पटना [राज्य ब्यूरो]। आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) एक-एक कर अपने प्रमुख विरोधी राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) के मुददों की हवा निकालने की मुहिम में जुट गया है। राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में अपने सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अलग स्‍टैंड अपना कर जदयू ने राजद के लिए मुसीबत खड़ा कर दिया है।

सवर्ण आरक्षण पर जदयू के स्‍टैंड से राजद को परेशानी 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सवर्ण आरक्षण की घोषणा के बाद राजद ने जोर-शोर से मांग की थी कि आबादी के हिसाब से इसका निर्धारण हो। राजद को लगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ाव के चलते जदयू इस मांग का विरोध करेगा या चुप बैठ जाएगा। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसी ही मांग कर राजद को नए मुद्दे खोजने के लिए मजबूर कर दिया है। नीतीश की मांग है कि अगली जनगणना में जातियों की भी गिनती हो। 1931 के बाद देश में जाति आधारित जनगणना नहीं हुई थी।

तीन तलाक के मुद्दे पर भाजपा से अलग जदयू की राय

बिहार में राजद ने 'माय' (मुस्लिम-यादव) समीकरण को आधार मानकर अन्य समूहों को जोडऩे की कोशिश में है। 2005 के विधानसभा चुनाव के समय से ही अल्पसंख्यक, राजद के बदले जदयू के करीब होने लगे थे। 2010 के चुनाव तक उनका जदयू से पूरा जुड़ाव हो चुका था। हाल के दिनों में राजद ने एकबार फिर पुराने माय समीकरण को एकजुट करने की कोशिश की है। तीन तलाक को उसने बड़ा मुददा बनाया। जवाब में जदयू ने कह दिया कि वह इस मुददे पर भाजपा के साथ नहीं है। अगर यह समस्या है तो इसके समाधान की जिम्मेवारी संबंधित समुदाय पर छोड़ देनी चाहिए।

भाजपा से अलग स्वतंत्र पहचान बनाने में जुटा जदयू

राजद कुछ खास मसले को उठाकर यह साबित करने की कोशिश करता है कि जदयू कुछ और नहीं, भाजपा का पिछलग्गू है। जवाब में जदयू अपने एक्शन से बता दे रहा है कि उसकी स्वतंत्र पहचान है। बाबरी मस्जिद, धारा 370 और असमी नागरिकता के मामलों में भाजपा से अलग स्टैंड लेकर जदयू हर बार राजद पर पलटवार कर दे रहा है।

अब कांग्रेस भी आई जदयू की रणनीति के दायरे में

अब तो जदयू की रणनीति के दायरे में कांग्रेस भी आ गई है। नीतीश ने कल कांग्रेस के बारे में भी कह दिया-अगर कांग्रेस राज्यसभा में भी असम नागरिकता वाले विधेयक के पेश होने के समय सदन का बहिष्कार करती है तो माना जाएगा कि वह विधेयक के पक्ष में है। जबकि जदयू विधेयक का विरोध करने वाले असम गण परिषद के साथ खड़ा है। 

केसी त्‍यागी बोले: जातिगत जनगणना करे सरकार

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी कहते हैं कि उनकी पार्टी जातीय जनगणना और संख्या के हिसाब से हिस्सेदारी की मांग पहले से करती रही है। कोई भी राजनीतिक दल इससे असहमत नहीं है। यह अवसर है। सरकार जाति आधारित गणना करे, ताकि समाज के वंचित हिस्से का आरक्षण और दूसरी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

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