विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

फैज की नज्म और Noor Jehan की धुन...बवाल है 64 साल पुराना रिलीज हुआ गाना; मल्लिका-ए-तरन्नुम ने गाकर किया अमर

Published: Mon, 21 Sep 2026 07:13 PM (IST)

फैज अहमद फैज की मशहूर नज़्म 'मुझ से पहली सी मोहब्बत' को जब नूरजहां ने एक कार्यक्रम में प्रस्तुत किया तो इसे सुनकर पाकिस्तान भी चौंका गया।

नूरजहां ने गाया था बॉलीवुड का कल्ट गीत

नूरजहां ने गाया था बॉलीवुड का कल्ट गीत

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग, मैं ने समझा था कि तू है तो दरख़्शां है हयात' ये खूबसूरत नज्म मशहूर शायर फैज अहमद फैज (Faiz Ahmad Faiz) की कलम से निकली थी।

गाने को दिया गया मॉर्डन टच 

देखने में ये भले ही आपको किसी शायर की आम सी नज्म लगें लेकिन ये दो महान फनकारों के मिलन, बगावत और अटूट सम्मान की एक ऐतिहासिक दास्तान है। इस गाने की अपनी लोकप्रियता है। आधुनिक युग ने इसका अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल किया।

शिल्पा राव ने इसे मॉर्डन टच दिया तो वहीं कोक स्टूडियो में हुमैरा चन्ना और नबील शौकत अली ने इसी नज्म को अपने अंदाज में गाया था, जिसे लाखों लोगों ने पसंद किया। हालांकि ओरिजनल गाने जैसा वो चार्म आज तक कोई क्रिएट नहीं कर पाया।

Noor (1)

नूर जहां ने खुद कंपोज किया था गाना

इस गाने के बारे में यूं तो कई किस्से हैं लेकिन ये असल किस्सा कहां का है ये हम आपको जरूर बताने की कोशिश करेंगे। यह किस्सा उस समय का है जब फैज अहमद फैज अपने क्रांतिकारी और वामपंथी विचारों के कारण जेल में बंद थे।

पाकिस्तान में एक सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान, मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां ने अपने गानों की लिस्ट दी थी जिसमें से उन्हें फैज अहमद फैज वाली नज्म को गाने के लिए मना कर दिया गया। नूरजहां बचपन से ही फैज साहब की शायरी की दीवानी थीं उनकी इन पंक्तियों को लेकर उन्होंने खुद का गाना कंपोज किया था।

 
 
 
View this post on Instagram

A post shared by kagazi phoool (@kagazkephoool)

नूरजहां ने की थी गाने की जिद

चूंकि फैज सरकार की नजर में प्रतिबंधित थे, इसलिए आयोजकों ने नूरजहां को यह गाना नहीं गाने दिया गया। फिर भी उन्होंने जिद की और सरकार और आयोजकों को उनके सामने झुकना पड़ा। जब नूरजहां ने रेडियो पाकिस्तान के लाइव ब्रॉडकास्ट पर इस नज़्म को अपनी खुद की तैयार की हुई धुन में गाना शुरू किया, तो उसकी गूंज पूरे देश में फैल गई।

बाद में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए साल 1962 में आई पाकिस्तानी फिल्म 'कैदी' में इसे नूरजहां की आवाज और धुन के साथ ही शामिल किया गया। जब यह गीत लोगों के कानों तक पहुंचा तो सभी ने इसे खूब पसंद किया और ये गाना हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया।

यह भी पढ़ें- वकालत छोड़ बने एक्टर, नूरजहां संग गाया ये कल्ट गीत, इन्हीं की फिल्म का रीमेक थी 'मदर इंडिया'; सुरेंद्र की कहानी

यह भी पढ़ें- सुबह-सुबह टीवी पर जरूर आता था संजय दत्त का 34 साल पुराना गाना, उदित नारायण ने दिखाया 'इंतजार का असली दर्द'