विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

शायरी से बना था गाना, 32 साल पहले Kumar Sanu ने सुनाया 'शराबी' के दिल का हाल; लोगों को मुंहजबानी रटी है लाइनें

Published: Thu, 24 Sep 2026 11:02 AM (IST)

कुमार सानू (Kumar Sanu) ने 32 साल पहले उनका एक ऐसा गाना आया था, जो एक शराबी पिता पर फिल्माया ...और पढ़ें

कुमार सानू की आवाज में ये गाना हुआ जबरदस्त हिट/ फोटो-इंस्टाग्राम

कुमार सानू की आवाज में ये गाना हुआ जबरदस्त हिट/ फोटो-इंस्टाग्राम

HighLights

  1. 32 साल बाद भी कुमार सानू का खूब सुना जाता है ये गाना

  2. एक शायर ने दो लाइनों से बना दिया था पूरा गाना

  3. महेश भट्ट से गाना बनाते हुए हो गई थी बड़ी भूल

एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। कुमार सानू (Kumar Sanu) 90 के दशक के वह सिंगर हैं, जिनके गाने आज भी फैंस के दिलों को एक अलग सा सुकून देते हैं। उन्होंने 26 अलग-अलग भाषाओं में अबतक 22 हजार से अधिक गाने गाए हैं।

वैसे तो कुमार सानू के लगभग सभी गाने हिट हैं, लेकिन 32 साल पहले दिग्गज सिंगर ने एक ऐसा गाना गाया था, जो एक शराबी पिता के दिल के हाल को बखूबी बयां करता है। खास बात यह है कि ये अमरगीत एक शायरी से बना था, लेकिन इसे बनाते वक्त महेश भट्ट से बहुत बड़ी भूल हो गई थी।

32 साल बाद भी लोगों को एक-एक लाइन याद है

कुमार सानू (Kumar Sanu Songs) के जिस गाने का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह साल 1995 में रिलीज हुई अजय देवगन (Ajay Devgn) स्टारर फिल्म नाजायज का है। गाने के लिरिक्स हैं, 'बरसात के मौसम में, तन्हाई के आलम में मैं घर से निकल आया, बोतल भी उठा लाया। अभी जिंदा हूं तो जी लेने दो, भरी बरसात में पी लेने दो।' इस गाने को कुमार सानू के साथ मिलकर रुप कुमार राठौर ने गाया था।

गाने में मकरंद देशपांडे और नसीरुद्दीन शाह को फीचर किया गया था। वैसे तो यह गाना एक पिता और नाजायज बेटे के रिश्ते पर बेस्ड है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि नसीरुद्दीन शाह ने गाने में शराबी की एक्टिंग में इस कदर जान फूंकी थी कि सेट पर हर किसी ने यही सोचा कि एक्टर एल्कोहल पीकर आए हैं। आज भी जब यह गाना फोन या टीवी पर लोग सुनते हैं, तो कुमार सानू की सुरीली आवाज बिल्कुल ही एक अलग दुनिया में उन्हें ले जाती है।

Screenshot 2026-09-24 105808

एक शायरी से तैयार किया गया था ब्लॉकबस्टर गाना

बरसात के मौसम के गाने को बनाने के पीछे का सबसे दिलचस्प किस्सा ये है कि महेश भट्ट और अनु मलिक जब लिरिसिस्ट और मशहूर शायर सुदेश फाकीर को सिचुएशन समझाते हुए बताया कि वह चाहते हैं कि गाने में एक शराबी नशे में अपने दर्द को बयां कर रहा है, तो सुदेश फाकीर ने तुरंत अपनी शायरी वाली डायरी से यह अल्फाज निकाले और उनसे कहा, "आज पैमाने हटा दो यारो, सारा मैखाना पिला दो यारो।" उनकी शायरी की इन दो लाइनों से धीरे-धीरे उन्होंने पूरा गाना बना दिया। जब ये गाना रिलीज हुआ और लोगों ने थिएटर में सुना तो वह बिना रोए नहीं निकल पाए।

महेश भट्ट से गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान एक बड़ी गलती भी हो गई थी। दरअसल, मकरंद देशपांडे की आवाज गाने में कुमार सानू बने थे, जबकि नसीरुद्दीन शाह के लिए रूप कुमार ने गाया था। गाने की लास्ट लाइन में कुछ गड़बड़ी हो गई और मकरंद के लिपसिंक के साथ रूप कुमार की आवाज को एडिट कर दिया गया। हालांकि, जब यह कल्ट क्लासिक सॉन्ग लोगों के सामने आया तो किसी ने इस बात को नोटिस भी नहीं किया। उन्होंने बस गाने के बोल एन्जॉय किए।

यह भी पढ़ें- 'बरेली में झुमका गिराने' वाला वो गीतकार... झेला बंटवारे का दर्द, Lata Mangeshkar को दिए सदाबहार हिट गाने

यह भी पढ़ें- Shreya Ghoshal के सुर, Sunidhi का स्वैग...5 सिंगरों ने गाया ये पार्टी एंथम; शादी-ब्याह में धूम मचाता है कल्ट गीत