नई दिल्ली, [जागरण स्‍पेशल]। सात चरणों में बंटा 17वां आम चुनाव छह मई को पांचवां चरण पूर्ण करेगा। सात राज्यों की 51 सीटों पर वोट पड़ेंगे। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग सीट पर तीन चरणों में मतदान हो रहा है, कल तीसरा चरण पूरा होगा। 51 नई सीटों में इसे भी शामिल करने पर कुल 52 सीटें हो जाती हैं। जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में भी वोट पड़ेंगे। क्षेत्रफल के मामले में यह देश का सबसे बड़ा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है।

पांचवें चरण में कई दिग्गजों के भाग्य का फैसला हो जाएगा। इनमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांगे्रस अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्रियों स्मृति ईरानी, जयंत सिन्हा, अर्जुनराम मेघवाल, राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़, साध्वी निरंजन ज्योति और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद जैसे महारथी शामिल हैं। छठवें और सातवें चरण का मतदान क्रमश: 12 और 19 मई को संपन्न होगा। 23 मई को नतीजे आ जाएंगे।

उत्तर प्रदेश: नजर यूपी के महारथियों पर
उत्तर प्रदेश में पांचवें चरण का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अमेठी, रायबरेली, लखनऊ जैसी बड़ी और बेहद चर्चित वीआइपी सीटों सहित 14 सीटों पर मतदान होगा। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और जितिन प्रसाद जैसे दिग्गजों के सियासी भविष्य का फैसला होगा। सबसे दिलचस्प मुकाबला अमेठी सीट पर होगा- राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यह पुश्तैनी सीट है और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी उन्हें सीधी टक्कर दे रही हैं। 2014 के आम चुनाव में भी यह मुकाबला रोचक बन बैठा था। सपा-बसपा गठबंधन ने कांगे्रस के समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। राहुल की मदद के लिए उनकी बहन प्रियंका वाड्रा दिन-रात एक किए हैं। राहुल चौथी बार संसद में पहुंचने के लिए यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। गांधी परिवार की परंपरागत रायबरेली सीट से संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी पांचवीं बार मैदान में हैं। सपा-बसपा गठबंधन सोनिया के समर्थन में वाक ओवर दे चुका है जबकि भाजपा द्वारा कांग्रेस के बागी दिनेश प्रताप सिंह को उतार कर सोनिया की राह रोकने की कोशिश की गई है।

लखनऊ की सीट पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह फिर मैदान में हैं। उन्हें टक्कर देने को भाजपा के बागी शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा सपा-बसपा गठबंधन उम्मीदवार बनकर लड़ रही हैं, वहीं कांग्रेस ने बहुचर्चित आचार्य प्रमोद कृष्णम् को टिकट दिया है। यहां कुछ उलटबांसियां भी हैं। पटना से कांग्रेस प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा ने पत्नी पूनम के नामांकन जुलूस में शामिल होकर कांग्रेस की उलझन बढ़ा दी है। दूसरी ओर राजनाथ ने अस्पताल में भर्ती सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव से मिलकर गठबंधन को दुविधा में डाल दिया है।

धौरहरा संसदीय क्षेत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद की राह आसान नहीं दिखती है। सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी अरशद अहमद सिद्दीकी और भाजपा की रेखा वर्मा से तिकोने मुकाबले में उलझे कांग्रेस के जितिन प्रसाद को गत चुनाव में रेखा वर्मा शिकस्त दे चुकी हैं। मुसलमानों के रुझान पर टिकी धौरहरा की जंग रोचक होगी।

राम जन्मभूमि के कारण महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली फैजाबाद संसदीय सीट पर भाजपा ने सांसद लल्लू सिंह को फिर आगे किया है जबकि गठबंधन से सपा के आनंदसेन यादव मैदान में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. निर्मल खत्री को वर्ष 2009 का इतिहास दोहराने की उम्मीद है, जब वह चुनाव जीत गए थे।

सीतापुर लोकसभा सीट पर गठबंधन से बसपा प्रत्याशी नकुल दुबे और भाजपा के राजेश वर्मा के अलावा कांग्रेस की केसरजहां मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं।

बुंदेलखंड की बांदा-चित्रकूट सीट पर भाजपा के बागी और इलाहाबाद से सांसद श्यामाचरण गुप्ता गठबंधन उम्मीदवार हैं। भाजपा ने यहां के सांसद भैरो प्रसाद मिश्र को बदल आरके पटेल को आजमाया है। कांग्रेस ने दस्यु ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल को मैदान में उतारा है।

फतेहपुर में केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की मुश्किलें गठबंधन के उम्मीदवार सुखदेव प्रसाद के साथ कांग्रेस के राकेश सचान भी बढ़ा रहे हैं।

