दुमका, अनूप श्रीवास्तव। कौन सुनेगा, किसको को सुनाए, इसलिए चुप रहते हैं। यह बात पूरी तरह से शहर के बीचोबीच बक्शीबांध मुहल्ले के मेलगढ़ा में रहने वाली बड़ी आबादी पर सटीक बैठती है। शहर से रोज निकलने वाला कचरा मेलगढ़ा में दस एकड़ की जमीन पर गिराया जाता है। अब ये जगह पहाड़ का रूप ले चुका है। दुमका से सांसद बनने वालों ने आज तक यहां से गंदगी पर रोक लगाने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं, किया। नगर परिषद ने प्रयास किया भी तो बीस साल तक जमीन आड़े रहती है। अब तो मेलगढ़ा से गंदगी हटने की बात पर लोग भड़क जाते हैं। एक ही बात कहते हैं कि किससे कहें, अब तो बोल-बोलकर कान पक गए हैं। कोई सुनता ही नहीं, इसलिए चुप्पी साध ली है।
शनिवार सुबह सात बजते ही ट्रैक्टरों से शहर की सारी गंदगी गिरना शुरू हो जाती है। करीब एक दर्जन ट्रैक्टर से गंदगी गिरती है। लोग ट्रैक्टर को आते देखते हैं, लेकिन कुछ बोल नहीं पाते हैं। दरअसल लंबे समय से शहर की सारी गंदगी नगर परिषद की जमीन मेलगढ़ा में डंप होती आ रही है। करीब पांच साल पहले लोगों ने मेलगढ़ा के पास जमीन लेकर मकान बनवा लिया। अब तो एक हजार परिवार इसके आसपास रहते हैं। सभी ने इस उम्मीद से मकान बनवाया था कि आने वाले समय में यहां से गंदगी उठकर शहर से बाहर चली जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जब जब विरोध हुआ तो नगर परिषद ने यह कहकर लोगों को शांत करा दिया कि कूड़ा के स्थायी निदान के लिए शहर के बाहर जमीन तलाश की जा रही है। सुबह से लेकर शाम तक गंदगी के ढेर से उठने वाली बदबू की वजह से लोगों का रहना मुश्किल है। बारिश में हालात यह बन जाते हैं कि ढेर से निकलने वाला गंदा पानी सड़क से बहकर लोगों के घरों में चला जाता है।
विरोध के बाद बदलता रहा स्थल : तीन साल पहले मेलगढ़ा के लोगों ने नगर परिषद को कूड़ा गिराने पर रोक लगा दी। विरोध के बाद सारी गंदगी रेलवे स्टेशन के पास उसकी जमीन पर डंप की जाने लगी। यहां भी विरोध शुरू हुआ तो फिर मेलगढ़ा में गिराया जाने लगा। लोगों का गुस्सा भड़का तो जिला प्रशासन की टीम ने नापी का हवाला देकर शांत करा दिया। यहां पर कुछ लोगों ने नगर परिषद की जमीन पर कब्जा भी कर लिया है और प्रशासन की सख्ती के बाद सभी की बोलती बंद हो गई।
आज तक नहीं बना चुनावी मुददा : लोकसभा हो या फिर विधानसभा चुनाव आज तक मेलगढ़ा को लेकर किसी नेता ने आवाज नहीं उठाया। बस चुनाव आने पर नेता लोगों के बीच जाते और आश्वासन देकर वोट लेकर फिर झांकने नहीं आते हैं। नेताओं के इसी झूठे आश्वासन से लोगों में इस बार नाराजगी है। सभी ने मन बना लिया है कि इस बार जो भी नेता वोट मांगने के लिए आएगा, उससे मेलगढ़ा के मसले पर जरूर घेरा जाएगा।
हवाई अडडा राह में रोड़ा : ठोस कचरा प्रबंधन के लिए शहर से बाहर दस एकड़ जमीन चाहिए। एक साल पहले सदर प्रखंड के रामपुर गांव के पास जमीन का चयन किया गया था। तब बात उठी कि अगर सारी गंदगी यहां पर एकत्र की जाएगी तो पक्षी भी आएंगे। इससे हवाई अड्डे से उडऩे वाले जहाज पर खतरा हो सकता है। इसलिए शहर से बाहर ही जमीन ठीक होगी। इसी साल नगर परिषद ने शहर से दस किलोमीटर दूर पांच जगह का चयन किया, लेकिन कोई रणनीति नहीं बन सकी। केवल एक जगह सदर प्रखंड की ठाड़ी गांव की जमीन का चयन किया गया है। हालांकि अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
सुबह से लेकर शाम तक गंदगी के ढेर से उठने वाली बदबू के बीच रहना आसान नहीं है। कई बार आवाज उठाई, लेकिन नेता तो दूर अधिकारियों ने किसी तरह की पहल नहीं की। अब सब प्रशासन पर छोड़ दिया है।
-अरूण ठाकुर, बक्शीबांध
बारिश के समय सारा गंदा पानी सड़क पर आ जाता है। इससे उठने वाली बदबू के बीच रहना पड़ रहा है। हर बार सुनते हैं कि यहां से ढेर उठने वाला है, लेकिन पांच साल से कुछ नहीं हुआ। अब इस पर कुछ बोलने में शर्म से आती है।
-र्शिमला देवी, बक्शीबांध
आए दिन आग लगा दिया जाता है। मरे हुए जानवर फेंक दिए जाते हैं। शहर के बीचोंबीच गंदगी का ढेर कहीं देखा है। कहने के लिए यह उपराजधानी है, लेकिन स्थिति किसी गांव से ज्यादा बदतर है।
-पूनम देवी, बक्शीबांध
गंदगी की वजह से आस दिन लोग बीमार रहते हैं। धुआं से खराब बदबू आती है। हर समय घर का दरवाजा बंद रखना पड़ता है। चुनाव के समय वोट लेने के बाद फिर कोई देखने तक नहीं आता है।
-सीताराम भंडारी, बक्शीबांध
ठोक कचरा प्रबंधन के लिए शहर से दस किलोमीटर दूर ठाड़ी में जमीन का चयन कर लिया गया है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। अगर किसी तरह की बाधा नही आयी तो आने वाले दिन में नई जमीन पर काम भी शुरू हो जाएगा। नगर परिषद मेलगढ़ा से गंदगी हटाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
-राहुल आनंद, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, दुमका
 

Posted By: mritunjay

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