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बंगाल में रिकॉर्ड 92.8 प्रतिशत मतदान के पीछे का गणित, 90.8 लाख नाम हटने से बदला समीकरण

Published: Fri, 24 Apr 2026 01:55 PM (IST)

बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92.89% मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाता सूची से 90.8 लाख नाम हटाए जाने के कारण बढ़ा हुआ दिख रहा है।

बंगाल में रिकार्ड  प्रतिशत मतदान के पीछे का गणित (फाइल फोटो)

बंगाल में रिकार्ड प्रतिशत मतदान के पीछे का गणित (फाइल फोटो)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92.89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो 2021 के मुकाबले 10.5 प्रतिशत ज्यादा है। यह आंकड़ा लोकतंत्र की बड़ी जीत के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी वोटर लिस्ट से 90.8 लाख नाम हटाए जाने से जुड़ी है।

चुनाव आयोग के आदेश पर बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया। इसका मकसद मृत, डुप्लीकेट, अवैध मतदाताओं और राज्य से बाहर जा चुके लोगों के नाम हटाना था। इस प्रक्रिया में करीब 12 प्रतिशत यानी 90.8 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इसके बाद कुल मतदाता आधार घटकर 6.75 करोड़ रह गया।

ऐसे बदला गणित

एसआईआर के बाद पहले चरण में कुल मतदाता 3.61 करोड़ बचे। इसमें से 3.35 करोड़ वोट पड़े। इसी वजह से मतदान प्रतिशत 92.8 प्रतिशत पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वोटर बेस घटने से प्रतिशत बढ़-चढ़कर दिख रहा है।

राजनीतिक मायने

इस आंकड़े को भाजपा और टीएमसी दोनों अपने-अपने तरीके से पेश कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'तृणमूल के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का सूरज डूब गया है।" उन्होंने इसे सत्ता परिवर्तन का संकेत बताया। वहीं टीएमसी का आरोप है कि एसआइआर के जरिए मुस्लिम बहुल इलाकों में जान-बूझकर नाम काटे गए।

इन जिलों में सबसे ज्यादा असर

  • मुर्शिदाबाद: 66 प्रतिशत मुस्लिम आबादी। 2021 में टीएमसी ने इस जिले 22 में से 20 सीटें जीतीं। यहां बड़ी संख्या में नाम कटे हैँ।
  • मालदा: 51 प्रतिशत मुस्लिम आबादी। 12 में से 8 सीटें टीएमसी ने जीती।
  • उत्तर और दक्षिण 24 परगना: 26 और 36 प्रतिशत मुस्लिम आबादी। 64 में से 57 सीटें टीएमसी ने जीती थीं।

इन चार जिलों में ही करीब 12.2 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

बीजेपी की सीटों पर भी असर

कूचबिहार की दिनहाटा सीट बीजेपी ने जीती थी। यहां 10,000 से ज्यादा नाम कटे हैं। पुरुलिया की बलरामपुर और पूर्व मेदिनीपुर की मयना सीट पर भी ऐसा ही हाल है।

नतीजे पर असर

2021 में टीएमसी को बीजेपी से 9.87 प्रतिशत ज्यादा वोट मिले थे। इस बार कुल 90.8 लाख नाम हटाए गए हैं, जो टीएमसी की पिछली जीत के अंतर से थोड़ा ज्यादा है। टीएमसी ने 2021 में जीती 82.7 प्रतिशत सीटों पर वोटर लिस्ट कटी है। इनमें पश्चिम बर्दवान और दक्षिण दिनाजपुर जैसी कम अंतर से जीती सीटें भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नतीजा इस बात पर टिकेगा कि किस समुदाय के कितने नाम किस इलाके में कटे हैं। टीएमसी ने इसी बात को लेकर सवाल उठाए हैं। वोटर लिस्ट में कटौती का नुकसान दोनों दलों को हो सकता है, जिससे नतीजे और अनिश्चित हो गए हैं।

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