लखनऊ [जितेंद्र शर्मा]। आज नजर आ रहे मजबूत भगवा किले की नींव के बड़े पत्थर कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की धरती में ही गढ़े हैं। लंबे समय तक भाजपा बुंदेलखंड में सपा और बसपा के प्रभाव के आगे सहमी-सहमी ही रही। निश्चित तौर पर क्षेत्र के मतदाताओं के इकतरफा एतबार और 'मोदी मैजिक' ने भाजपा को फर्श से अर्स पर पहुंचाया लेकिन, गठबंधन के बाद सपा-बसपा की पुरानी जमीन पर भाजपा को नई जंग नई चुनौती के साथ लड़नी होगी।

कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में दस लोकसभा सीटें आती हैं। ताजा तस्वीर देखें तो लगेगा कि यह अंचल तो भाजपा के पूरे प्रभाव वाला है, क्योंकि दस में से नौ सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को करिश्माई जीत मिली। यही नहीं, उसके बाद हुए 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां की 52 में से 47 विधानसभा सीटों पर कमल खिला। मगर, यहां थोड़ा पीछे चलते हैं तो अहसास होता है कि बुंदेलखंड की बंजर धरती पर इस बार बड़ा दंगल लगने जा रहा है। जिस तरह से कन्नौज और काफी हद तक इटावा में सपा का एकाधिकार नजर आता है, उस तरह कोई ऐसी लोकसभा सीट नहीं है, जहां भाजपा ने सबसे मजबूत पकड़ का अहसास करा पाया हो। कानपुर पर कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है तो जातीय समीकरण बसपा प्रत्याशियों को भी बारी-बारी से लखनऊ-दिल्ली पहुंचाते रहे हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां भरपूर मेहनत की। तत्कालीन प्रदेश प्रभारी और वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पहली बार बूथ अध्यक्षों का सम्मेलन बुलाया और सीधे मुखातिब हुए। बूथ मैनेजमेंट और मोदी लहर ने प्रचंड बहुमत दिलाया। भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की दस में से नौ लोकसभा सीटें जीत गई। उससे पहले भाजपा यहां शून्य थी।

हां, डिंपल यादव जरूर परिवार से विरासत में मिली कन्नौज की सीट को बचा पाने में कामयाब रहीं। फिर भाजपा रुकी-सुस्ताई नहीं। कार्यक्रम-दर-कार्यक्रम चलते रहे। बूथ तक मेहनत होती रही, जिसका परिणाम हुआ कि 2017 के विधानसभा चुनाव में 52 में से 8 से बढ़कर 47 सीटें भाजपा की झोली में आ गईं। भगवा खेमे के पास बेशक, पिछली दो रिकॉर्ड जीतों का आत्मविश्वास है लेकिन, सपा-बसपा गठबंधन का नया जातीय समीकरण नजरअंदाज करना मुनासिब न होगा।

वर्तमान स्थिति

कानपुर- भाजपा

अकबरपुर- भाजपा

फतेहपुर- भाजपा

इटावा- भाजपा

फर्रुखाबाद- भाजपा

झांसी- भाजपा

बांदा- भाजपा

हमीरपुर- भाजपा

कन्नौज- सपा

2009 में यह रहे परिणाम

सपा-     पांच

कांग्रेस-  चार

बसपा-   एक

भाजपा- शून्य

Posted By: Umesh Tiwari

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