विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मर्दो की आवाज में गाने वाली इकलौती फीमेल सिंगर, Doordarshan पर हुई थीं हिट, मोहम्मद रफी की करती थीं नकल

Published: Wed, 28 Oct 2026 03:15 PM (IST)

90 के दशक में दूरदर्शन ने एक ऐसी महिला सिंगर को पहचान दिलाई थी, जो फीमेल और वॉइस मेल दोनों ...और पढ़ें

फीमेल और वॉइस दोनों आवाजों में गाती हैं ये सिंगर/ फोटो- फेसबुक

फीमेल और वॉइस दोनों आवाजों में गाती हैं ये सिंगर/ फोटो- फेसबुक

HighLights

  1. मोहम्मद रफी की जबरा फैन थीं इटावा की ये सिंगर

  2. दूरदर्शन पर रंगारंग कार्यक्रम ने दिलाई थी पहचान

  3. मेल और फीमेल दोनों ही आवाजों में गाती थीं सिगर

एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi), किशोर कुमार , लता मंगेशकर और दिग्गज सिंगर शमशाद बेगम जिस तरह के सुर पकड़ते थे, उन्हें आज भी कॉपी करना बिल्कुल आसान नहीं है। हालांकि, 80 और 90 के दशक में दूरदर्शन से एक ऐसी फीमेल सिंगर को पहचान मिली, जिन्होंने लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) और मोहम्मद रफी के गानों के एक्सटेंडेड वर्जन गाए।

ये हिंदी सिनेमा की इकलौती ऐसी सिंगर थीं, जो महिलाओं और पुरुष दोनों की आवाज में गाने गाती थी। कौन सी थीं वह सिंगर, जिनका दूरदर्शन पर शो हुआ था जबरदस्त पॉपुलर,पढ़ें उनसे जुड़ा ये मशहूर किस्सा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने किया था सम्मानित

मर्दों और महिलाओं की आवाज में गाने वाली जिस टैलेंटेड सिंगर के बारे में हम आपको बता रहे हैं, उनका नाम मिलन सिंह है। वह 90 के दशक की लोकप्रिय और उन अनोखी गायिकाओं में से एक हैं, जिनके पास मेल और फीमेल दोनों आवाजों में गाने का गजब का टैलेंट था। मिलन सिंह ने अपने करियर की शुरुआत जालंधर दूरदर्शन से की थी। 1989 में जब नए साल में दूरदर्शन पर रंगारंग कार्यक्रम में उनका पहला गाना आया, तो वह रातों-रात फेमस हो गईं। बड़ी ही सरलता से सिंगर को मेल और फीमेल की आवाज में गाता देख हर कोई हैरान रह गया था।

यू.पी इटावा की रहने वाली मिलन सिंह ने हिंदी और पंजाबी गानों के 90 के दौर में एक अलग पहचान बनाई थी। उन्हें उनकी इस अनोखी प्रतिभा के लिए साल 1995 में यूपी सरकार ने यश भारती सम्मान भी दिया था। इटावा में एक सड़क का नाम मिलन सिंह ही रखा गया है।

Untitled design - 2026-10-28T150749.573

इटावा की मिलन सिंह मोहम्मद रफी की बड़ी फैंन थीं

उत्तर प्रदेश के इटावा से ताल्लुक रखने वाली मिलन सिंह ने इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया था। स्पोर्ट्स की तरफ भी उनका झुकाव था, लेकिन वह मोहम्मद रफी की इतनी बड़ी फैन थीं कि उन्होंने खुद के लिए सिंगिंग का फील्ड चुना। 90 के दशक की मशहूर सिंगर मिलन सिंह ने हिंद युम नामक वेबसाइड से 2011 में बातचीत करते हुए बताया था कि जब वह महज 11 साल की थी, तभी उन्हें अपने बारे में ये अंदाजा लग चुका था कि वह मेल और फीमेल दोनों आवाजों में गा सकती हैं।

वैसे तो उन्होंने 60 और 70 के दशक के कई सिंगर्स की आवाज में गाने गाए, लेकिन लता मंगेशकर और रफी साहब के डुएट गानों पर रंगारंग कार्यक्रम में उन्होंने काफी परफॉर्म किया है। मिलन सिंह को लता दीदी और रफी साहब के जो डुएट सबसे ज्यादा पसंद थे उन गानों में 'कुहू कुहू बोले कोयलिया', 'ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं', 'पत्ता पत्ता बूटा बूटा', 'वो हैं जरा खफा खफा।' जब मिलन सिंह को रफी साहब से मिलने का मौका मिला था, तो वह उनके लिए सपने का पूरा होने जैसा था।

ये हैं मिलन सिंह के फेमस गाने

मिलन सिंह की आवाज में गाना रात के अंधेरे में, बाहों के घेरे में गीत रेडियो पर काफी लोकप्रिय हुआ था। हालांकि, ये गाना भी सिंगर को किस्मत से मिला था। दरअसल, गाने को एक नामी गायिका गाने वाली थीं, लेकिन उनके और निर्माते का बीच कुछ अनबन हो गई। जिसके बाद ये गीत मिलन सिंह को मिल गया। बॉलीवुड में ये गाना बहुत पॉपुलर नहीं हुआ, लेकिन रेडियो पर काफी सुना जाता था।

इसके अलावा मिलन सिंह के लोकप्रिय गानों में 'अक्ख दे इशारे नाल गल कर गई' और 'कुड़ी पटोले वरगी' है, जो आज भी कई पार्टीज में आपने काफी सुना होगा। खुद सिंगर ने इंटरव्यू में ये कहा था कि वह लोकर और कम बजट की फिल्मों के लिए गाने गाती हैं। उनके पास बनावटी बनकर गाने का टैलेंट नहीं है, इसलिए कमर्शियल सिनेमा में उनका सिक्का नहीं चला।

यह भी पढ़ें- 'मैंने कव्वालियां नहीं...' Ramayana के गानों की आदिपुरुष से तुलना पर बोले मनोज मुंतशिर, लोगों को दे डाली नसीहत

यह भी पढ़ें- 'चंदू चैंपियन' के बाद अब 'सैनिक' बनेंगे कार्तिक आर्यन? Operation Sindoor में निभाएंगे लीड रोल