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Mukesh के गानों से इंस्पायर होकर इंग्लैंड को धूल चटाकर आया था ये क्रिकेटर, Raj Kapoor के लिए गाए थे 100 गाने

By Yunus KhanEdited By: Tanya Arora
Published: Wed, 15 Jul 2026 04:21 PM (IST)

दिग्गज सिंगर मुकेश न सिर्फ हिंदी सिनेमा का सोल थे, बल्कि मंदिरों से लेकर रेलवे स्टेशन तक उनकी आवाज का ...और पढ़ें

मुकेश के गानों का बड़ा फैन था ये क्रिकेटर/ फोटो- Instagram

मुकेश के गानों का बड़ा फैन था ये क्रिकेटर/ फोटो- Instagram

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संक्षेप में पढ़ें

यूनुस खान,मुंबई। मुकेश के बारे में सबसे दिलचस्प बात ये है कि हम सबके भीतर वो थोड़े-थोड़े मौजूद हैं। जब हम उदास होते हैं तो मुकेश के गाने हमारे होठों पर सज जाते हैं। जब हमारे भीतर रूमानियत की खुशबू महकती है-मुकेश हमारे साथ होते हैं। पर जिस गायक ने हम भारतीयों की उदासी को सबसे ज्यादा बांटा है- वो मुकेश हैं। इसलिए आपने देखा होगा कि एक जमाने में गानों की किताबें रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर मिल जाया करती थीं-उनमें सबसे लोकप्रिय किताबें मुकेश के ‘दर्दीले’ नग्मों की होती थीं।

मुकेश के बहुत बड़े फैन हैं बी.एस.चंद्रशेखर

आज मुकेश के बारे में कुछ दिलचस्प बातें। आपको ये जानकर हैरत होगी कि अपने जमाने के महान भारतीय लेग स्पिनर बी.एस. चंद्रशेखर मुकेश के बहुत बड़े फैन हैं। कई बार ऐसा हुआ कि मैच के दौरान कोई दर्शक साथ रेडियो लाया और उस पर मुकेश का गाना बजा- तो चंद्रशेखर बॉलिंग करते-करते रूक गये।

मेरे साथ भी चंद्रशेखर जी की एक याद है। मैंने रेडियो पर मुकेश का एक अनमोल गीत बजाया। चंद्रशेखर जी ने कहीं से मेरा नंबर जुटाया और कॉल करके बोले, मुझे हर हालत में मुकेश का वो गाना चाहिए। मेरे पास सब गाने हैं। एक यही कैसे नहीं है, पता नहीं। अजीत वाडेकर की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उसी की धरती पर पहली बार बी एस चंद्रशेखर के जादू से ही हराया था। उन्होंने 38 रन देकर 6 विकेट झटके। वो भी मुकेश के गानों से प्रेरित होकर।

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मुकेश ने राज कपूर के लिए गाए 100 से ज्यादा गाने

22 जुलाई 1923 को दिल्ली में जन्मे मुकेश अपनी बहन की शादी में गा रहे थे-जब उनके रिश्तेदार अभिनेता मोतीलाल ने मुकेश को सुना और उन्हें अपने साथ मुंबई ले आए। 1945 में ‘पहली नजर’ में उन्हें मौका दिया संगीतकार अनिल बिस्वास ने-‘दिल जलता है तो जलने दे’ मुकेश ने एकदम सहगल शैली में गाया था। ये भी दिलचस्प है कि कुंदनलाल सहगल मुकेश की आवाज से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने अपना हारमोनियम मुकेश को तोहफे में दे दिया था।

राज कपूर की बतौर हीरो पहली फिल्म थी 1947 में आई केदार शर्मा की ‘नीलकमल’-जिसमें मुकेश ने उनके लिए गाना गाया था। फिर 1948 में जब राज कपूर ने अपनी पहली फिल्म ‘आग’ बनाई तो मुकेश से गवाया-‘जिंदा हूं इस तरह’। बस यहां से मुकेश राज कपूर की आवाज बन गये। खुद राज कपूर की बनाई फिल्में हों या बाहर की फिल्में- राजकपूर की आवाज मुकेश ही बनते। कहते हैं कि मुकेश ने राजकपूर के लिए सौ से ज्यादा गाने गाये हैं।

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फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ का एक गाना है-‘चंचल शीतल निर्मल कोमल’-ये गाना रिकॉर्ड करके मुकेश अमेरिका टूर पर चले गये थे। वहां से बस एक ताबूत लौटा। जब 27 अगस्त 1976 को मुकेश का निधन हुआ था, तब राज कपूर भावुक होकर रो पड़े थे और उन्होंने कहा था, "जब शैलेंद्र हमें छोड़कर चले गए, तो मुझे लगा जैसे मैंने एक हाथ खो दिया हो; जब जयकिशन का देहांत हुआ तो मैंने दूसरा हाथ खो दिया। लेकिन जब मुकेश का देहांत हुआ, तो मेरी जान ही चली गई। मैं शरीर हूँ, मेरी आत्मा मुकेश थी।"

रामचरित मानस भी की थी रिकॉर्ड

मुकेश का मानस रामचरित-मानस से जुड़ा था। उन्होंने अपने स्वर में रामचरित मानस रिकॉर्ड की थी। आज भी आपको कई मंदिरों में मुकेश जी के स्वर में रामचरित मानस सुनाई पड़ जाएगी। या उनके कुछ भजन, जैसे-‘जिनके हृदय श्रीराम बसे’। मुकेश ने कई फिल्मों में अभिनय भी किया। जैसे निर्दोष, आदाब अर्ज, माशूका वगेरह। उन्होंने दो फिल्में भी बनाई-अनुराग और मल्हार। फिल्म ‘आग’ का गाना ‘छोटी-सी ये जिंदगानी’ मुकेश पर ही फिल्माया गया है।

मुकेश को चार बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिले-फिल्म अनाड़ी के गाने ‘सब कुछ सीखा हमने’ के लिए पहली बार उन्हें बेस्ट सिंगर का अवॉर्ड मिला। फिर ‘पहचान’ के गाने ‘सबसे बड़ा नादान’ के लिए। इसके बाद ‘बेईमान’ के शीर्षक गीत के लिए और फिर ‘कभी-कभी’ के शीर्षक गीत के लिए। उन्हें ‘रजनीगंधा’ के गाने-‘कई बार यूं भी देखा है’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

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गैर फिल्मी गीत और गजलें भी गाईं

मुकेश ने कई गैर-फिल्मी गीत और गजलें गाईं हैं। जैसे जांनिसार अख्तर की गजल ‘अशआर मेरे यूं तो ज़माने के लिए हैं’ या फिर शिवकुमार सरोज का गीत-‘तेरे लबों के मुकाबिल गुलाब क्या होगा’। उन्होंने अमीर खुसरो की अमर रचना- जिहाले मिस्कीं मकुन तगाफुल’ भी गाई है।

पूरी दुनिया में हजारों लाखों लोग हैं जो मुकेश की आवाज में गाने गाते हैं। मुकेश हम सबके भीतर जरा-जरा से मौजूद हैं। हमारी उदास हमारे आंसुओं को बांटते हुए। विनम्र नमन।

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