कौशांबी सीट भाजपा के विनोद सोनकर को गठबंधन उम्मीदवार इंद्रजीत सरोज व कांग्रेस के गिरीश पासी के अलावा रघुराज प्रताप उर्फ राजा भैया की पार्टी से प्रत्याशी शैलेंद्र चतुष्कोणिय लड़ाई में फंसाने की कोशिश में हैं।

जयपुर: मैदान में दो केंद्रीय मंत्री
राजस्थान में 25 में से 12 सीटों पर सोमवार को वोट डाले जाएंगे। 13 सीटों पर मतदान पहले ही संपन्न हो चुका है। मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों, कांग्रेस के एक राष्ट्रीय सचिव, चुनाव से ठीक पहले एनडीए में शामिल हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल व हरियाणा के महंतों के भाग्य का फैसला होगा। दौसा सीट प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट है जहां भाजपा और कांग्रेस ने महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। वहीं भरतपुर और अलवर दो सीटों पर बसपा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना रखा है।

जाट बहुल सीटों पर मुकाबला रोचक
सोमवार को जिन दिग्गजों के भाग्य का फैसला होगा उनमें केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हैं। वह बीकानेर संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के मदन गोपाल मेघवाल से है। दोनों रिश्ते में मौसेरे भाई हैं। जयपुर ग्रामीण सीट से केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस के टिकट पर पूर्व एथलीट और विधायक कृष्ण पूनिया मैदान में हैं। लिहाजा मुकाबला दिलचस्प बन गया है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और राहुल गांधी के करीबी जितेंद्र सिंह अलवर सीट पर एक बार फिर अपना भाग्य अजमा रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के बाबा बालकनाथ से है। बालकनाथ हरियाणा के रोहतक स्थित मस्तनाथ मठ के महंत हैं। सीकर सीट से रोहतक निवासी संत सुमेधानंद सरस्वती को भाजपा ने एक बार फिर मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के जाट नेता सुभाष महरिया से है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद एनडीए में शामिल होने वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल नागौर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

भाजपा ने अपने वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी का टिकट काटकर बेनीवाल के लिए यह सीट समझौते में छोड़ी है। बेनीवाल का मुकाबला दिग्गज जाट नेता स्व. नाथूराम मिर्धा की पौत्री ज्योति मिर्धा से है। श्रीगंगानगर सीट पर भाजपा के निहालचंद मेघवाल और कांग्रेस के भरत मेघवाल के बीच टक्कर है। वहीं करौली-धौलपुर में भाजपा ने मनोज राजोरिया को फिर मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने उनके सामने संजय जाटव को टिकट दिया है। दौसा से भाजपा ने जसकौर मीणा को मैदान में उतारा है।

वहीं कांग्रेस ने सविता मीणा को टिकट दिया है। झुझुनूं सीट पर कांग्रेस ने श्रवण कुमार और भाजपा ने नरेंद्र खीचड़ को टिकट दिया है। भाजपा ने अपनी वर्तमान सांसद संतोष अहलावत का टिकट काटकर खीचड़ पर भरोसा जताया है। भरतपुर सीट से कांग्रेस ने अभिजीत जाटव और भाजपा ने रंजीता कोली, जयपुर शहर से कांग्रेस ने ज्योति खंडेलवाल व भाजपा ने रामचरण बोहरा को प्रत्याशी बनाया है। बोहरा वर्तमान में सांसद हैं। जाट बहुल आधा दर्जन सीटों पर मुकाबला काफी रोचक नजर आ रहा है।

मध्य प्रदेश: भाजपा के लिए चुनौती
पांचवे चरण के चुनाव में मध्य प्रदेश की सात सीटों पर सोमवार को मतदान होगा। 2014 में इन सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव के बाद समीकरण बदल गए हैं।

टीकमगढ़
भाजपा से यहां केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार मैदान में हैं तो कांग्रेस ने नए चेहरे किरण अहिरवार पर दांव लगाया है। पूर्व भाजपा विधायक आरडी प्रजापति समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार हैं।

दमोह
यहां भाजपा से सांसद प्रहलाद पटेल, कांग्रेस से प्रताप सिंह लोधी, बसपा से जितेंद्र खरे और भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के मान सिंह लोधी मैदान में हैं। यहां 1989 के बाद से कांग्रेस नहीं जीती है।

खजुराहो
यहां से कांग्रेस ने छतरपुर राजघराने की महारानी कविता सिंह नातीराजा राजे को चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े विष्णुदत्त शर्मा को मैदान में उतारा है। दस्यु सरगना ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल सपा के टिकट पर यहां से मैदान में हैं।

