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79 साल पहले एक कल्ट गाने से 'अफसाना' बन गई थी ये हीरोइन, लाहौर से आकर बॉलीवुड की सुपरस्टार बन किया था राज

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:37 PM (IST)

मुनव्वर सुल्ताना (Munawar Sultana) हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा थीं जिन्होंने अपने दौर में नूरजहां जैसी हीरोइन को भी टक्कर दी थी।

लाहौर से आकर बनीं बॉलीवुड की जान। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

लाहौर से आकर बनीं बॉलीवुड की जान। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

HighLights

  1. एक गाने से पॉपुलर हो गई थीं मुनव्वर सुल्ताना

  2. अपने दौर की हीरोइनों को टक्कर देती थीं सुल्ताना

  3. 40s के आखिर में मुनव्वर सुल्ताना ने किया था राज

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। मधुबाला, मीना कुमारी और साधना से पहले सिनेमा में लाहौर से एक खूबसूरत अदाकारा आईं जिन्होंने बॉलीवुड में कम समय में ही अपनी पहचान बना ली। यह अदाकारा थीं मुनव्वर सुल्ताना (Munawar Sultana)। वह कभी सिनेमा की स्टार थीं, लेकिन उनका अंत बहुत दुखभरा रहा।

1924 में लाहौर (ब्रिटिश इंडिया) में जन्मीं मुनव्वर सुल्ताना किसी फिल्मी वर्ल्ड से ताल्लुक नहीं रखती थीं। यहां तक कि उनका ख्वाब भी कोई फिल्मी स्टार बनना नहीं था। कहा जाता है कि वह डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन 1941 में आई फिल्म 'खजांची' ने उनकी राह बदल दी।

पहली फिल्म से मिली पहचान

'खजांजी' में मुनव्वर सुल्ताना का रोल बहुत छोटा था, लेकिन उन पर फिल्माया गया गाना 'पीने के दिन आए' (Peene Ke Din Aaye) इतना पॉपुलर पॉपुलर हुआ कि इसने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद उन पर फेमस प्रोड्यूसर-डायरेक्टर मजहर खान की नजर गई और वह उन्हें लाहौर से मुंबई ले आए। मजहर खान ने ही बतौर लीड मुनव्वर सुल्ताना को फिल्म 'पहली नजर' से बड़ा ब्रेक दिया था।

Munawar Sultana

सुल्ताना पर फिल्माया गया था हिट गाना

'पहली नजर' में एक गाना 'दिल जलता है तो जलने दो' भी था जिसमें मुनव्वर भी नजर आई थीं। इस कल्ट गाने को मुकेश ने गाया था। 1940s के आखिर में मुनव्वर सुल्ताना धीरे-धीरे इंडस्ट्री में पैर जमाना शुरू कर चुकी थीं। इसके बाद उन्हें एक ऐसी फिल्म मिली, जिसने उन्हें सुपरस्टार बना दिया।

टुन-टुन के गीत ने चमकाई मुनव्वर सुल्ताना की किस्मत

यह फिल्म थी 1947 में आई फिल्म दर्द (Dard) जिसमें मुनव्वर सुल्ताना और श्याम कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जबकि सुरैया सेकंड लीड हीरोइन थीं। इस फिल्म में मुनव्वर पर फिल्म 'अफसाना लिख रही हूं' गाना फिल्माया गया था जो सुपर-डुपर हिट हुआ था। यह गाना उमा देवी उर्फ टुन-टुन ने गाया था। इस गाने ने मुनव्वर को स्टार बना दिया था।

Munawar Sultana Actress

एक साल में रिलीज हुई थीं सात फिल्में

इसके बाद मुनव्वर शुल्ताना ने एक के बाद एक कई फिल्मों में काम किया जिसमें पराई आग, सोना, दिल की दुनिया और बाबुल जैसी फिल्में बनाईं। 1949 उनके लिए सबसे बिजी साल रहा क्योंकि एक साथ उनकी 7 फिल्में रिलीज हुई थीं और सभी सुपरहिट रही थी।

मुनव्वर सुल्ताना ने सिनेमा में करीब डेढ़ दशक ही बिताए और उसके बाद एक्टिंग वर्ल्ड से किनारा कर लिया। उन्हें आखिरी बार जल्लाद में देखा गया था।

शादी के बाद छोड़ी थी इंडस्ट्री

मुनव्वर सुल्ताना ने बिजनेसमैन शरीफ अली से शादी की थी। शरीफ से निकाल के बाद ही उन्होंने इंडस्ट्री से हमेशा-हमेशा के लिए किनारा कर लिया। इसके बाद इंडस्ट्री ने उन्हें भुला दिया। उनके सात बच्चे हुए, 1966 में उनके पति की अचानक मौत हो गई और बच्चों की अकेले परवरिश की।

ग्लैमर वर्ल्ड से दूर मुनव्वर सुल्ताना अपनी जिम्मेदारियों में उलझी रहीं। उनका आखिरी समय बहुत ही दर्द भरा रहा। 8 सालों तक वह अल्जाइमर की बीमारी से जूझती रहीं और 2007 में 82 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

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