गिरिडीह, दिलीप सिन्हा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1980 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह जिले के जमुआ में चुनावी रैली को संबोधित कर कांग्रेस का परचम लहराया था। करीब 39 साल बाद सोमवार 29 अप्रैल को जमुआ के ही श्याम सिंह नावाडीह में चुनावी रैली को संबोधित कर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोडरमा लोकसभा सीट पर भाजपा का परचम लहराने की कोशिश करेंगे।

इंदिरा गांधी अपने समय की लोकप्रिय प्रधानमंत्री एवं राजनेता थीं। आज नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता चरम पर है। चुनावी सफलता ही नहीं रैली में भीड़ को लेकर भी दोनों प्रधानमंत्रियों की तुलना हो सकती है। इंदिरा की रैली में जनसैलाब उमड़ पड़ा था। मोदी को देखने एवं सुनने पूरे देश में जिस तरह लोग उमड़ रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि उनकी रैली पिछला सारा रिकॉर्ड तोड़ देगी।

रैली के बाद जिले में चार सीटें जीती कांग्रेस : इंदिरा गांधी की रैली के कारण गिरिडीह जिले की छह विधानसभा सीटों में से चार पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। आज मोदी के समक्ष कोडरमा सीट के साथ-साथ गिरिडीह लोकसभा सीट अपने सहयोगी पार्टी आजसू को कब्जा दिलाने की चुनौती है। कोडरमा में भाजपा ने राजद की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी को उतारा है। अन्नपूर्णा को यहां त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री व झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी महागठबंधन के प्रत्याशी हैं जबकि 2004 के चुनाव से लगातार भाजपा एवं बाबूलाल को चुनौती देने वाले राजकुमार यादव माले के प्रत्याशी हैं। पूरे झारखंड में वामपंथी राजनीतिज्ञों को उम्मीद राजकुमार यादव से ही है। वहीं गिरिडीह में भाजपा समर्थित आजसू प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी एवं झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो के बीच आमने-सामने की लड़ाई है।

सरफराज ने याद की पुरानी यादें : 1980 में इंदिरा गांधी की जमुआ रैली के बाद पहली बार विधायक बने संयुक्त बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके पूर्व सांसद डॉ. सरफराज अहमद ने दैनिक जागरण से बातचीत में पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि 1980 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर उन्होंने कांग्रेस की राजनीति शुरू की थी। युवा कांग्रेस के वे तब जिलाध्यक्ष थे। संजय गांधी ने एक निर्देश जारी किया था कि प्रत्येक जिले से युवा कांग्रेस के एक नेता को विधानसभा चुनाव लड़ाना है। जमुआ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तानेश्वर आजाद ने उनका नाम इसके लिए आगे रखा। उस वक्त मेरी न तो उम्र और न ही आर्थिक स्थिति चुनाव लडऩे लायक थी। गांडेय विधानसभा क्षेत्र से इसके पूर्व कभी भी कांग्रेस चुनाव नहीं जीती थी। कांग्रेस ने यहां से मुझे प्रत्याशी बना दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की चुनावी रैली जमुआ थाना के बगल के मैदान में तय हुई थी।

तब कराई गई थी कई बोरिंगः इंदिरा गांधी की रैली में शामिल होने शहर से लेकर सुदूर गांवों से विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा था। लोगों को पीने का पानी मिल सके, इसके लिए कई बोरिंग कराई गई थी। सभी छह प्रत्याशियों को मंच के नीचे एक कतार में खड़ा कर दिया गया था। इंदिरा जब पहुंची तो मेरी कम उम्र देखकर उन्हें लगा कि मैं प्रत्याशी नहीं हूं। उन्होंने मुझे कहा कि तुम क्यों खड़े हो। यहां सिर्फ प्रत्याशियों को खड़ा रहना है। इस पर मैंने कहा कि मैं भी गांडेय से प्रत्याशी हूं। मेरी कम उम्र देखकर इंदिरा को पहले आश्चर्य हुआ। इसके बाद वे मेरा हाथ पकड़कर मुझे मंच पर ले गयीं। लोगों से मुखातिब होकर कहा कि मेरा यह सबसे छोटा प्रत्याशी है। इसे आपको अपना आशीर्वाद देना होगा। भीड़ ने हाथ उठाकर समर्थन का भरोसा दिया। रैली अभूतपूर्व हुई थी। इंदिरा की यह रैली इतनी चर्चित हुई थी कि जहां यह रैली हुई थी, वह इंदिरा गांधी मैदान के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मैं भी पहली बार विधायक बन गया। मुझे बिहार सरकार में भी शामिल कर लिया गया।

कोडरमा-गिरिडीह दोनों सीटों के लिए भरेंगे हुंकार : जमुआ की धरती पर प्रधानमंत्री के रूप में चुनावी रैली को संबोधित करने इस बार नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। जमुआ से मोदी कोडरमा एवं गिरिडीह दोनों सीटों के लिए हुंकार भरेंगे। तब इंदिरा गांधी का जलवा था, आज मोदी का जलवा है। मोदी की रैली को ऐतिहासिक बनाने का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लिया है। रैली को लेकर वे दो दिन पूर्व गिरिडीह के पचंबा में भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं संग बैठक कर चुके हैं। पूरी भाजपा इस मिशन में लग गई है। मोदी की रैली से न सिर्फ इंदिरा गांधी का रिकार्ड तोडऩे बल्कि हाई प्रोफाइल कोडरमा लोकसभा सीट पर कब्जा करने का मार्ग प्रशस्त होने का भाजपा को भरोसा है।

 

Posted By: mritunjay

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