सतना
भाजपा ने वर्तमान सांसद गणेश सिंह को फिर मौका दिया है। मुकाबला कांग्रेस के राजाराम त्रिपाठी से है। बसपा ने अच्छेलाल कुशवाह को मैदान में उतारा है। 1998 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है।

रीवा
यहां भाजपा के सांसद जनार्दन मिश्रा का मुकाबला कांग्रेस के पूर्व सांसद स्व. सुंदरलाल तिवारी के पुत्र सिद्धार्थ तिवारी से है।

होशंगाबाद
भाजपा ने अपने वर्तमान सांसद राव उदय प्रताप सिंह को फिर मैदान में उतारा है। मुकाबला कांग्रेस के शैलेन्द्र दीवान से है। बसपा ने रिटायर्ड डीआइजी एमपी चौधरी को मैदान में उतारा है।

बैतूल
यहां 1996 से भाजपा का कब्जा है। भाजपा के दुर्गादास उइके और कांग्रेस के रामू टेकाम के बीच मुख्य मुकाबला है। इस बार दोनों दलों ने नए चेहरों पर दांव लगाया है।

पश्चिम बंगाल: तगड़ी सुरक्षा, कड़ी परीक्षा
पश्चिम बंगाल में तगड़ी सुरक्षा में पांचवें चरण के मतदान से तृणमूल कांग्रेस की असली परीक्षा शुरू होगी। इसकी वजह यह है कि अब तक चार चरणों में भाजपा, माकपा और कांग्रेस के कब्जे वाली क्रमश: दो-दो व चार सीटें थीं। अब तक 18 सीटों पर हुए मतदान में आठ सीटें विपक्षी दलों के पास थीं, जबकि 10 सीटें तृणमूल के पास। पांचवें चरण से तृणमूल के एकछत्र राज वाली लोकसभा सीटों में मतदान सोमवार से शुरू हो रहा है। ये सीटें काफी अहम हैं।

इनमें से चार सीटें ऐसी हैं, जहां हिंदीभाषी, जूट मिल श्रमिक व मतुआ समुदाय निर्णायक भूमिका में हैं। हावड़ा जिले की दो सीटें हावड़ा सदर व उलबेड़िया, हुगली जिले की तीन सीटें हुगली, श्रीरामपुर व आरामबाग और उत्तर 24 परगना जिले की बैरकपुर व बनगांव सीटों पर वोट डाले जाएंगे। यहां के 1.16 करोड़ से अधिक मतदाता 83 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे।

पहले चरण में मात्र 50 फीसद बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती के साथ राज्य में मतदान शुरू हुआ था, लेकिन पांचवां चरण आते-आते चुनाव आयोग को 100 फीसद बूथों पर केंद्रीय बलों की 578 कंपनियों की तैनाती का फैसला लेना पड़ा है। जम्मू-कश्मीर के बाद यह किसी भी राज्य में मतदान के दौरान बूथों पर रिकार्ड केंद्रीय बल की तैनाती है क्योंकि बंगाल में एक भी चरण बिना हिंसा के समाप्त नहीं हुआ है।

पांचवें चरण में राज्य के जिन तीन जिलों की सात लोकसभा सीटों के लिए मतदान होना है, सभी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में हैं। इनमें से अधिकांश सीटें कभी लाल दुर्ग कही जाती थीं, लेकिन 2009 के बाद से उनपर तृणमूल का कब्जा है। 2014 के बाद से बंगाल में तृणमूल को मुख्य चुनौती भाजपा से मिल रही है, हालांकि माकपा व कांग्रेस भी मैदान में है।

बनगांव व बैरकपुर दोनों ही सीटों पर कभी वाममोर्चा का कब्जा रहा था। इसपर फिर से कब्जा जमाने को वाममोर्चा आतुर है। कांग्रेस भी पीछे नहीं है। इसी तरह हावड़ा में तृणमूल व भाजपा के बीच मुख्य लड़ाई कही जा रही है लेकिन माकपा व कांग्रेस भी लड़ाई में है। हुगली, श्रीरामपुर और आरामबाग सीटों पर भी लड़ाई त्रिकोणीय है, लेकिन तृणमूल व भाजपा सामने हैं।

बिहार: साख दांव पर
बिहार में पांचवें चरण के चुनाव में लालू-राबड़ी, रामविलास पासवान और हुकुमदेव नारायण यादव की साख जुड़ी है, क्योंकि इस चरण में उनके खास उम्मीदवार विरासत संभालने के लिए मैदान में उतरे हैं। मधुबनी में पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव के पुत्र अशोक यादव, हाजीपुर में लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस और सारण सीट पर राजद प्रमुख लालू यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के समधी चंद्रिका राय मैदान में हैं। सारण सीट पर सबकी नजर है क्योंकि चंद्रिका राय का खुद उनके दामाद तेजप्रताप विरोध कर रहे हैं।

