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Kishore Kumar के बड़े भाई ने गाया सिनेमा का पहला रैप सॉन्ग, 4 शहरों और 28 स्टेशन के नाम पर बना था अनोखा गाना

Published: Thu, 01 Oct 2026 05:37 PM (IST)

किशोर कुमार के बड़े भाई और हिंदी सिनेमा के दादामुनि फिल्मों में पहला रैप लेकर आए। उन्होंने 58 साल पहले ...और पढ़ें

अशोक कुमार ने गाई थी बॉलीवुड में पहली रैप/ Photo- Instagram

अशोक कुमार ने गाई थी बॉलीवुड में पहली रैप/ Photo- Instagram

HighLights

  1. दादामुनि अशोक कुमार ने गाया था पहला रैप सॉन्ग

  2. 58 साल में कभी नहीं सुना होगा ऐसा सॉन्ग

  3. रेडियो पर बजने वाली फेमस कविता पर बना था गाना

एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में आपने अब तक अलग-अलग तरह के कई गाने सुने होंगे। स्लो से लेकर रोमांटिक, सैड से लेकर पैपी, हर तरह का गाना फैंस को यहां पर सुनने को मिल ही जाता है, लेकिन आज हम आपको हिंदी सिनेमा का उस अनोखे गाने में बता रहे हैं, जो 58 साल पहले आया था।

यह न सिर्फ भारतीय सिनेमा का पहला रैप सॉन्ग था, बल्कि इसमें एक साथ और एक ही लय में किशोर कुमार (Kishore Kumar) के बड़े भाई ने कम से कम चार शहरों और 28 रेलवे स्टेशन का जिक्र कर दिया था। गाने और फिल्म दोनों के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था। 

रैप अंदाज में गाया था दादामुनि ने गाना

हिंदी सिनेमा का पहला रैप सॉन्ग गाने वाले और बचपन की यादों को ताजा करने वाले सिंगर कोई और नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के दादामुनि अशोक कुमार हैं, जिनकी 1968 में रिलीज हुई फिल्म आशीर्वाद में एक अनोखा और हिंदी सिनेमा में इस तरह से फिल्माया गाना था। इस क्लासिक गीत के लिरिक्स थे 'रेल गाड़ी रेल गाड़ी छुक-छुक'। यह भारतीय सिनेमा का पहला रैप कहा जाता है। इस गाने को अशोक कुमार ने स्पोकन वर्ड्स में गाया था।

अशोक कुमार की आवाज में गाया ये पहला रैप गीत स्कूली बच्चों के खेल पर आधारित है, जिसमें बच्चे एक-दूसरे के पीछे खड़े हैं और रेलगाड़ी बनाते हैं। यह गाना दिग्गज अभिनेता ने पारंपरिक या लय में नहीं, बल्कि फास्ट बोलते हुए एक-एक वर्ड में गाया था, जो पूरा रैप स्टाइल था।

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28 गाने और 4 शहरों के नाम किए गए थे गाने में शामिल

अशोक कुमार के द्वारा गाए गए इस रैप सॉन्ग की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि इसमें 4 शहरों जैसे रायपुर, जयपुर, सोलापुर और कोल्हापुर को शामिल किया गया। गाने की लय और इसकी तेज रफ्तार को बनाए रखने के लिए इसमें सिर्फ शहरों के ही नहीं, बल्कि छुक-छुक और रुक-रुक के बीच 28 रेलवे स्टेशन का नाम भी शामिल किया गया था। मजेदार बात ये है कि गाने का टाइटल तो रेलगाड़ी था, लेकिन इसमें कहीं भी स्टेशन नहीं दिखाई दिया था।

साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म आशीर्वाद का ये लोकप्रिय गाना महान कवि हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय की कविता पर बना था। वह इस कविता को उस दौर में रेडियो स्टेशन पर सुनाया करते थे। फिल्म आशीर्वाद के निर्देशन की कमान हृषिकेश मुखर्जी ने संभाली थी। साल 1969 में इस अनोखे गाने और फिल्म आशीर्वाद के लिए अशोक कुमार को नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था।

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