रेडियो ने सिगरेट की लत के लिए बदले नियम, लाइव कॉन्सर्ट में गिराए जाते थे पर्दे; कौन हैं वो 'मल्लिका ए गजल'?
शास्त्रीय संगीत को नया आयाम देने वाली उस दिग्गज गायिका की कहानी आज हम आपको बता रहे हैं, जिनकी सिगरेट ...और पढ़ें

हिंदी सिनेमा की मल्लिका ए गजल की कहानी/फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
400 से अधिक गजलें, ठुमरी और दादरा गाए
ऑल इंडिया रेडियो ने उनके लिए धूम्रपान का नियम तोड़ा
'मल्लिका ए गजल' बनकर छाईं कौन हैं बेगम अख्तर?
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। क्या आप कभी सोच सकते हैं कि धुम्रपान को लेकर कोई भी नियम बदला जा सकता है? नहीं ना, लेकिन ऐसा हुआ है 'वो भी मल्लिका ए गजल' के लिए। फैजाबाद की गलियों से निकलकर महफिलो और फिर ऑल इंडिया रेडियो पर अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरने वाली और संगीत को ही अपने जीवन का आधार बनाने वाली कौन थी बेगम अख्तर, जिनकी खातिर रेडियो स्टेशन ने तोड़ा था अपना ही सबसे बड़ा नियम तोड़ डाला था।
बचपन में पिता ने कर दिया था त्याग
400 से अधिक गजलें ठुमरी और दादरा गाकर क्लासिकल म्यूजिक को एक नया आयाम देने वाली बेगम अख्तर(Begum Akhtar) का जन्म 7 अक्टूबर 1914 को फैजाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका असली नाम अख्तरी बाई फैजाबादी था, जो दुनियाभर में बेगम अख्तर के नाम से मशहूर हुई थीं। वह गजलों को कुछ इस कदर गाया करती थीं कि पूरी दुनिया उन्हें 'मल्लिका ए गजल' (Ghazals) कहकर पुकारती थी।
उनका जन्म असगर हुसैन के घर पर हुआ था, जो पेशे से एक वकील थे। बेगम अख्तर असगर की दूसरी पत्नी मुश्तारी की बेटी थीं। जब बेगम अख्तर बहुत छोटी थीं तो उनकी मां समेत दोनों बहनों को पिता ने घर से निकाल दिया था।

7 साल की उम्र में संगीत की तरफ बढ़ा रुझान
जिस उम्र में हम अपने सपनों को भी नहीं समझ पाते, उस समय महज सात साल की उम्र में बेगम अख्तर संगीत की तरफ खिंची चली गईं। एक बार चंद्राबाई अपने म्यूजिक ग्रुप के साथ बेगम अख्तर के शहर में टूर करने आई थीं। वहीं पर मल्लिका ए गजल ने जब उनकी आवाज सुनी तो बस संगीत की तरफ खिंची चली गईं। बाद में अंकल के कहने पर उन्हें पटना के महान सारंगी वादक उस्ताद इमदाद खान के पास भेजा गया। इसके बाद उन्होंने पटियाला के अता मोहम्मद खान के अंडर में संगीत सीखा।
बाद में वह कोलकाता आईं और उन्होंने मोहम्मद खान, किराना घराना के अब्दुल वहीद खान जैसे क्लासिकल म्यूजिक के महारथियों से शास्त्रीय संगीत सीखा। बाद में वह उस्ताद झंडे खान की शिष्या बनीं। उन्होंने अपना पहला पब्लिक परफॉर्मेंस 15 साल की उम्र में दिया था। जब उन्होंने 1934 को नेपाल-बिहार भूकंप पीड़ितो की सहायता के लिए आयोजित कॉन्सर्ट में गाना गाया तो सरोजिनी नायडू ने उनकी खूब सराहना की। यहीं से उनका संगीत की दुनिया में सफर शुरु हुआ और वह एक-एक के बाद एक हिट गजलें देती चली गईं।

रेडियो ने बेगम अख्तर के लिए बदला था नियम
धुम्रपान जहां वर्जित है वहां आसपास के एरिये में भी स्मोकिंग करने से लोग घबराते हैं, लेकिन कहा जाता है कि बेगम अख्तर को सिगरेट पीने की गहरी लत थी। जिस समय पर ऑल इंडिया रेडियो के परिसर में भी किसी को स्मोक करने की इजाजत नहीं थी, उस समय बेगम अख्तर एक ऐसी सिंगर थीं, जिन्हें स्टूडियो के अंदर बैठकर सिगरेट पीने की छूट थी।
कहा जाता है कि एक बार लाइव कॉन्सर्ट के दौरान जब बेगम अख्तर को सिगरेट पीने की तलब लगी थी, तो स्टेज के पर्दे गिरा दिए गए थे। ताकि वह आराम से सिगरेट पी ले और फिर परफॉर्म करे। हैरानी की बात ये है कि लोग भी पूरे धैर्य के साथ उनका गाना सुनने के लिए उनकी सिगरेट खत्म होने का इंतजार करते थे। बेगम अख्तर हिंदी सिनेमा की वो गायिका थीं, जिनके गानों के लिए लोग दूर-दूर से आते थे।
