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Lata Mangeshkar का सबसे यादगार गीत, डायरेक्टर ने किया था रिजेक्ट; सदाबहार गाने के बोल कर देते हैं आंखें नम

Published: Wed, 23 Sep 2026 05:24 PM (IST)

स्वर कोकिला लता मंगेशकर का एक सदाबहार गीत उनके करियर का सबसे बड़ा गाना माना जाता है। हालांकि गाने के बनने के पीछे कहानी दिलचस्प है।

दिलचस्प है लता दीदी के इस गाने के बनने की कहानी

दिलचस्प है लता दीदी के इस गाने के बनने की कहानी

HighLights

  1. ये है लता मंगेशकर के करियर का सबसे बड़ा गीत

  2. निर्देशक राज खोसला ने गाने को किया था रिजेक्ट

  3. मनोज कुमार के कहने पर फिल्म में शामिल हुआ यह गीत

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपने पूरे करियर में इतने यादगार गीत दिए कि शायद जिनका रिकॉर्ड तोड़ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लता दीदी ने अपने करियर में कुछ गाने तो ऐसे गाए जो लोगों के दिलों में बस गए हैं।

आज हम आपको लता दीदी के एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उनके करियर का सबसे बड़ा गीत बना, तो वहीं इस गीत के बनने के पीछे की कहानी और भी दिलचस्प रही।

कौन सा है वह गीत?

दरअसल जिस गी की हम बात कर रहे हैं वह है भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे लोकप्रिय और कालजयी गाना 'लग जा गले' (Lag Ja Gale)। जी हां, साल 1964 में आई फिल्म फिल्म वो कौन थी के इस गाने का इतिहास क्या है, ये हम सभी को पता है। गाने की पॉपुलैरिटी आज कितनी है, इससे भी हम सभी वाकिफ हैं।

इस गाने को लगभग हर किसी ने कभी ना कभी और कहीं ना कहीं तो जरूर सुना है। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड हुआ ये गाना दीदी के करियर का सबसे बड़ा गीत माना जाता है। हालांकि इस गाने के पीछे के बनने की कहानी भी दिलचस्प रही है।

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ऐसे तैयार हुई गाने की धुन

दरअसल इस गाने का श्रेय तीन खास लोगों को जाता है, जिसमें पहला नाम है राजा मेहंदी अली खान (Raja Mehdi Ali Khan), दूसरा संगीतकार मदन मोहन (Madan Mohan) और तीसरा लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का। हाल ही में गीतकार समीर अंजान ने बताया कि उनका ये सबसे पसंदीदा गाना है।

कोमल नाहटा के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि सोचिए गीतकार की रचना कितनी शानदार है कि उन्होंने कैसे एक गाने को ऐसे लिखा कि जहां दो प्रेम करने वाले कितनी नाजुक स्थित में हैं, जो कह रहे हैं कि ये मुलाकात शायद आखिर हो।

लिखने वाले ने गीत शानदार तो लिखा ही था, तो वहीं मदन मोहन साहब ने इस गाने को फिर तैयार किया और फिर लता दीदी ने इसे गाया। अगर ये गाना किसी दूसरे कंपोजर के पास चला जाता तो गाने की धुन शायद कुछ और होती।

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पहले रिजेक्ट हुआ था यह गाना

दरअसल जब मदन मोहन ने यह गाना फिल्म के डायरेक्टर राज खोसला को सुनाया, तो उन्हें यह धुन बिल्कुल पसंद नहीं आई और उन्होंने इसे फिल्म में लेने से साफ मना कर दिया। राज खोसला का मानना था कि यह एक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म है और यह गाना कितना स्लो है।  

फिल्म की थीम के हिसाब से सही नहीं बैठ रहा है। मगर मनोज कुमार को यह भा गया और उन्होंने बिना कुछ सोचे-समझे साफ-साफ कह दिया कि अगर फिल्म में यह गाना नहीं होगा तो वह फिल्म ही नहीं करेंगे। मजबूरी में डायरेक्टर को भी गाना शामिल करना पड़ा।

बाद में जब लता दीदी ने यह गाना गाया तो मानो सबकी आंखें नम हो गईं। आज सालों बाद भी यह गीत हर किसी की प्लेलिस्ट में शामिल है।  

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