बंटवारे ने छीना भारतीय सिनेमा का 'नूर', 10 हजार गीत गाने वाली 'मल्लिका-ए-तरन्नुम'; लता दी से भी बड़ी सुपरस्टार
हाल ही में सिनेमा जगत की एक दिग्गज फनकार की 100वीं जयंती मनाई गई है, जो लता मंगेशकर से भी बड़ी गायिका थीं।
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सिनेमा का नूर कौन (फोटो क्रेडिट- फेसबुक)
HighLights
सिनेमा की दिग्गज स्टार कौन
गायिकी और एक्टिंग में छोड़ी छाप
लता मंगेशकर से भी बड़ा स्टारडम
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद कई फिल्मी सितारे ऐसे रहे, जिन्होंने भारत देश को अपना आशियाना चुना और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाया। लेकिन कुछ दिग्गज फनकार ऐसे भी रहे, जो पाकिस्तान चल गए और वहां जाकर स्टार बने।
ऐसी ही एक मशहूर गायिका और अदाकारा नूर जहां (Noor Jehan) ने हाल ही में अपनी 100वीं जयंती मनाई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नूर जहां भारतीय सिनेमा की महान गायिका लता मंगेशकर से भी बड़ी सुपरस्टार थीं।
बंटवारे ने छीना भारतीय सिनेमा का नूर
बंटवारे से पहले नूर जहां बतौर गायक हिंदी सिनेमा में एक्टिव रही थीं और लंबे समय तक उन्होंने यहां अपने हुनर और हुस्न का जलवा बिखेरा था। बचपन से ही कला और शास्त्रीय संगीत की तरफ नूर जहां का झुकाव था और इसी वजह से उन्होंने फिल्मी जगत में नाम कमाने का फैसला लिया।
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लेकिन जैसे ही हिंदी सिनेमा में उन्होंने अपना करियर ऊंचाइयों की तरफ अग्रसर किया, वैसे ही भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया और वह हमेशा-हमेशा के लिए पड़ोसी मुल्क चली गईं। इसके बाद वह फुल टाइम पाकिस्तानी फिल्मी जगत में एक्टिव हो गईं और वहां गायिका के साथ-साथ बतौर एक्ट्रेस भी नाम कमाने लगीं।
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पाकिस्तान जाने से पहले बतौर सिंगर नूर जहां ने हिंदी सिनेमा की फिल्में अनमोल घड़ी (1946), मिर्जा साहिबान (1947) और जुगनू (1947) में अपनी मधुर आवाज की छाप छोड़ी थी। जिनके लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। नूर जहां को लता मंगेशकर से भी बड़ा स्टार इस वजह से भी माना जाता है कि क्योंकि वह सिंगिंग और एक्टिंग दोनों में सफल रही थीं। जबकि लता दीदी का एक्टिंग करियर फ्लॉप रहा था।
कैसे बनीं 'मल्लिका-ए-तरन्नुम'
पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री की लेडी सुपरस्टार के तौर पर नूर जहां को आज भी याद किया जाता है। आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पाकिस्तान 40 से अधिक वर्षों तक फिल्मी गाने गाए। उनका गायन करियर 1930 से 1990 के दशक की शुरुआत तक चला।
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माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने उर्दू, पंजाबी और सिंधी भाषाओं में लगभग 10,000 गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें पाकिस्तानी फिल्मों के 2,400 से ज्यादा गाने भी शामिल रहे थे। इसके अलावा नूर जहां ने बतौर एक्ट्रेस चन्न वे (1951), दोपट्टा (1952), पाटे खान (1955), छू मंतर (1958) और कोयल (1959) जैसी शानदार पाकिस्तानी फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया था। इस वजह से उन्हें पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री की 'मल्लिका-ए-तरन्नुम' कहा गया था।
हार्ट अटैक से गई जान
23 दिसंबर 2000 को हार्ट अटैक की वजह से पाकिस्तान के कराची में नूर जहां का निधन हो गया था। 74 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा दिया था। नूर की मौत के बाद न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि एशियाई सिनेमा जगत में एक युग का अंत हो गया था।
