नई दिल्‍ली, एजेंसी। Lok Sabha Election 2019 Result पिछले लोकसभा चुनावों की तुलना में इस बार मतदाताओं ने नोटा को कम वरीयता दी है। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में करीब 60 लाख यानी 1.08 फीसद मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनावों में महज 0.98 फीसद मतदाताओं ने ही इसमें दिलचस्‍पी दिखाई है। हालांकि, पिछले आम चुनावों की तुलना में इस बार कुछ राज्‍यों में नोटा के प्रति आकर्षण बढ़ता भी दिखाई दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, उत्‍तर प्रदेश में 0.88 फीसद, मध्‍य प्रदेश में 0.92, पश्चिम बंगाल में 0.96 और हरियाणा में 0.68 फीसद मतदाताओं ने नोटा का इस्‍तेमाल किया है। निर्वाचन अयोग के मुताबिक, हरियाणा में जहां भाजपा ने सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की है, वहां 41,000 से ज्‍यादा मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। हरियाणा की अंबाला लोकसभा सीट पर सबसे ज्‍यादा 7,943 मतदाताओं ने नोटा का इस्‍तेमाल किया, वहीं भिवानी-महेंद्रगढ़ में सबसे कम 2,041 लोगों ने नोटा में दिलचस्‍पी दिखाई।

अंबाला और भिवानी-महेंद्रगढ़ को छोड़कर बाकी आठ लोकसभा सीटों, फरीदाबाद में 4,986, गुरुग्राम में 5,389, हिसार में 2,957, करनाल में 5,463, कुरुक्षेत्र में 3,198, रोहतक में 3,001, सिरसा में 4,339 और सोनीपत में 2,464 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। देश के बाकी राज्‍यों की बात करें तो नगालैंड में 0.19, दिल्‍ली में 0.53, महाराष्‍ट्र में 0.90, कर्नाटक में 0.71, हिमाचल में 0.85 और जम्‍मू-कश्‍मीर में 0.64 फीसद लोगों ने नोटा पर मुहर लगाई।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटा बटन लगाने के दिए थे निर्देश
साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को ईवीएम मशीनों में नोटा बटन की व्‍यवस्‍था करने के निर्देश जारी किए थे। 23 सितंबर 2013 को आए इस फैसले के पक्ष में दलील दी गई थी कि ईवीएम मशीन में नोटा का बटन होने से ऐसे मतदाता के मत की गोपनीयता बनी रहेगी जो किसी भी उम्मीदवार के हक में वोट नहीं देना चाहता, और ना ही वोट देने से अनुपस्थित रहना चाहता है। बता दें कि इस लोकसभा चुनाव में जीत के सपने के साथ उतरे कई प्रत्याशी नोटा से भी पिछड़ गए हैं।  

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Posted By: Krishna Bihari Singh