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सपने पूरे ना होने का दर्द बयां करता है ये Cult गीत, एक-एक लाइन दिखाती है जिंदगी की सच्चाई

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:52 PM (GMT+05:30)

14 साल पहले एक ऐसा गीता आया था जिसने जिंदगी की सच्चाई शब्दों में बयां की थी खासकर उनके लिए ...और पढ़ें

असल जिंदगी की सच्चाई बयां करता है ये गीत

असल जिंदगी की सच्चाई बयां करता है ये गीत

HighLights

  1. असल जिंदगी की सच्चाई बयां करता है ये गीत

  2. दर्दभरे गीत की एक-एक लाइन पर पसीजता है दिल

  3. सपने पूरे ना होने की टीस दिखाता है गाना

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कहते हैं कि वो लोग बहुत खुशकिस्मत होते हैं जो अपने सपनों को पूरा कर पाते हैं लेकिन दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सपने पूरे करना तो दूर उन्हें देखने का भी मौका नहीं मिलता। वहीं कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनका कोई सपना तो होता है लेकिन कई मजबूरियों के चलते वे सपने कहीं दफ्न हो जाते हैं।

14 साल पहले आए एक गाने ने सपने पूरे ना होने की टीस को बहुत ही अच्छे तरीके से बयां किया है। इस गाने की एक-एक लाइन जिंदगी के संघर्ष, मजबूरी और दुख को बयां करती है और काफी लोग इसे रिलेट कर पाते हैं।

जिंदगी की सच्चाई को बयां करता कल्ट गीत

यह गाना 2012 में आई हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर (Gangs Of Wasseypur) के लिए बनाया गया था। इसके लिरिक्स हैं- इक बगल में चांद होगा, इक बगल में रोटियां (Ik Bagal Mein Chand Hoga)।

Piyush (12)

इस गीत को बेहतरीन सिंगर और म्यूजिशियन पीयूष मिश्रा (Piyush) ने लिखा, कंपोज किया और गाया है। पीयूष की आवाज में लोगों ने इस गाने को खूब सराहा। यह गाना जिंदगी में सपनों और बुनियादी जरूरतों के बीच संघर्ष को बेहद गहराई से बयां करता है।

एक-एक लाइन का अर्थ है दिल को छूने वाला

इस बगल में 'चांद' होगा, इक बगल में 'रोटियां'

इस गाने की खासियत इसके लिखे गए मीनिंगफुल बोल हैं। जिसमें चांद को बड़े ख्वाबों, उम्मीदों और सपनों का प्रतीक बनाया गया है वहीं दूसरी तरफ रोटियों को पेट की भूख, रोजी-रोटी कमाने की मजबूरी का प्रतीक बताया है। इसका सीधा मतलब ये है कि कई बार जिम्मेदारी के बोझ तले इंसान अपने बड़े ख्वाब पूरे नहीं कर पाता।

इक बगल में नींद होगी, इक बगल में लोरियां

एक तरफ जहां सुकून की नींद की ख्वाहिश होगी वहीं दूसरी ओर लोरियों का अर्थ ममता, चाहत है जो आराम और राहत देती हैं।

 

'हम चांद पर रोटी की चादर डालकर सो जाएंगे, और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएंगे'

यह लाइन बहुत ही मीनिंगफुल है जिसका मतलब है कि हम अपने ख्वाबों के ऊपर बुनियादी जरुरतों को रखेंगे और संघर्ष को सुकून से ऊपर रखेंगे। क्योंकि अभी तो सिर्फ रोटी का संघर्ष ही है, सपनों और सुकून को हम बाद में देखेंगे।

गैंग्स ऑफ वासेपुर के बारे में

2012 में रिलीज हुई 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' को अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में मनोज बाजपेयी, ऋचा चड्ढा, रीमा सेन, पीयूष मिश्रा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, पंकज त्रिपाठी, हुमा कुरैशी, तिग्मांशु धूलिया जैसे कलाकारों ने काम किया है।

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