'सौतन' का दर्द बयां करता है 48 साल पुराना गीत, 6 लाइनें सुनकर खूब रोए थे निर्देशक; Lata Mangeshkar ने दी आवाज
सौतन को लेकर अक्सर कड़वे शब्द ही मुंह में आते हैं, लेकिन 48 साल पहले लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने ...और पढ़ें
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लता मंगेशकर ने गाने में सौतन का दर्द किया बयां/ फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
सौतन के दर्द को बताते हुए जब इमोशनल हो गईं थीं लता मंगेशकर
मुखड़ा सुनकर बहने लगे थे निर्देशक राज खोसला के आंसू
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने किया था गाने को कंपोज
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। 8 दशक के करियर में सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए हैं, जिसमें से आज भी कई गाने लोगों की प्ले लिस्ट में शामिल हैं। उनकी मधुर आवाज कानों में पड़ते ही श्रोता एक अलग दुनिया में खो जाता है। स्वरकोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)के गाए पॉपुलर गानों में से एक गाना वो है, जिसमें एक सौतन के दर्द को सिंगर ने सॉन्ग में बखूबी व्यक्त किया है, जिसे सुनकर निर्देशक भी आंसू कंट्रोल नहीं कर पाए, यहां तक की सिंगर खुद भी काफी इमोशनल हो गईं।
लता मंगेशकर की आवाज में छलका दर्द
घर में जब पति किसी दूसरी महिला को शादी करके ले आता है, तो उसे सौतन कहकर बुरा भला कहा जाता है। हालांकि, लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar Songs) के जिस गाने का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहें हैं, उसमें एक सौतन के दर्द को बताया गया है। यह गाना 1978 में रिलीज हुई 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' (Main Tulsi Tere Aangan ki Song) फिल्म का टाइटल ट्रैक है, जिसमें नूतन और आशा पारेख (Asha Parekh) मुख्य भूमिका में नजर आए थे। लता मंगेशकर की आवाज में गाए गीत के बोल थे 'मैं तुलसी तेरे आंगन की'।
इस गाने को जब लता मंगेशकर ने गाया तो वह काफी इमोशनल हो गईं थीं। जब निर्देशक राज खोसला ने इसका मुखड़ा सुना तो उनके आंसू ही नहीं रुके। दरअसल, जब राज खोसला फिल्म मैं तुलसी तेरे आंगन बना रहे थे, तो उन्होंने म्यूजिक कंपोजर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को सिचुएशन समझाई और बताया कि पति दूसरी शादी करता है और पहली पत्नी के लिए सौतन ले आता है। हालांकि, दूसरी बीवी दहलीज लांघकर न तो घर के अंदर आ पाती है और न ही उसे उसका हक मिलता है। इस सिचुएशन पर तुलसी मां के पौधे को सेंटर में रखकर एक गाना बनाना है।
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गाने का मुखड़ा सुन भर आया था दिल
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने गाने पर काम करना शुरु किया और उन्होंने आनंद बख्शी संग मिलकर दो लाइनें लिखी और कंपोज की। वो दो लाइनें थीं, मैं तुलसी तेरे आंगन की, कोई नहीं मैं तेरे साजन की और फिर उन्होंने यह मुखड़ा राज खोसला को सुनाया। कोई नहीं मैं तेरे साजन की लाइन निर्देशक ने जैसे ही सुनी वह रो दिए। यह देखकर पहले तो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल काफी घबरा गए। उन्होंने निर्देशक से कहा कि अगर कोई गलती है तो वह सुधार देंगे। यह सुनकर अपने आंसू पोछते हुए कंपोजर जोड़ी की तारीफ की और उनके गाने को सबसे बेस्ट बताया।
Video Credit- Shemaroo
1978 में रिलीज मैं तुलसी तेरे आंगन की बात करें तो, इस फिल्म में नूतन के साथ विनोद खन्ना-आशा पारेख, विजय आनंद, देब मुखर्जी, जगदीश राज जैसे सितारे मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
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