Lata Mangeshkar की अंतिम विदाई में बजा था कभी न भूल पाने वाला गाना, 56 साल पहले खुद दी थी मधुर आवाज
लता मंगेशकर की अंतिम विदाई के पर उनका 56 साल पुराना एक ऐसा गीत बजा था, जो इतने सालों के बाद भी किसी के जहन से नहीं निकला है।

लता मंगेशकर की अंतिम विदाई पर बजा था कल्ट गीत/फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
लता मंगेशकर की अंतिम विदाई में बजा उनका ही गीत
56 साल से पहली ही लाइन सुन यादों में खो जाते हैं लोग
लता मंगेशकर के अलावा मोहम्मद रफी ने दी थी आवाज
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) जैसा म्यूजिक इंडस्ट्री में न तो कोई था, न कोई है और शायद न ही कभी होगा। जब उनकी आवाज कानों में पड़ती थी तो मानों शहद ही घुल जाता था। 8 दशक तक अपनी मधुर आवाज से समां बांधे रखने वाली सुर सम्राज्ञी का 6 फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया था।
क्या आपको पता है कि जब लता मंगेशकर को निधन के बाद अंतिम विदाई दी जा रही थी, तो उस समय स्वर कोकिला को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हीं का ही एक गीत बजाया गया था। कौन सा था वो गीत जिसे 56 साल बाद भी नहीं भूला पाए श्रोता, पढ़ें ये कहानी।
लता मंगेशकर की अंतिम विदाई में बजा था ये गीत
इंस्टाग्राम पेज करंट युग के मुताबिक, जब लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar Songs) का निधन हुआ था और उनको अंतिम विदाई दी जा रही थी, तो उसमें सुर सम्राज्ञी के 56 साल पहले रिलीज हुए गाने 'तुम मुझे यूं भुला न पाओगे' (Tum Mujhe Yun Bhula Na Paoge) है। ये गीत साल 1970 में रिलीज हुई फिल्म 'पगला कहीं का है', जिसमें शम्मी कपूर और आशा पारेख ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
56 साल पहले रिलीज हुए इस गीत के दो वर्जन हैं। पहला जो मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi)की आवाज में गाया गया है और दूसरा खुद लता मंगेशकर ने गाया था। सुर सम्राज्ञी की आवाज में ये गीत पुराने दिनो को याद करते हुए गाया गया है। यह गाना कभी न मिटने वाली यादों पर बेस्ड है। यह गाना आशा पारेख और शम्मी कपूर पर फिल्माया गया है।

हसरत जयपुरी ने लिखे थे गाने के लिरिक्स
लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के सबसे हिट ट्रैक्स में से एक इस गाने के लिरिक्स भारत के महान कवि हसरत जयपुरी ने लिखे थे और इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। फिल्म 'पगला कहीं का' में आशा पारेख-शम्मी कपूर के अलावा प्रेम चोपड़ा, हेलेन, मनमोहन कृष्णा, विजू खोटे ने अहम भूमिका निभाई थी।
क्या थी फिल्म की कहानी?
शक्ति सामंथा के निर्देशन में बनी फिल्म 'पगला कहीं का'की कहानी शम्मी कपूर के सुजीत के किरदार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। उसे छह साल की उम्र से मानसिक बीमारी होती है। एक बार जब वह अपने पिता अजीत से मिलने के लिए अस्पताल जाता है, तो उसकी मुसीबतें कम होने के बजाय बढ़ती जाती हैं और ऐसे ही कहानी आगे बढ़ती है।
