शापित है 70s की ये गजल... जिसने गाया और लिखा उनकी हुई मौत, बड़े-बड़े सिंगर गुनगुनाने से आज भी खाते हैं खौफ
70 के दशक में एक ऐसी गजल ने धूम मचाई थी, जिसको लिखने वाले लिरिसिस्ट ने ही उसे मनहूस कह ...और पढ़ें

70s की ये फेमस गजल मानी गई शापित/ फोटो- सोशल मीडिया
HighLights
70 के दशक की मशहूर गजल जब बन गई शापित
जिसने भी गाई गजल उसका कुछ ही महीनों में हुआ निधन
दिग्गज सिंगर्स नहीं लगाते हैं फेमस गजल को हाथ
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। गजल सुनना किसे नहीं पसंद, जब कानों में जगजीत सिंह की आवाज पड़ती है, तो एक अलग समा बंध जाता है। क्या आप सोच सकते हैं कि दिल को सुकून देनी वाली गजलें कईयों की मौत का कारण भी बन सकती है?
हालांकि, ऐसा हुआ है। 70 के दशक में एक ऐसी गजल लिखी थी, जिसे गाने वालों से लेकर लिखने वाले और इससे जुड़े हर शख्स की मौत हो गई। कौन सी थी वह गजल जिस गुनगुनाने से बड़े-बड़े सिंगर्स को लगता था डर, नीचे डिटेल में पढ़ें मनहूस गजल का ये किस्सा।
पटियाला घराने के उस्ताद अमानत अली ने गाई थी गजल
जिस गजल को गुनगुनाने से भी सबकी रूह कांप जाती थी उसे इब्ने-इंशा ने लिखा था। पंजाब के फिलौरी में पैदा हुए शेर मोहम्मद खान, जिन्हें दुनिया इब्ने-इंशा के नाम से जानती है, वह बंटवारे के दौरान पाकिस्तान में जा बसे। गुलाम अली-जगजीत सिंह की आवाज में गाई गजल कल चौहदवीं की रात थी के लिरिक्स भी उन्होंने ही लिखी थी।
फेसबुक पेज हिंदी कविता के मुताबिक, 70 के दशक में लिरिसिस्ट इंशा जी ने एक गजल लिखी, जिसकी लाइनें थी 'इंशा जी उठो अब कूच करो'। 1974 में पटियाला घराने के उस्ताद अमानत अली ने इसे पाकिस्तान टेलीविजन पर गाया। जिसने भी उनकी आवाज में ये गजल सुनी वह उनका दीवाना हो गया। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद महज 52 साल की कम उम्र में सिंगर का निधन हो गया।

शायर ने खुद कह दिया था गजल को मनहूस
इंशा जी उठो अब कूच करो को लिखने वाले कवि इब्ना इंशा चार साल बाद 1978 में कैंसर से ग्रस्त हो गए और लंदन के एक अस्पताल में उनका इलाज चला। अपने आखिरी लैटर में इँशा ने अमानत अली को याद करते हुए लिखा, ये मनहूस गजल कितनों की जान लेगी। अगले ही दिन उनका इंतकाल हो गया।
हालांकि, ये मौत का सफर यही नहीं रुका। अमानत अली के बेटे असद अमानत अली ने कॉन्सर्ट में ये गजल गाई और कुछ ही महीनों में उनका भी निधन हो गया। उनका निधन भी उस उम्र में ठीक वैसे ही हुआ, जैसे उनके वालिद अमानत अली का हुआ था।
शफकत अली ने गजल को नहीं लगाया हाथ
शफकत अली ने खुद एक इंटरव्यू में ये कहा था कि उनके बड़े भाई अमजद अली ने भी इंशा जी उठो अब कूच करो गाया और इसके प्रोड्यूसर भी अब इस दुनिया में नहीं रहे। आज के दौर में शफकत अली दुनियाभर में अपने परिवार की म्यूजिक लेगेसी को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन इस गजल को वह हाथ भी नहीं लगाते।
पाकिस्तानी सिंगर और सॉन्ग राइटर शफकत अली का कहना है कि वह अंधविश्वासी नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार ने सिंगर से ये गुजारिश की है कि वह कभी भी इस गजल को हाथ नहीं लगाए। सिर्फ शफकत ही नहीं बड़े-बड़े सिंगर 50 साल बाद भी इस गजल को गाने से डरते हैं।