कौन कहां से
सीतामढ़ी में जदयू के सुनील कुमार पिंटू और राजद के अर्जुन राय के बीच माधव चौधरी त्रिकोणीय लड़ाई की स्थिति बना रहे हैं। मधुबनी में भाजपा के अशोक यादव, राजद के बद्री पूर्वे के अलावा कांग्रेस के बागी शकील अहमद मैदान में हैं। कांग्रेस के बागी शकील अहमद से राजद परेशानी में पड़ गया है। मुजफ्फरपुर में भाजपा के अजय निषाद और वीआइपी पार्टी से राजभूषण चौधरी के बीच मुकाबला है। सारण में भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी और राजद के चंद्रिका राय, हाजीपुर में लोजपा के पशुपति कुमार पारस और राजद के शिवचंद्र राम उम्मीदवार हैं।

जम्मू कश्मीर: अनंतनाग और लद्दाख
जम्मू-कश्मीर में दो सीटों लद्दाख और अनंतनाग पर सोमवार को मतदान होना है। पिछली बार मात्र 36 वोट से लद्दाख संसदीय सीट पर कब्जा जमाने वाली भाजपा के लिए इस बार फिर से जीत दर्ज करना चुनौती से कम नहीं है। कांग्रेस भी इस सीट पर कब्जा करने के लिए पूरा जोर लगा रही है तो दूसरी ओर दो निर्दलीय उम्मीदवार भी कम नहीं आंके जा रहे।

इस सीट पर कुल चार उम्मीदवार मैदान में हैं। 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले थुपस्तांग छिवांग कुछ महीने पहले ही भाजपा से त्यागपत्र दे चुके हैं। इस बार भाजपा ने जामियांग सीरिंग नाम्गयाल को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने रिगजिन स्पालबार को टिकट दिया है। दो निर्दलीय सज्जाद कारगिली व असगर अली करबलई अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इस सीट पर कुल मतदाता भी करीब दो लाख हैं। वहीं, दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट देश में इकलौती सीट है जहां पर तीण चरणों में मतदान हो रहा है।

छह मई को इस सीट पर तीसरे व अंतिम चरण में पुलवामा और शोपियां जिलों में मतदान होना है। त्राल, पांपोर, पुलवामा, राजपोरा, वाची और शोपियां इसी क्षेत्र में आते हैं। इन्हीं में सबसे अधिक आतंकवाद है। नेशनल कांफ्रेंस के हसनैन मसूदी, भारतीय जनता पार्टी के सोफी यूसुफ, इंडियन नेशनल कांग्रेस के गुलाम अहमद मीर, जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती सहित 18 उम्मीदवार मैदान में हैं।

झारखंड: चारों पर काबिज है भाजपा
झारखंड के दूसरे (देश के पांचवें) चरण की चार सीटों रांची, खूंटी, कोडरमा व हजारीबाग में छह मई को मतदान होगा। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा, वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व मंत्री अन्नपूर्णा देवी के अलावा वर्तमान सांसद रामटहल चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर है।

ये चारों सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं। चार में तीन सीटों पर भाजपा ने अपने सांसदों का टिकट काट कर नये प्रत्याशी दिए हैं। रांची में तो टिकट कटने से नाराज सांसद रामटहल चौधरी बगावत कर मैदान में कूद पड़े हैं। यहां वह भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ और कांग्रेस प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय से लोहा ले रहे हैं।

हजारीबाग में केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा की राह थोड़ी आसान दिखती है। कांग्रेस ने काफी उधेड़बुन के बाद करोड़पति गोपाल साहू को यहां से उतारा, जिनके लिए यह जमीन नई है। सीपीआइ का प्रतिनिधित्व कर रहे पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता भी यहां जोर लगाए हुए हैं। कोडरमा में भी मुकाबला त्रिकोणीय है।

यहां भाजपा ने वर्तमान सांसद रविंद्र राय का टिकट काट कर राजद छोड़ भाजपा में शामिल हुईं लालू यादव की करीबी पूर्व विधायक अन्नपूर्णा देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। अन्नपूर्णा के सामने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का विराट व्यक्तित्व बड़ी चुनौती है। खूंटी में भाजपा ने दिग्गज कड़िया मुंडा का टिकट काट पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को उतारा है। उनका मुकाबला कांग्रेस के कालीचरण मुंडा से है। 

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Posted By: Dhyanendra Singh

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