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MP Polls 2023: 'शिव' भक्त ही बने रहना चाहती है बुधनी, 'हनुमान' नहीं दिखा पा रहे करिश्मा

मध्य प्रदेश की बुधनी सीट से मुख्यमंत्री शिवराज ¨सह चौहान को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतार है तो कांग्रेस ने धारावाहिक रामायण- दो में हनुमानजी जी की भूमिका निभाने वाले विक्रम मस्ताल को। शाहगंज के महेंद्र शर्मा कहते हैं कि शाहगंज डोबी बकतरा बुधनी रेहटी भेरूंदा में सीएम राइज स्कूल खुल रहे हैं। इससे आने वाली पीढ़ी को अच्छी शिक्षा मिलेगी।

By Jagran NewsEdited By: Anurag GuptaPublished: Wed, 08 Nov 2023 06:06 PM (IST)Updated: Wed, 08 Nov 2023 06:06 PM (IST)
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (फाइल फोटो)

धनंजय प्रताप सिंह, बुधनी। मध्य प्रदेश की बुधनी सीट से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतार है तो कांग्रेस ने धारावाहिक रामायण- दो में हनुमानजी जी की भूमिका निभाने वाले विक्रम मस्ताल को। कहने को यह बहुचर्चित सीट पर है, मगर मुकाबला ठंडा है। बुधनी के मतदाता 'शिव' भक्त ही बने रहना चाहते हैं। वे शिवराज सिंह चौहान को पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। 

खुद यहां के मतदाता दावा करते हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ जिस छिंदवाड़ा के विकास मॉडल की बात करते हैं, बुधनी के सामने वह फीका है। यहां छह सीएम राइज स्कूल हैं और मेडिकल कॉलेज बन रहा है। सड़कें शानदार हैं। रेलवे लाइन भी आ रही है। नर्मदा पर पहले एक पुल था, अब छह हैं। स्थानीय लोग विकास कार्यों की सूची इस फर्राटे से गिनाते हैं, जैसे स्वयं ही चुनाव लड़ रहे हों।

शिवराज नामांकन पत्र जमा करने के बाद क्षेत्र में नहीं आए। उनकी पत्नी साधना सिंह और बेटे कार्तिकेय प्रचार कर रहे हैं, लेकिन बुधनी के घर-घर में एक बोर्ड लगा है, जिसमें लिखा है- हम हैं शिवराज भैया का परिवार। यह संकेत दे रहा है कि शिवराज सिंह का चुनाव जनता खुद ही लड़ रही है। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग बड़े गर्व से बताते हैं कि चुनाव प्रचार के लिए चंदा भी हम लोग ही देते हैं। 

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कैसा है बुधनी विधानसभा क्षेत्र

एक तरफ नर्मदा की लहरें, दूसरी तरफ विंध्याचल पर्वत श्रृंखला, लगभग 110 किलोमीटर तक सड़क किनारे बसा बुधनी विधानसभा क्षेत्र है। इसमें चार नगर परिषद बुधनी, शाहगंज, भेरूंदा और रेहटी शामिल हैं। नर्मदापुरम जाने वाले मार्ग के बाएं तरफ बुधनी और शाहगंज है तो दाईं ओर भेरूंदा और रेहटी है। यहीं है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पैतृक गांव जैत। खेती, परंपरागत व्यवसाय और बाजारों के अलावा केंद्रीय शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयों के अलावा मेडिकल कॉलेज और छह सीएम राइज स्कूल। 

लगभग तीन दशक से चौहान का क्षेत्र से जुड़ाव मतदाताओं के लिए भी सुकून भरा है। बुधनी आए तो अधिकांश समय गांव और खेतों में गुजर गया। इन दिनों बुधनी क्षेत्र में बासमती धान की फसल काटने का काम चल रहा है। जैत से गोपालपुर तक लगभग 110 किमी के सफर में कई बाजार और प्रमुख चौराहों से लेकर व्यावसायिक केंद्रों तक जब हम लोगों से मिले क्षेत्र का लगभग हर दूसरा मतदाता खुद को शिवराज से जुड़ा बताने में संकोच नहीं करता था। 

शाहगंज के महेंद्र शर्मा कहते हैं कि शाहगंज, डोबी, बकतरा, बुधनी, रेहटी, भेरूंदा में सीएम राइज स्कूल खुल रहे हैं। इससे आने वाली पीढ़ी को अच्छी शिक्षा मिलेगी। पहले हमारे यहां बिजली, पानी, नाली, खेत में सिंचाई के साधन नहीं थे, अब मिले तो यहां का किसान तीन फसल ले रहे हैं। ये सब शिवराज ने दिया। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि यहां की ज्यादातर समय बसें खाली चलती हैं, क्योंकि हर घर में गाड़ी है। एक परिवार में छह लोग हैं तो छह बाइक हैं।

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'बहन अब भतीजे के लिए केले-सेवफल लेकर आती है'

केशु राम तेली कहते हैं कि अब मेरी बहन आती है तो अपने भतीजे-भतीजी के लिए केले-सेवफल लेकर आती है। पहले वह सूखी (खाली हाथ) आती थी। यह सब शिवराज की लाडली बहना से मिल रहे पैसे से आया बदलाव है। लाडली बहना के लिए हमारा भैया 1250 रुपये भेज रहा है तो बहनों का जीवन बदल गया है। 

'क्रेडिट कार्ड ने हमें साहूकारों से मुक्ति दिला दी'

विनीत सिंह राजपूत कहते हैं कि दिग्विजय सिंह के जमाने में हमारे क्षेत्र में मात्र तीन ट्रांसफार्मर थे, अब 33 हैं। तीन लाख रुपये के किसान क्रेडिट कार्ड ने हमें साहूकारों से मुक्ति दिला दी। 

नरेश त्रिवेदी कहते हैं कि पिछली बार भी शिवराज विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में प्रचार के लिए नहीं आए थे। हम उन्हें यहां आने के लिए परेशान भी नहीं करते हैं। वह पूरा प्रदेश संभाल रहे हैं और हम उन्हें पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाह रहे हैं। 

'हमारा भाई शिवराज सिंह चौहान' 

लता बाई नामक महिला का कहना है कि हमारा भाई पैसा (लाडली बहना की राशि) भेज रहा है, हमें तो उस पर ही भरोसा है। अब किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती है। नाती-पोते भी मांगे तो हम उनको भी दे देते हैं।

सिया बाई का कहना है कि हमें तो पेंशन में कम पैसे मिलते थे, लेकिन शिवराज भैया ने लाडली बहना की योजना बनाई तो जून से हमें 1250 रुपये और मिलने लगे। पेंशन के एक हजार आते हैं। गरीब आदमी के जीवनयापन के लिए बहुत बड़ी मदद है ये। भगवान उन्हें बनाए रखे। 


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