जमशेदपुर, जेएनएन। जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में 12 मई को चुनावी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ, एसएसबी, जैप और छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स को सौंपी गई है। यहां बाहर से आए पुलिस अफसरों को नक्सल क्षेत्रों की पूरी जानकारी दे दी गई है। इस बाबत हुई बैठक में खुद एसएसपी अनूप बिरथरे, सीआरपीएफ 193 बटालियन, सीआरपीएफ 247 बटालियन के कमांडेंट, एसएसबी 744, एसएसबी 722, एसएसबी 723, जैप, आइआरबी, कोबरा बटालियन, छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स के अधिकारी और एएसपी अभियान (नक्सल) प्रणव आनंद झा शामिल थे।

एसएसपी ने सभी को भौगोलिक स्थिति, नक्सली संगठन और उसके सदस्यों की कार्यशैली से अवगत कराया। बताया कि कुछ दिनों पूर्व सरायकेला-खरसावां जिले के चौका व चांडिल में विस्फोट व पोस्टर चस्पा चुके हैं। जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के एमजीएम, घाटशिला,गालूडीह, पटमदा, बोड़ाम, चाकुलिया थाना क्षेत्र ही सर्वाधिक नक्सल प्रभावित हैं। मतदान के दौरान इन क्षेत्रों में नक्सली उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। कहा कि किसी सूरत में नक्सलियों को बाहर नहीं निकलने देना है। इस दौरान हर पुलिस अफसरों को नक्सलियों से बचाव की जानकारी देनेवाली सुरक्षा संबंधित एक पुस्तिका मुहैया कराई गई।

बंगाल बार्डर की ओर रहेंगे कोबरा व जगुआर के जवान

एसएसपी ने बताया कि बंगाल बार्डर से जिले में कोई नक्सली या बदमाश प्रवेश न करे इसके लिए ऐसे इलाकों में कोबरा व जगुआर जवानों को सर्च अभियान की जिम्मेवारी दी गयी है। शहरी क्षेत्र के बूथों पर 10 मई को जिला पुलिस व दूसरे जिले से आए 5000 पुलिस जवान तैनात कर दिए जाएंगे। संवेदनशील बूथों के अलावा आसपास की प्रत्येक बिल्डिंग पर पुलिस दूरबीन के साथ मौजूद रहेगी। शहरी क्षेत्र में हर थाना प्रभारी व संबंधित डीएसपी को 24 घंटे तक जांच शुरू कर देने का निर्देश दिया गया है।

नक्सलियों से ऐसे बचाव कर सकते हैं अधिकारी

  • उग्रवाद या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पैदल चलें व परंपरागत रास्तों को छोड़कर सतर्कता पूर्वक आइइडी एंबुश की जांच करते हुए आगे बढ़ें।
  • कच्चे रास्तों तथा ताजा मरम्मत की हुई मिट्टी, पुआल, टहनियां जमा रखे स्थान, चमकीली वस्तु, सड़क के किनारे तार के टुकड़े नजर आए उससे दूर रहें।
  • बारूदी सुरंग मुख्य रूप से रास्ते में चढ़ाई शुरू होने वाले स्थान, तीखे मोड़ या ऐसे स्थान पर बिछाई जाती है जहां वाहन की गति स्वत: कम हो जाती है। ऐसे स्थानों से काफिला गुजरने से पहले जांच कर के ही आगे बढ़ें।
  • वाहन से जाने के समय हुड पर एक जवान को दूर से स्थिति पर नजर रखने के लिए अवश्य रखें तथा सभी जवान तैयार व सतर्क रहें।
  • लौटने के समय जवान दूसरे रास्ते का उपयोग करें, यदि एक ही रास्ता है तब कुछ दूरी तक गाड़ी चलाकर रोक लें और उतर कर सड़क के दोनों तरफ तार की तलाशी करते हुए आगे बढ़ें।
  • एंबुस होने पर गाड़ी से तुरंत उतरें और आड़ लेते हुए एंबुस की दिशा में धावा बोलकर फायर करें।
  • मतदान केंद्र व उसके आसपास उपद्रवियों की गतिविधि पर पैनी नजर रखें और मतदान केंद्र पर किसी भी तरह के हमले की दशा में त्वरित कार्रवाई करें।
  • नक्सल इलाके में जाने से पूर्व चालक को संभावित खतरों, रास्तों के बारे में पूरी तरह अवगत करा दें।
  • पुलिस के अधिकारी अपने मूवमेंट गुप्त रखें एवं इसकी चर्चा किसी से न करें, यहां तक की चालक से भी न करें, अचानक मूव करें।
  • कच्चे रास्तों पर पड़ने वाले नाला, पुलिया, नदी आदि में 50 मीटर पहले से ही रास्ता छोड़कर बाएं या दाहिने दूर होकर पार करें।

 

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Posted By: Rakesh Ranjan

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