'अभिनेत्रियों को हक के लिए लड़ना पड़ता है...' Plabita Borthakur ने फिल्मों में हो रहे भेदभाव पर तोड़ी चुप्पी
प्लाबिता बोरठाकुर (Plabita Borthakur) अपकमिंग फिल्म 'दूसरा' में नजर आएंगी, उन्होंने हाल ही में इंडस्ट्री में हीरो-हीरोइन को मिलने वाली फीस के अंतर पर बात की।
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'दूसरा' फिल्म में नजर आएंगी प्लाबिता बोरठाकुर
HighLights
'दूसरा' फिल्म में नजर आएंगी प्लाबिता बोरठाकुर
हीरो-हीरोइन को मिलने वाली फीस पर बोलीं एक्ट्रेस
इंडस्ट्री में होने वाले भेदभाव पर तोड़ी चुप्पी
प्रियंका सिंह, मुंबई। हमेशा अपने हिस्से की चीजों को मांगकर लेना पड़ता है। यह कहना है अभिनेत्री प्लाबिता बोरठाकुर का जिनकी फिल्म 'दूसरा' 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें वह ऐसी लड़की के रोल में, जो अपने घर में भेदभाव का शिकार है। उस दौरान टीवी पर चल रहे क्रिकेट मैच में क्रिकेटर सौरव गांगुली का सफर उसे हिम्मत देता है।
जब प्लाबिता के पास आई ये कहानी
प्लाबिता कहती हैं कि जब मेरे पास इसकी कहानी आई थी, तब मैं समझ नहीं पा रही थी कि कैसे बनेगी, कहानी पेपर पर वाकई बहुत अलग थी। जहां तक असमानता और भेदभाव की बात फिल्म में दिखाई गई है, तो वास्तविक जीवन में मैंने अपने घर पर तो नहीं, लेकिन इंडस्ट्री में महसूस किया है। मैं पहले बहुत सारे विज्ञापन करती थी, उसमें लड़कों को लड़कियों से ज्यादा पैसे मिलते थे।
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एक्ट्रेसेस को ज्यादा एडजस्ट करना पड़ता है
प्लाबिता ने कहा फिल्म इंडस्ट्री में हीरो-हीरोइन की असमानता पर कहा, 'फिल्मों में तो इससे ज्यादा होता है। अभिनेत्रियों से उम्मीद की जाती है कि वो ज्यादा एडजस्ट करें। जैसे दो लोग अगर साथ काम कर रहे हैं, तो अभिनेता को बेहतर वैनिटी मिलेगी, उसे एक्स्ट्रा बजट मिलेगा। अभिनेत्रियों को भी मिलता है, लेकिन अगर अभिनेता जितना चाहिए, तो मांग कर लेना पड़ता है। हमें अपने मैनेजर को भेजना पड़ता है कि वह जाकर कहे, हमें चीजों के लिए लड़ना पड़ता है।
हीरो-हीरोइन को मिलनी चाहिए एक जैसी फीस
मैं नारीवादी विचारधारा की हूं और मानती हूं कि समानता फीस के मामले में होनी चाहिए, लेकिन फिर वह समानता घर में भी होनी चाहिए, जहां केवल पुरुष ही प्रदान करने वाला न हो। घर पर मेरे माता-पिता ने मुझे और मेरी बहनों की बहुत आजादी दी है। ऐसे में मुझे कभी उनसे झूठ बोलने की जरुरत नहीं पड़ी थी। लड़की होने की वजह से थोड़ी उम्मीदें हालांकि वहां पर थी कि शांति से बात करो।

मैं तो जिद्दी थी, लेकिन मेरी बड़ी बहन, जो मुंबई और असमी फिल्मों में काम करती हैं, उनसे उम्मीद थी जाती थी कि वह जहां भी जाएं, तो असम की पारंपरिक साड़ी ही पहने, जबकि वहां के अभिनेताओं पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। मेरी मां शिक्षिका रही हैं, उन्होंने यही कहा था अभी पढ़ो, जब घर के काम करने होंगे तो वह भी सीख जाओगी।
उन्होंने कभी भेदभाव महसूस नहीं कराया। मेरे एक्स ब्वायफ्रेंड मेरे माता-पिता को बहुत पसंद थे। वह कई बार मेरी प्लेट उठाकर किचन में रख देते थे, खुद अपनी प्लेट धोते थे, जैसे मैं धोती हूं, तो यह बातें मेरे माता-पिता बहुत सराहते थे। मैं कहती थी कि इसमें तारीफ करने वाली क्या बात है, यह बेसिक चीजें हैं जो हर किसी को आनी चाहिए।
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क्या फिल्म की तरह वास्तविक जीवन में भी प्लाबिता के कोई हीरो हैं, जिनसे वह प्रेरित हैं?
इस पर वह कहती हैं कि मुझे फिल्म के किरदार की तरह बाहर हीरो तलाशना नहीं पड़ा। मैं अपने माता-पिता से ही प्रेरित हूं। उनके रिश्ते से मैंने बहुत कुछ सीखा है। दोनों फिल्मी जोड़े की तरह एकदम परफेक्ट हैं। मेरे डैड हम तीनों बहनों के साथ मजबूती से खड़े रहते है, उन्होंने सिखाया है कि आत्मनिर्भर रहना और जो पाना है उसके लिए मेहनत करना जरूरी है।
यह सब वह मेरी मां के बिना नहीं कर पाते, क्योंकि वह जितने महत्वाकांक्षी हैं, मेरी मां में उतना ही धैर्य है। मां ने सिखाया है कि किसी को लेकर अपनी राय मत बना लो, क्योंकि उसकी जिंदगी में क्या हो रहा है, तुम्हें नहीं पता। मैंने अपने हीरो अपने परिवार में ही ढूंढ लिए हैं।
