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38 साल पुराना Madhuri Dixit के करियर का सबसे बड़ा गाना, लीड सिंगर ने गाई सिर्फ एक लाइन; सुनते ही थिरकने लगेंगे पैर

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:11 PM (IST)

38 साल पहले Madhuri Dixit ने बॉलीवुड को जबरदस्त चार्टबर्स्टर गाना दिया था, जो आज भी आइकॉनिक बना हुआ है।

38 साल बाद भी आइकॉनिक है माधुरी का गाना

38 साल बाद भी आइकॉनिक है माधुरी का गाना

HighLights

  1. 38 साल बाद भी आइकॉनिक है माधुरी का गाना

  2. बप्पी लाहिरी थे गाने के म्यूजिक डायरेक्टर

  3. सरोज खान ने जीता था बेस्ट कोरियोग्राफर का अवॉर्ड

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। माधुरी दीक्षित ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में, गाने और डांस नंबर दिए हैं। उनकी परफॉर्मेंस आज भी उतनी ही यादगार है और उनके फैंस के बीच उनका क्रेज भी वैसा का वैसा ही है। इसका नतीजा है कि सालों पहले जिन गानों पर माधुरी ने परफॉर्मेंस दी वे सालों बाद भी आइकॉनिक बने हुए हैं।

'धक धक गर्ल' ने 38 साल पहले एक गाना दिया जो रातोंरात चार्टबस्टर बन गया। इस चार्टबस्टर सॉन्ग का क्रेज इतना है कि यह 3 दशक से ज्यादा होने के बाद भी आइकॉनिक बना हुआ है। रियलिटी शो से लेकर नॉर्मल पार्टी तक यह गाना माहौल बना देता है।

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लीड सिंगर ने गाई थी सिर्फ एक लाइन

38 साल पुराने इस गाने की खास बात ये है कि माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) के लिए प्लेबैक सिंगिंग करने वाली सिंगर अनुपमा देशपांडे ने इसकी सिर्फ एक लाइन गाई थी और बाकी गाना कोरस ने गाया था। इस गाने के बोल हैं- हमको आजकल है इंतजार, कोई आए लेके प्यार (Humko Aajkal Hai Intezar)।

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अनुपमा ने गाने के मुखड़े की एक लाइन- हमको आजकल है इंतजार...गाई थी। वहीं पूरे गाने को कोरस ने गाया था। गाने की खास बात ये कि इस गाने को इतने साल सुनने के बाद भी यह पुराना नहीं लगता बल्कि इसका म्यूजिक सालों बाद भी उतना ही रेलेवेंट है।

सरोज खान को मिला था अवॉर्ड

'लावणी स्टाइल' में कोरियोग्राफ किए गए इस गाने की कोरियोग्राफर सरोज खान (Saroj Khan) थीं जिन्हें इसके लिए बेस्ट कोरियोग्राफर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। इस गाने को लिरिक्स जावेद अख्तर ने लिखे और बप्पी लाहिरी इसके म्यूजिक डायरेक्टर हैं।

यह गाना 1990 में रिलीज हुई फिल्म सैलाब (Sailaab) का है जिसे दीपक बलराज विज ने निर्देशित किया था। इसमें माधुरी दीक्षित और आदित्य पंचोली ने अहम किरदार निभाए थे।

सैलाब के बारे में

फिल्म की कहानी डॉ. सुषमा मल्होत्रा (माधुरी दीक्षित) की है जो एक दयालु डॉक्टर हैं, जो एक ऐसे एक्सीडेंट पीड़ित का इलाज करती हैं जिसकी पहचान नहीं हो पाती और जिसकी याददाश्त चली गई है। वह उसका नाम 'कृष्णा' (आदित्य पंचोली) रखती हैं।

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जैसे-जैसे कृष्णा ठीक होता है, दोनों एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं, उन्हें प्यार हो जाता है और आखिरकार वे शादी कर लेते हैं। शादी के कुछ समय बाद, पुलिस इंस्पेक्टर रंजीत कपूर (हैदर अली) सुषमा को चेतावनी देते हैं कि एक्सीडेंट से पहले कृष्णा असल में एक भाड़े का हत्यारा था, जिसे सुषमा को मारने का काम सौंपा गया था।

इंस्पेक्टर उसे आगाह करते हैं कि कृष्णा की याददाश्त कभी भी वापस आ सकती है। तो क्या उसकी याद्दाश्त वापस आ जाती है? क्या कृष्णा माधुरी के किरदार को मार डालता है? या फिर कहानी में कुछ और ही मोड़ है? इन सवालों के जवाब फिल्म में मिलेंगे।

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