत है,यह नाम सिर्फ एक ख्वाहिश है, या म्यूजिक इंडस्ट्री में फेम पाने के बाद का कोई कड़वा अनुभव?
शोहरत वह हर आर्टिस्ट के लिए है जो खुद की पहचान चाहते हैं और इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। उस जर्नी के पेन को दिखाने की कोशिश की है मैंने इन सब गानों में। हम अक्सर फेम को सफलता, रिकग्निशन और अपने सपने पूरे होने से जोड़ते हैं। लेकिन उसके पीछे की कीमत, रिश्ते, खुद से लड़ाई, दुनिया की दी हुई डिसेप्शन और ह्यूमन नेचर का एक दूसरा साइड भी होता है।

इस एल्बम में मैंने उस डार्क साइड को एक्सप्लोर किया है। म्यूजिक इंडस्ट्री में रहते हुए मैंने बहुत कुछ देखा, सीखा और फील किया है, लेकिन मैं यह नहीं कहूंगी कि एल्बम सिर्फ किसी एक एक्सपीरियंस या किसी एक इंसान के बारे में है। यह बहुत सारे इमोशंस और एक्सपीरियंस का मिश्रण है। मेरे लिए शोहरत एक सवाल भी है—जिस चीज को पाने के लिए हम इतनी मेहनत करते हैं, क्या उसे पाने के बाद हम वाकई खुश होते हैं?
आपने जेडन से लेकर अवंती नागराल तक इतने कलाकारों के साथ काम किया है, क्या यह आपकी पसंद है या आज के दौर में रील-व्यूज और रीच बढ़ाने की एक मजबूरी है?
जितना मुझे अकेले में काम करना और लिखना पसंद है,मुझे उतना ही कोलाबोरेशन के जरिए सीखना पसंद है। मैंने हमेशा कोलाबोरेशंस को एक क्रिएटिव एक्सचेंज की तरह देखा है। हर आर्टिस्ट की अपनी दुनिया, अपनी सोच और अपना नजरिया होता है। जब दो आर्टिस्ट्स साथ आते हैं, तो कुछ ऐसा क्रिएट हो सकता है जो शायद वे अकेले नहीं कर पाते। आज के टाइम में सोशल मीडिया और रीच का इम्पोर्टेंस जरूर है। एक इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट होने के नाते हमें अपने म्यूजिक को लोगों तक पहुंचाने के तरीकों के बारे में सोचना पड़ता है।
लेकिन मेरे लिए सिर्फ रील्स या व्यूज किसी कोलाबोरेशन की वजह नहीं हो सकते। अगर क्रिएटिव केमिस्ट्री नहीं है, तो सिर्फ रीच के लिए साथ काम करना लॉन्ग टर्म में मीनिंगफुल नहीं होता। मैं चाहती हूं कि हर कोलाबोरेशन मेरे म्यूजिक में कुछ नया ऐड करे और मुझे एक आर्टिस्ट के तौर पर ग्रो करने में हेल्प करे। एंड मैंने जिन भी आर्टिस्ट्स के साथ काम करा है उनसे मुझे कुछ न कुछ सीखने का मौका मिला है।

आपके गाने जैसे 'परछाईं' और 'गिर के उठ पड़ेंगे हम' बहुत ज्यादा इमोशनल और गहरे होते हैं,क्या कभी डर लगता है कि आप 'सैड/इमोशनल सॉन्ग्स' वाले एक ही दायरे में सिमट कर रह जाएंगी?
मुझे सारे जज्बातों के बारे में लिखना पसंद है। जिस जिंदगी के फेज से गुजर रही होती हूं,उसके बारे में लिख के, ऑडियंस से जुड़ के, बहुत सुकून महसूस होता है। मेरे लिए म्यूजिक ह्यूमन इमोशंस को एक्सप्लोर करने का मीडियम है। कभी वह दर्द होता है, कभी गुस्सा, कभी प्यार, कभी रिवेंज, और कभी वह अंदर की ताकत जो मुश्किल वक्त से गुजरने के बाद आती है। मुझे लगता है कि लोग इमोशनल म्यूजिक को अक्सर सिर्फ सैडनेस से जोड़ देते हैं, जबकि मेरे लिए इमोशन का मतलब है किसी चीज को गहराई से महसूस करना। मैं एक ऐसी आर्टिस्ट बनना चाहती हूं जो अलग-अलग कहानियों और जज्बातों को लोगों तक पहुंचा सके। मैं नहीं चाहती कि मैं खुद को किसी एक जेनर या कैटेगरी में कैद कर लूं।
फिल्म 'पूजा मेरी जान' में अपने गाने के बारे में बताइए और आप अपनी विशाल मिश्रा के साथ दूसरी कोलाब को कैसे देखती हैं?
मेरे लिए 'पूजा मेरी जान' का हिस्सा बनना बहुत सुंदर एक्सपीरियंस रहा है। हर प्रोजेक्ट की अपनी एक दुनिया होती है और उसके किरदार को अपनी वॉयस के थ्रू कैसे एक्सप्रेस किया जा सकता है। विशाल मिश्रा के साथ दोबारा काम करना भी मेरे लिए खास है। पहली बार साथ काम करने पर आप एक-दूसरे के क्रिएटिव प्रोसेस को समझते हैं, और दोबारा साथ आने पर उस एक्सपीरियंस को और आगे ले जाने का मौका मिलता है। मैं हर कोलैबोरेशन से कुछ नया सीखना चाहती हूं, लेकिन साथ ही अपनी वॉयस और अपनी आइडेंटिटी को भी मेंटेन करना चाहती हूँ। मेरे लिए सबसे खूबसूरत बात यही है।
