मीराबाई के भजन से निकला Madhuri Dixit का 29 साल पुराना ये कल्ट गाना, कविता कृष्णमूर्ति की आवाज ने बनाया क्लासिक
माधुरी दीक्षित का एक गाना सदियों पुरानी कृष्ण भक्ति की रचना पर आधारित है। इसमें सूफी और भक्ति रंग का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई ऐसे गाने हैं जिनका रीमेक बनाकर उन्हें मॉर्डन तरीके से दूसरी फिल्मों में इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा कई बार इसे सीधे रीमेक न करके रिमिक्स या फिर नए दौर की धुनों, रैप के साथ जोड़कर बदला जाता है।
कृष्ण भक्ति पर बना गाना
आज हम आपको ऐसे ही एक गाने के बारे में बताने वाले हैं जिसकी रचना सदियों पुरानी है। इसे कृष्ण भक्ति में भगवान के प्रति अपना प्यार जाहिर करने के लिए भी गाया जाता है। हम बात कर रहे हैं साल 1997 में आई फिल्म 'कोयला' (Koyla) की जिसमें शाह रुख खान (Shah Rukh Khan) और माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) लीड रोल में नजर आए थे।
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इसका पॉपुलर गाना ‘सांसों की माला' (Saason Ki Mala) आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना की सालों पहले था। इसके बोल इंदीवर (Indeevar) ने लिखे थे और कविता कृष्णमूर्ति (Kavita Krishnamurthy) ने इसे अपनी आवाज से सजाया था। राजेश रोशन ने इसका संगीत दिया था।
नुसरत फतेह अली खान ने दिलाई पहचान
कोयला के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर राकेश रोशन थे। कहा तो ये तक जाता है कि सांसों की माला' को नुसरत फतेह अली खान ने सबसे पहले 1979 में ऋषि-कपूर और नीतू सिंह की शादी से जुड़े एक कार्यक्रम में गाया था। अपने अंदाज में इस गीत को गाकर उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया था। बाद में यह कलाम उनकी पहचान का हिस्सा बन गया।
हालांकि रेडिट पर मौजूद जानकारी के अनुसार तुफैल होशियारपुरी की एक रचना से भी इसके तार जुड़े हैं। बाद में लोक संगीत और मीराबाई के भजनों के साथ जोड़कर इसे बड़े स्तर पर गाया गया। इसे महान कव्वाल नुसरत फतेह अली खान ने जब गाया तो ये और भी लोकप्रिय हो गया है। इसके करीब 18 साल बाद इसे फिल्म कोयला में इस्तेमाल किया गया।
इस गाने को बॉलीवुड के सबसे रोमांटिक गीतों में गिना जाता है। इसकी सबसे दिलचस्प बात ये है कि इसमें सूफी और भक्ति रंग दोनों मिला हुआ है जो इस रोमांटिक गाने को अन्य सभी से अलग बनाता है।
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